रिसाव / अधिकारी बोले- किसी ने बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का कचरा जलाया, इसी से लोगों को हुई थी घुटन

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  • तीनों उद्योग के मॉनिटरिंग सिस्टम में नहीं मिले गैस लीकेज के सबूत, शहर पहुंची थी प्रदूषण बोर्ड की टीम
  • क्योंकि... सीएस-टू लाफिंग गैस की नहीं आती तीखी गंध, क्लोरिन रिसती तो पहले बिड़लाग्राम में होता असर

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 06:01 AM IST

नागदा. शनिवार-रविवार की देर रात गैस रिसाव की सूचना पर मंगलवार को जांच करने पहुंची प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने शहर के तीनों बड़े उद्योगों के ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम की बारीकी से जांच की। तीनों ही उद्योगों के सिस्टम में मानक स्तर सही मिले हैं। बोर्ड के जिलाधिकारी एस.एन. द्विवेदी ने बताया टीम द्वारा भेजी रिपोर्ट में बताया गया है कि रहवासियों ने तीखी गंध से घुटन की शिकायत जरूर की है। मगर यह भी पता चला है कि शनिवार-रविवार की देर रात मंडी क्षेत्र में किसी ने दोना-पत्तल में उपयोग में आने वाला प्लास्टिक युक्त कचरा बड़ी मात्रा में जलाया है। संभवत उसके धुएं और तीखी गंध से रहवासियों ने बेचैनी होने से दम घुटने की शिकायत की है। 


द्विवेदी ने यह भी बताया ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम में उद्योगों द्वारा उत्पादन प्रक्रिया में उपयोग किए जा रहे केमिकल और गैस का लेवल के हर सेकंड की मॉनिटरिंग होती है। यह ऑनलाइन है। अगर रिसाव जैसा कुछ होता तो सबसे पहले प्रदूषण बोर्ड को अलार्मिंग होती। गैस रिसाव की आशंका मंडी क्षेत्र के रहवासियों ने जताई है, लेकिन यह गलत है। असल में सीएस-टू का रिसाव होता तो यह फ्रेंडली गैस है। इसकी तीखी गंध नहीं आती, यह लाॅफिंग गैस है। इससे लोगों को महसूस ही नहीं होता और वो इसका शिकार हो जाता है। साथ ही क्लोरिन का रिसाव होता तो पहले यह उद्योग के आसपास के क्षेत्र में यानी बिड़लाग्राम के रहवासियों का चपेट में लेता। यह गैस लोगों काे लगती तो हॉस्पिटल तक ले जाना पड़ता। किसी के पीड़ित होने की जानकारी सामने नहीं आई है।

किसने जलाया प्लास्टिक का कचरा अब उसकी तलाश
प्रदूषण बोर्ड की टीम अब इस जांच में जुटी है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में प्लास्टिक का कचरा देर रात में किसने जलाया। इसके लिए टीम ने रहवासियों से भी सहयोग मांगा है, ताकि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

  चंबल में एसिड बहाने वालों पर कैमरे से रखेंगे नजर
बोर्ड के अधिकारी द्विवेदी ने यह खुलासा भी किया बारिश आते ही वेस्ट एसिड नदी, नालों और खाल में बहाने वाले कारोबारी फिर से सक्रिय हो गए हैं। तीन दिन पूर्व ही महिदपुर में नदी किनारे एसिड बहाने की सूचना मिली है। इसकी जांच चल रही है। चूंकि एसिड कारोबारियों का मुख्य ठिकाना नागदा है, यहीं से पूरा नेटवर्क संचालित हो रहा है। ऐसे में संभावना है कि बारिश होने पर चंबल में एसिड बहाया जा सकता है।

इन्हें रोकने के लिए तीनों उद्योगों की सहायता से सीसीटीवी कैमरे मांगे गए हैं। यह कैमरे जल्द उन स्थानों पर लगाए जाएंगे, जो कारोबारियों के लिए आसान टारगेट है। साथ ही मेहतवास में औद्योगिक क्षेत्र से निकल रहा नाला, जिसमें आए दिन केमिकल बहाने से चंबल के प्रदूषित होने की शिकायत मिलती है, उस स्थान पर शक्तिशाली नाइट विजन कैमरे सबसे पहले लगाए जाएंगे। इसके अलावा जिस मार्ग से उद्योग के बड़े नाले गुजर रहे हैं, वहां भी कैमरे लगाकर एसिड बहाने वालों पर अंकुश लगाया जाएगा।


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