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ग्राउंड रिपोर्ट:29 करोड़ से 22 गांवों में पहुंचाना था पानी, 6 महीने बाद भी 18 गांव प्यासे

नागदा10 महीने पहले
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गांव बेरछा में हैंडपंप से पानी भरती युवतियां। - Dainik Bhaskar
गांव बेरछा में हैंडपंप से पानी भरती युवतियां।
  • ग्राउंड रिपोर्ट: मात्र पाइप लाइन डालकर योजना शुरू की, ऊंचे इलाकों का ध्यान नहीं रखा

चंबल के डाउन स्ट्रीम के 22 गांवों को 29 करोड़ की योजना शुरू होने के 6 माह बाद भी साफ पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। तत्कालीन पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे ने जनवरी में ग्रामीण जल आवर्द्धन योजना की शुरुआत की थी, लेकिन 6 माह बाद भी 22 में से 18 गांवों के ग्रामीण पानी के लिए ट्यूबवेल या हैंडपंप पर भी निर्भर हैं। कारण बिना रूपरेखा के ही मात्र पाइप लाइन डालकर जल निगम ने योजना का शुभारंभ कर दिया। गांवों की स्थिति को परखा ही नहीं गया, इससे ऊंचे इलाकों में पानी पहुंचता नहीं। नतीजतन ग्रामीणों के घर के आगे लगे नल शोपीस बनकर रह गए हैं। वे दूर-दूर से पानी का इंतजाम करते हैं। 
दिव्यांगता के शिकार परिवार के घर ही नहीं पहुंचता पानी
परमारखेड़ी पंचायत में तीन गांव आते है, भगतपुरी, परमारखेड़ी व किलाेड़िया। परमारखेड़ी में ही सबसे अधिक लोग दूषित पानी पीने से बीमार और दिव्यांगता का शिकार हुए। गांव के बहादुरसिंह, कमल व भेरूसिंह ने बताया आधा गांव नीचे तो आधा ऊंचाई पर है। ऊंचाई वाले घरों के नलों पर पानी आता ही नहीं है, कभी आ जाए तो एक कुप्पी भरना भी मुश्किल होता है। दिव्यांग परिवार भी ऊंचाई वाले इलाके में रहता है। उन्हें भी पानी के लिए मशक्कत करना होती है। 
गांव किलाेड़िया के प्रदीप गुर्जर बोले नल शोपीस बनकर रह गए हैं। हनुमान मंदिर के पास हाल यह है कि पानी आता ही नहीं है। गांव भगतपुरी की नई आबादी योजना से अभी तक वंचित है।
एक गली में आ रहा पानी, वह भी मटमैला, बाकी सब प्यासे
गांव गिंदवानिया की होटल पर ग्रामीण बैठे थे। उनसे पूछा पानी कैसे आ रहा तो वह जल निगम का समझकर बोले पानी आ ही कहां रहा है। एक गली को छोड़ दें तो पूरा गांव प्यासा है। ग्रामीण आत्माराम डेलवार, राकेश प्रजापत बोले बलाई माेहल्ला, प्रजापत मोहल्ला में बिल्कुल पानी नहीं आ रहा है। मात्र नई आबादी में पानी आ रहा है, वह भी मटमैला। महिलाओं को कुएं और हैंडपंप से पानी लाना पड़ रहा है।
पुराने गांव में पहुंचा पानी, नए गांव के 50 घर इंतजार में
गांव झिरमिरा के नुक्कड़ पर पहुंचे तो यहां लगे ग्रामीणों के जमावड़े से चर्चा शुरू हो गई। उनसे नलों से पानी आने की बात कहीं तो ग्रामीण बोले कहां है पानी। पुराने गांव में नल आते हैं बस, नए गांव के 50 घरों में नल कनेक्शन दे दिए, लेकिन पानी अभी तक नहीं अाया। ग्रामीण भारतसिंह, माधुसिंह, जीवनसिंह ने बताया कि वार्ड क्रमांक 3 में पाइप लाइन तक डालना बाकी है। कभी पानी आ भी जाए तो 2 या 3 कुप्पी से ज्यादा नहीं भर पाता है।
सरपंच के घर ही नहीं हुआ अभी तक नल कनेक्शन
गांव दिवेल में पेयजल टंकी से 500 फीट की दूरी तक नल अच्छी तरह चल रहे हैं, लेकिन उसके बाद प्रेशर कम हो रहा है। वहीं मालवीय समाज का मोहल्ला अभी योजना से वंचित है। यहां स्थिति यह है कि सरपंच हरिराम मालवीय के घर ही अभी तक नल कनेक्शन नहीं हो पाया है। वह बोले कि बीते 1 साल से जल निगम व जनप्रतिनिधियों को बोल रहा हूं, लेकिन कोई सुनता ही नहीं है।

