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मुसीबत में फंसे इंसान:आंखों की रोशनी खो चुके शहर के बच्चे को अनजान शहर में मिली मदद, स्वयं के घर में रखकर कराया इलाज, रुपए कम पड़े तो फाउंडेशन ने किया सहयोग

नागदा23 दिन पहले
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  • काश! सबको हो जाए मदद का संक्रमण तो हर एक की जिंदगी हो जाए रोशन...

मदद, सहयोग, सरोकार, हेल्प ये महज शब्द नहीं मुसीबत में फंसे इंसान के लिए कुबेर के खजाने से भी बड़ी दौलत है। यह कहना है मोहनश्री फाउंडेशन के मनोज बारदानवाला का। हाल ही में अपने साथ घटित हुआ एक वाकया भास्कर से सांझा करते हुए उन्होंने बताया कि जरूरी नहीं कि किसी की मदद के लिए हमारे पास अकूत धन होना जरूरी है... बस अगर मदद करने का भाव हो तो मुसीबत में फंसे व्यक्ति के लिए एक छोटी रकम भी जिंदगी में रोशनी के रंग भर सकती है। मनोज के अनुसार शहर से सटे ग्राम गुराड़िया पित्रामल निवासी गणेश ने महज 17 साल की उम्र में आंखों की रोशनी गंवा दी। छह माह पहले उसे दोनों आंखों से धुंधला और में कुछ भी दिखाई देना बंद हो गया। लॉकडाउन की वजह से इलाज संभव नही था। अनलॉक के बाद उसके पिता उसे इलाज के लिए गुजरात स्थित नवसारी लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने बताया कि गणेश की स्थिति नाजुक है। जल्द ऑपरेशन किया जाए तो भी पूरी तरह से आंखों की रोशनी लौटना संभव नहीं। ऑपरेशन पर 50 हजार का खर्च भी होगा।

व्यवस्था नहीं होने पर 10 हजार रुपए की मदद की
मजदूरी करने वाले गणेश के पिता सुरेश मकवाना के लिए बड़ी रकम जुटाना मुमकिन नहीं था। इस पर नागदा में भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष राजेश धाकड़ से संपर्क किया। धाकड़ ने नवसारी निवासी उनके जीजाजी महाबल. आर. शाह को गणेश की मदद करने का अनुरोध किया। शाह ने डॉक्टर से चर्चा कर ऑपरेशन का खर्च 20 हजार ही करवा दिया। नागदा लौटकर जैसे तैसे गणेश के पिता ने 10 हजार रुपए जुटाए। मगर अभी भी 10 हजार रु. कम थे। मदद के लिए मोहनश्री फाउंडेशन के पास पहुंचा। फाउंडेशन ने उन्हें 10 हजार रुपए की मदद देकर नवसारी भेजा। यहां एक बार फिर महाबल आर. शाह ने गणेश और पिता सुरेश को अपने घर में शरण दी। 10 दिन तक उनके रहने-खाने का इंतजाम भी उन्होंने अपने घर पर ही किया।

अब देखने लग गया गणेश
गणेश की आंखों का ऑपरेशन हो चुका है। दूसरी आंख का ऑपरेशन हाल ही में 24 सितंबर को हुआ है। मनोज के अनुसार सुरेश ने बताया कि आंखों की रोशनी खो चुके बेटे ने खाना-पीना तक छोड़ दिया था। वह इतना अवसाद में था कि हर समय रोता रहता था। ईश्वर की कृपा और मददगारों के सहयोग से गणेश को दिखाई भी देने लगा है। इस कहानी का सार बस इतना है कि अगर मुसीबत में फंसे किसी भी इंसान के लिए हम मदद करें तो हर एक की जिंदगी रोशन की जा सकती है।

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