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वर्ल्ड रेडक्रॉस डे आज:1 साल में 3.5 करोड़ का इलाज, मशीन और मृतकों के परिजन को दिए, कोरोनाकाल में एक्स-रे मशीन, रेमडेसिविर फ्री में बांटे

उज्जैन2 महीने पहले
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  • अपना जरूरी काम या इच्छा पूरी होने पर आप जो खुशी से रेडक्रॉस को दान देते हैं वो राशि ऐसे आती है शहर के काम

कोरोना काल में रेडक्रास सोसायटी प्रशासन की मददगार के रूप में काम कर रही है। बीते एक साल में सोसायटी ने कोरोना संक्रमण के चलते अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने, मरीजों के इलाज के लिए दवाइयां उपलब्ध कराने, कोरोना वारियर्स की सुरक्षा और आम लोगों की मदद में भागीदारी की है। कोरोना के दूसरे दौर में भी सोसायटी मरीजों की हमदर्द बनकर उभरी है। खासकर रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध कराकर सोसायटी ने कई ऐसे मरीजों की जिंदगी बचाई जो यह महंगे इंजेक्शन खरीद नहीं सकते हैं। रेडक्रास डे पर कोरोना इलाज के यज्ञ में बिना किसी प्रचार के समिधा दे रही सोसायटी पर भास्कर की खास रिपोर्ट-

शुरुआत में कलेक्टर के माध्यम से संचालन, बाद में समाजसेवियों के हाथों में सौंपी बागडोर

शहर में रेडक्रास सोसायटी 1970 में अस्तित्व में आई थी। इसका संचालन कलेक्टर के माध्यम से होता रहा। 2009 में रेडक्रास के नियमों में संशोधन के बाद समाजसेवियों की निर्वाचित संचालन समिति के हाथ में बागडोर आ गई। संचालन समिति सर्वानुमति से जो फैसले लेती है, कलेक्टर के माध्यम से उनका क्रियान्वयन होता है। संचालन समिति के आने से अब समाज की जरूरत के अनुसार सोसायटी के बजट को खर्च किया जाता है। सामान्य दिनों में सोसायटी अस्पतालों के उन्नयन और मरीजों की मदद के काम करती है। लेकिन मार्च 2020 के बाद सोसायटी ने कोरोना की रोकथाम में अपनी जबर्दस्त भागीदारी कर शासन-प्रशासन को विश्वास दिलाया है कि कोरोना के विरुद्ध जंग में वह पूरी ताकत से साथ में है।

एक अनुमान के अनुसार 1 मार्च 2020 से 31 मार्च 2021 के वित्तीय वर्ष में सोसायटी ने करीब 3.5 करोड़ रुपए की मदद उपलब्ध कराई है। हालाकि अभी सोसायटी का ऑडिट होना है। सोसायटी में चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, सचिव और कोषाध्यक्ष के रूप में निर्वाचित सदस्य काम करते हैं। तीन साल के लिए इनका निर्वाचन होता है। सोयायटी का दफ्तर जिला अस्पताल की सेठी बिल्डिंग में दूसरे माले पर है। जो रोज सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक खुलता है। यहां सेवानिवृत्त स्वास्थ्यकर्मी 5 हजार रुपए वेतन पर तैनात हैं, जो वहां आने वाले लोगों की मदद करते हैं।
सोसायटी को दान से मिलती है आर्थिक मदद
सोसायटी को दान से मिलने वाली राशि से मदद मिलती है। सोसायटी के 500 से ज्यादा सदस्य हैं। समाज के विभिन्न स्रोतों यथा- व्यापारी, उद्योगपति, समाजसेवी आदि सोसायटी को दान देते हैं। जिला अस्पताल में सोसायटी की 3 दुकानें हैं जिनका किराया आना था लेकिन कोर्ट में केस होने से नहीं मिल रहा। सोसायटी महीने में कलेक्टर को अपनी रिपोर्ट देती है तथा 3 महीने में राज्यपाल को।

रेडक्रॉस सोसायटी ने दिया : 18.5 लाख रुपए की एक्स-रे मशीन सहित 1000 ऑक्सीमीटर

  • माधवनगर अस्पताल को 18.5 लाख रुपए की एक्स-रे मशीन जो ऑनलाइन भी काम करती है।
  • 1000 ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर टीमों को उपलब्ध कराए।
  • इलाज के लिए कंसंट्रेटर ऑक्सीजन मशीन।
  • रेमडेसिविर इंजेक्शन जो चरक और माधवनगर अस्पताल में भर्ती मरीजों को नि:शुल्क लगाए जा रहे।
  • मरीजों के लिए दवाइयां और इलाज की अन्य सामग्री।
  • माधवनगर अस्पताल में मरीजों के लिए साबुन का इंतजाम।
  • कोरोना में सेवा दे रहे कर्मचारियों के लिए सैनिटाइजर व मास्क।
  • चरक और माधवनगर अस्पताल में कंबल।
  • आरडी गार्डी, चरक और माधवनगर अस्पताल में मरीजों के लिए दूध व भोजन।
  • मजदूरों को आर्थिक सहायता।
  • श्रमिक महिलाओं को साड़ी, बच्चों को कपड़े।
  • नॉन कोविड एंबुलेंस का संचालन।
  • शव वाहन का संचालन।
  • घर-घर जाकर सर्वे करने वाली टीम को संसाधन।
  • असहाय मरीजों को आर्थिक सहायता।

(इनके अलावा प्रशासन द्वारा वांछित सहायता उपलब्ध कराई।)

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