गांव बनवाड़ा में अभी तक नल कनेक्शन देने का काम ही चल रहा है।
गांव बनवाड़ा में अभी तक नल कनेक्शन देने का काम ही चल रहा है।

ऊंचे क्षेत्र में पानी नहीं आता
गांव चंदाेड़िया में गुर्जर मोहल्ला के 20 घरों में पानी नहीं आ रहा है। महिला राजीबाई ने बताया कि ऊंचाई वाले क्षेत्र में पानी नहीं आता। कम प्रेशर होने से निचले इलाके के लोग मोटरपंप लगा लेते हैं। इससे उन्हें और अन्य लोगों को नीचे के इलाके में जाकर ही पानी लाना होता है। एक माह से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन साहब लोग सुनकर चले जाते हैं।
नई आबादी में कनेक्शन नहीं
ताराेद की नई आबादी के 30 मकान में अभी तक नल कनेक्शन ही नहीं हुए हैं। हालांकि गांव में स्थिति ठीक बताई गई। गांव माेकड़ी में ऊंचे इलाके में परेशानी बताई गई, लेकिन यहां तो ढलान वाले क्षेत्रों में भी तीसरे दिन नलों से पानी आता है। वह भी मात्र 4-5 केन। ऐसे में अन्य काम के लिए उन्हें हैंडपंप या ट्यूबवेल का ही सहारा लेना होता है। गांव बेरछा और बनवाड़ा में नल कनेक्शन देने का काम अभी चल ही रहा है।

गांव परमारखेड़ी में इस तरह ऊंचाई होने से नहीं जाता है नलाें में पानी।
गांव परमारखेड़ी में इस तरह ऊंचाई होने से नहीं जाता है नलाें में पानी।

आधे गांव में नल कनेक्शन नहीं
गांव रजला में जल आवर्द्धन योजना के तहत आधे गांव को भी कनेक्शन नहीं मिले हैं। ग्रामीण दशरथ ने बताया आधे गांव में कनेक्शन बाकी है तो लाइन बिछाने का काम भी अधूरा है। जहां नल कनेक्शन दिए गए हैं, उनमें से अभी तक पानी नहीं आया है। ऐसे में लोग ट्यूबवेल से जुगाड़ कर रहे हैं। ऐसी ही स्थिति टूटियाखेड़ी की भी है। गांव राजगढ़ में लाइन और नल कनेक्शन का काम पूरा हुआ है। 
दो गांवों में टैंकर का सहारा
निनावटखेड़ा और अटलावदा में नल कनेक्शन दिए हैं, लेकिन पानी नहीं पहुंचा है। इस वजह से यहां टैंकरों से पानी सप्लाई हो रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक पेयजल टंकी अधिक दूरी पर है। इससे पानी गांव तक नहीं पहुंच रहा। गांव में ही पेयजल टंकी का निर्माण किया जाता तो समस्या नहीं खड़ी होती।

ग्रामीणाें ने समाधान भी बताया : ग्रामीणों के मुताबिक वर्तमान में टंकी से एक साथ ही सभी क्षेत्रों मेंं सप्लाय किया जा रहा है। इससे कहीं पानी पहुंच रहा तो कहीं नहीं पहुंच रहा। जल निगम को क्षेत्रवार सप्लाई की जाना चाहिए। इसके लिए उन्हें पर्याप्त वाॅल्व की व्यवस्था करना चाहिए। ऊंचे इलाके में सप्लाई करना हाेगी तो निचले इलाकों में बंद रखे। 

टेस्टिंग की प्रक्रिया बाकी है : जल निगम इंदाैर के महाप्रबंधक रवि अग्रवाल ने बताया ऊंचे इलाकों के लिए रूपरेखा बनाई है। कुछ गांवों में परेशानी आ रही है, जिसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ गांवों में टेस्टिंग की प्रक्रिया बाकी है। यह पूरी होने के बाद परेशानी नहीं आएगी। टेस्टिंग के बाद प्रेशर से लोगों को पानी मिल सकेगा।

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