ग्रेसिम उद्योग स्थापना:स्थायी श्रमिकों से जितने दिन काम कराया, उतने दिन का ही वेतन जारी

नागदाएक वर्ष पहले
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  • यूनियन नेताओं के रिश्तेदारों और चहेतों को पूरी पगार!

ग्रेसिम उद्योग स्थापना के 70 साल के इतिहास में जो अब तक नहीं हुआ, वो कोरोना संक्रमण की आड़ में हो रहा है। 23 मार्च को ड्यूटी नहीं पहुंचे ठेका श्रमिकों के वेतन का मामला अभी हल भी नहीं हुआ कि उद्योग प्रबंधन ने जून माह में जितने दिन स्थायी श्रमिकों को काम पर बुलाया, उतने दिन का ही वेतन जारी किया है। जबकि उद्योगों में कार्यरत यूनियन नेताओं और उनके चहेतों को पूरे दिन काम नहीं करने पर भी पूरा वेतन दिया गया है। यह आरोप श्रमायुक्त इंदौर को शिकायत में जिला कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सुबोध स्वामी ने लगाते हुए दोहरे मापदंड के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी भी दी है।  

उद्योग बंद होने की स्थिति में दिया जा सकता लेऑफ
स्वामी के अनुसार स्थायी श्रमिकों को उसी सूरत में आधा वेतन दिया जा सकता है, जब उद्योग पूरी तरह से बंद हो। मगर वर्तमान में उद्योग की 11 में से 6 मशीनें संचालित है और प्रतिदिन 240 टन उत्पादन हो रहा है। ऐसी स्थिति में स्थायी श्रमिकों को लेऑफ देना श्रम नियमों के विपरीत है। स्वामी ने श्रम संगठनों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया है कि प्रबंधन और यूनियन के 
मध्य कोई गुप्त सहमति हुई है। इस कारण उत्पादन प्रक्रिया गतिशील होने पर भी श्रमिकों काे लेऑफ दिया जा रहा है। शहर के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब उद्योग प्रबंधन श्रम कानूनों को ताक पर रखकर अपने मनमाने तरीके से उद्योग का संचालन कर रहा है।

रोटेशन आधार पर अन्य जगह हाजरी ड्यूटी नहीं करने पर भी लेऑफ
मामले में संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा के जोधसिंह राठौड़ ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 12 जून को दिए फैसले को आधार मानें तो नो वर्क-नो पेमेंट का प्रावधान है। ये तो यूनियनों का प्रभाव है, जाे मशीनें बंद हैं। उन पर कार्यरत श्रमिकों को भी रोटेशन के आधार पर अन्य जगह हाजरी दी जा रही है। बतौर उदाहरण अगर किसी श्रमिक ने माह में 15 दिन हाजरी की है तो इतने दिनों का पूरा वेतन और शेष 11 दिन ड्यूटी पर नहीं करने के बाद भी इन दिनों का आधा वेतन यानी कि लेऑफ दिया जा रहा है। वेतन के साथ एजुकेशन एलाउंस- 1500, मेडिक्लेम-1000, क्वार्टर अलाउंस-850, ग्रुप इश्यारेंस-40 रुपए भी वेतन के साथ ही श्रमिकों को भुगतान किया जा रहा है। यूनियन लीडरों के रिश्तेदारों और समर्थकों को पूरा वेतन दिए जाने का आरोप कोरी अफवाह है। इधर ग्रेसिम के जनसंपर्क अधिकारी संजय व्यास ने कहा केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार श्रमिकों से रोटेशन के आधार पर काम लिया जा रहा है। हाजरी के मान से पूरा वेतन भी दिया जा रहा है।

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