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  • 22 TB Patients Reached The Last Stage, Giving 188 Tablets Of 13 Lakhs To All, Giving New Life

आपको जानकारी यकीन नहीं होगा:लास्ट स्टेज में पहुंचे टीबी के 22 मरीज, सभी को 13 लाख की 188 टेबलेट खिलाकर दे रहे नया जीवन

उज्जैन2 महीने पहले
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  • बीच में इलाज छूटने से ये मल्टी ड्रग रजिस्टेंस टीबी को झेल रहे हैं

आपको जानकारी यकीन नहीं होगा लेकिन ये सच है। संभाग के लास्ट स्टेज में पहुंच चुके टीबी के 22 रोगियों की जान बचाने के लिए स्वास्थ विभाग दो करोड़ 86 लाख रुपए खर्च कर रहा है। यानी प्रत्येक रोगी के इलाज पर 13-13 लाख रुपए। शासन और विभाग की सेवा व सुविधा से रोगियों की आंखों में खुशी के आंसू हैं। वे बस यही कहते हैं कि इतने महंगे इलाज के बारे में तो हम सोच भी नहीं पाते।
क्या हुई लापरवाही, कैसे लास्ट स्टेज में पहुंचे ये
क्षय यानी टीबी के रोगी का जब बीच में इलाज छूट जाता है तो वह एक दिन एमडीआर (मल्टी ड्रग रजिस्टेंस) की स्थिति में पहुंच जाता है। यह टीबी की अगली स्टेज है। ऐसे रोगियों को शुरुआत में ज्यादा तकलीफ नहीं होती लेकिन जब बीमारी लास्ट स्टेज में पहुंचती है तो वे अति गंभीर कुपोषित हो जाते हैं। उनके शरीर में ताकत नहीं रहती है। समय पर यदि ऐसे रोगियों को सही इलाज नहीं मिले तो इनकी जान जा सकती है। संभाग के ऐसे 22 रोगियों को इलाज दिया जा रहा है।

बाजार में नहीं मिलती, अनुबंध होने से कंपनी सीधे सरकार को देती है
क्षय रोग उन्मूलन एवं उन्मुखीकरण की नोडल अधिकारी डाॅ. सुनीता परमार ने बताया कि एमडीआर के लास्ट स्टेज में पहुंच चुके रोगियों को निजी कंपनी की bedaquiline टेबलेट दी जाती है। यह दवाई बाजार में नहीं मिलती है। अनुबंध के तहत कंपनी सरकार व सरकारी अस्पतालों के लिए ही इसे बनाती है। यह टेबलेट बहुत महंगी है। एक डिब्बी में 188 टेबलेट आती हैं, जिसकी कीमत 13 लाख रुपए है। यानी एक टेबलेट 6914 रुपए की। डाॅ. परमार कहती हैं कि पूर्व में ऐसे
गंभीर रोगियों को आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में इलाज दिया जाता था। लेकिन वहां कोरोना सेंटर बनने से जिला अस्पताल में अलग से एक वार्ड बनाकर इन्हें इलाज दिया जा रहा है। यहां रोगियों को 15 दिन भर्ती रखकर डॉक्टर की निगरानी में टेबलेट खिलाई जा रही है। इसके बाद इन्हें डिस्चार्ज कर घर पर खाने के लिए टेबलेट मुहैया करवाई जाती है। लगातार छह महीने दवाई लेने के बाद रोगी स्वस्थ हो पाता है। रोगी को ये दवाई निशुल्क मुहैया करवाई जाती है। उनकी निगरानी भी करते हैं। यह इलाज ले रहे हैं मंदसौर जिले के दो रोगियों ने कहा कि सरकार के दम पर ही उनका इलाज हो पा रहा है। इलाज पर वे खुद इतना खर्च करने के बारे में तो सोच भी नहीं सकते।

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