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जाप कर दी श्रद्धांजलि:हंस के समान जिन शासन को आचार्यश्री ने शोभायमान किया -डाॅ. अमृतरसा

नागदा10 महीने पहले
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हंस जहां भी जाता है, वहां शोभा बढ़ाता है। हानि तो तालाब की होती है, जहां से वह चला जाता है। ठीक वैसे ही वह विभूति जहां गई, वहां सद्गति से परमगति पर पहुंच गई। हानि तो जिन शासन रूपी तालाब को हुई है। यह कमी हमें सदैव रहेगी। आप हंस समान थे। जिन शासन को आचार्यश्री ने शोभायमान किया है।  यह बात राष्ट्रसंत जैनाचार्य श्रीमद् विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी की सुशिष्या डाॅ. अमृतरसा श्रीजी ने दीक्षा दानेश्वरी आचार्यश्री विजय गुणरत्न सूरीश्वरजी के देवलोकगमन पर मंगलवार को त्रिस्तुतिक श्रीसंघ में उपस्थित समाजजन के समक्ष गुणानुवाद सभा में कही। डाॅ. अमृतरसा ने आगे बताया दीक्षा दानेश्वरी आचार्य 21 वर्ष की उम्र में सगाई छोड़कर मुंबई में दीक्षा ग्रहण की थी। 56 वर्ष की उम्र में आचार्य पद प्रदान किया गया। अब तक 451 लोगों को दीक्षा ग्रहण कराई गई। आपके सान्निध्य में सूरत व पालिताणा में सामूहिक दीक्षा के आयोजन हुए। ओलीजी आराधना, छःरी पालित संघ, उपधान तप, नव्वाणु यात्रा, आध्यात्मिक ज्ञान शिविरों में आपने सान्निध्यता दी। जीरावाला तीर्थ व वरमाण तीर्थ के जीर्णोद्धार में आप मार्गदर्शक थे। त्रिस्तुतिक श्री संघ के नरेंद्र धाड़ीवाल ने बताया कि महिदपुर के सांसारिक भानेज आचार्य निपुणरत्न सागर सूरीश्वरजी व मालव विभूषण अनुयोगाचार्य प्रवर वीररत्नविजयजी के गुरु दीक्षा दानेश्वरी आचार्य श्री विजयगुणरत्न सूरीश्वरजी का सोमवार को सूरत (गुजरात) में  देवलोकगमन हो गया। इससे समाज में शोक व्याप्त है। उपस्थित समाजजन ने 12-12 नवकार मंत्र का जाप कर गुरुदेव को भावांजलि दी।

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