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  • 1 Lakh Has Been Spent In The Treatment Of Corona, Now Paying 6248 Rupees For The Injection Of Black Fungus

दोहरी मार:कोरोना के इलाज में 1 लाख खर्च हो गए, अब ब्लैक फंगस के इंजेक्शन के चुकाना पड़ रहे 6248 रुपए

उज्जैन14 दिन पहले
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अस्पताल में इलाज करवा रहे ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीज। - Dainik Bhaskar
अस्पताल में इलाज करवा रहे ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीज।
  • मरीजों के परिजन बोले- आर्थिक स्थिति बिगड़ गई, लॉकडाउन में काम भी छूट गया, अब ब्लैक फंगस के इंजेक्शन का खर्च उठाना पड़ रहा

प्राइवेट अस्पताल में कोरोना के इलाज में एक लाख रुपए तक खर्च हो गए और अब ब्लैक फंगस के इलाज में भी एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन 6248 रुपए में खरीदना पड़ रहा है। लॉकडाउन में कामकाज तो छूटा ही, इलाज के खर्च के चलते परिवार की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ गई।

अब ब्लैक फंगस में इलाज का खर्च उठाना पड़ रहा है, क्योंकि मेडिकल कॉलेज में इंजेक्शन की सरकारी सप्लाई नहीं हो रही है। ऐसे में मरीजों को इंजेक्शन का खर्च उठाना पड़ रहा है। एक मरीज को 60 इंजेक्शन लगना है, ऐसे में उन्हें करीब 374880 रुपए का आर्थिक भार पड़ेगा। ऐसे में गरीब परिजन अपने मरीज का इलाज कैसे करवा पाएंगे। यह पीड़ा है आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती ब्लैक फंगस के मरीजों की। हालांकि उनका कहना है कि यहां डॉक्टर व स्टाफ मरीजों का फ्री में इलाज कर रहे हैं। ऑपरेशन और टेस्ट भी फ्री में हो रहे हैं। मरीजों को खाना भी कॉलेज की ओर से दिया जा रहा है।

केवल एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन खरीदना पड़ रहा है। इंजेक्शन के लिए कोई सरकारी मदद नहीं मिल पा रही है। कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि इंजेक्शन नो प्रोफिट नो लॉस में मरीजों को उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, बाकी का इलाज फ्री दिया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के 53 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 40 के ऑपरेशन हो चुके हैं। 4-5 मरीज पूरी तरह से स्वस्थ भी हो चुके हैं, अब इन्हें डिस्चार्ज करने की तैयारी है।

भास्कर ने मुद्दा उठाया तो जिला अस्पताल में मरीजों को मिलने लगे मुफ्त इंजेक्शन
जिला अस्पताल के आर्थोपेडिक विभाग में शुरू किए गए 40 बेड के वार्ड में 9 मरीज भर्ती हैं। यहां भर्ती कुसुम बाई अंतरसिंह उम्र 55 साल के पुत्र यशपाल सिंह ने बताया एक माह पहले मां को कोरोना हुआ था, जिसका आठ दिन तक इलाज चला था, जिसमें एक लाख रुपए खर्च हो गए। उसके बाद 7 दिन पहले मां की जांच करवाई तो उन्हें ब्लैक फंगस होना पाया गया। उन्होंने मां को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया, यहां इंजेक्शन से लेकर सभी दवाइयां मुफ्त में दी जा रही है। मरीजों को इंजेक्शन नहीं खरीदना पड़ रहे हैं। दैनिक भास्कर द्वारा मुद्दा उठाए जाने के बाद यहां पर इंजेक्शन की सरकारी सप्लाई शुरू हो गई है।

बड़ा सवाल : इनके लिए सरकारी इंजेक्शन क्यों नहीं
भास्कर द्वारा मुद्दा उठाने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल के मरीजों के लिए तो इंजेक्शन की सरकारी सप्लाई शुरू कर दी है। यहां मरीजों को मुफ्त में इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं लेकिन आरडी गार्डी में भर्ती मरीजों के लिए इंजेक्शन की सरकारी सप्लाई नहीं की जा रही है।

ऐसे में यहां भर्ती 53 मरीजों को इंजेक्शन का खर्च उठाना पड़ रहा है। ड्रग इंस्पेक्टर धर्मसिंह कुशवाह का कहना है कि जिला अस्पताल के मरीजों के लिए इंजेक्शन की सरकारी सप्लाई शुरू हो गई है। मेडिकल कॉलेज के लिए अभी आदेश नहीं आए हैं। आदेश आता है तो वहां भी इंजेक्शन की सरकारी सप्लाई शुरू की जाएगी।

प्राइवेट डॉक्टर ने 2.50 लाख का खर्च बताया, एडवांस जमा करवाए
नीतेश भावसार उम्र 35 निवासी केसरबाग कॉलोनी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। उन्हें फ्रीगंज के गुरुनानक हॉस्पिटल में भर्ती किया था। यहां मरीज के इलाज पर 55 हजार रुपए खर्च हो गए। कोरोना से ठीक होने के बाद ब्लैक फंगस हो गया। प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया तो इलाज का खर्च 2.50 लाख रुपए बताया और पांच हजार एडवांस भी जमा करवा लिए।

पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं होने से मरीज को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया। यहां मुफ्त इलाज किया जा रहा है। प्राइवेट डॉक्टर के यहां जमा किए गए पांच हजार रुपए परिवार के लोग वापस लेकर आ गए। मरीज के रिश्तेदार पवन भावसार ने बताया प्राइवेट अस्पताल में कोरोना का महंगा इलाज करवाने से उबर भी नहीं पाए थे कि अब ब्लैक फंगस हो गया।

हालांकि जिला अस्पताल में फ्री में इलाज दिया जा रहा है। रोगी कल्याण समिति के पूर्व सदस्य राजेश बोराना, प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. पीएन वर्मा व ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. अंशु वर्मा का पूरा सहयोग मिला।

ब्लैक फंगस के मरीजों का मुफ्त इलाज कर रहे हैं
ब्लैक फंगस के मरीजों का मुफ्त में इलाज हो रहा है। उन्हें नो प्रोफिट नो लॉस में इंजेक्शन भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।- डॉ. सुधाकर वैद्य, एचओडी, ईएनटी विभाग, मेडिकल कॉलेज

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