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गोमाता कहना क्या सिर्फ दिखावा है? ये दुर्दशा क्यों:80 गायों के शेड में 590 को ठूंसा, बड़ी प्लानिंग कागजों में, नतीजा- कमजोरी, बीमारी और मौतें

उज्जैन7 दिन पहले
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  • डेढ़ महीने के अंदर 22 गायों की मौत के बाद भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट...दो गोशालाओं में क्यों जा रही जानें

नगर निगम और श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति की अपनी गोशालाएं हैं। इनकी शुरुआत जिस उद्देश्य को लेकर हुई थी उनमें दोनों खरे नहीं उतर पा रहे हैं। गायों को भरण पोषण तो दिया जा रहा है लेकिन उनकी सेहत के प्रति लापरवाही सामने आ रही है। दोनों ही स्थानों पर स्थाई पशु चिकित्सक पदस्थ नहीं हैं। इनमें में क्षमता से दोगुनी गायें रखी हैं, जिससे स्वस्थ और बीमार गायों को अलग रखने के इंतजाम नहीं किए जा सकते हैं। बजरंग दल ने निगम की कपिला गोशाला में गायों के मरने का दावा किया है। उधर महाकाल मंदिर की गोशाला में कुछ दिन पहले जहरीले जीव के काटने से एक गाय की मौत हो गई थी। हालांकि दोनों ही जगह के प्रभारी का दावा है कि गायों की देखभाल में कोई कमी नहीं की जा रही है।

कपिला : 11 एकड़ में बनाई...लेकिन गोवंश के बुरे हाल

नगर निगम प्रदेश की पहली ऐसी निगम है, जिसकी अपनी गोशाला है। गोशाला बनाने के लिए मंगरोला हल्के में रत्नाखेड़ी की 11 एकड़ जमीन कलेक्टर ने निगम को आवंटित की थी। यहां निगम ने गोशाला बनाई। यहां शहर के पकड़े गए मवेशी रखे जा रहे हैं।

गोशाला संचालन के लिए गोसेवा आयोग और अन्य गोसेवा संगठनों की मदद लेने की बात कही थी लेकिन बात नहीं बनी। यहां पर गोशाला कार्यालय, दूध विक्रय काउंटर, मवेशी रखने के शेड, गोबर और गोमूत्र एकत्र करने के स्थान, उनसे खाद और कीटनाशक बनाने के प्लांट आदि व्यवस्थाएं करने का भी दावा था लेकिन ये काम नहीं हुए। प्रभारी विक्रम पंड्या के अनुसार चार शेड में 80 गायें रखी जा सकती हैं, जबकि वर्तमान में 590 गायें हैं।

महाकाल गोशाला : 80 गायों की जगह, अभी 138 हैं
चिंतामन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति संचालित महाकालेश्वर गोशाला में शेड व सीमेंट-कांक्रीट फर्श का निर्माण किया है। प्रभारी गोपाल कुशवाह के अनुसार गोशाला में 80 गायें रखी जा सकती हैं, जबकि वर्तमान में 138 पशुधन हैं।

यहां केड़ों के लिए अलग से शेड है लेकिन बीमार गायों के लिए नहीं। जब भी कोई गाय बीमार पड़ती है तो चिंतामण से पशु चिकित्सालय से चिकित्सक को बुलाना पड़ता है। यहां की हर गाय का टैग है यानी उनके कानों में एक कार्ड लगाया है। इससे गायों की गिनती से लेकर उनकी देखभाल का एक रजिस्टर रखने में आसानी होती है। मंदिर समिति अब मंदिर की नई गोशाला बनाएगा। इसमें गिर नस्ल की 150 गायें पालेंगे। इनका दूध ही भगवान को अर्पित करने के लिए श्रद्धालुओं को उपलब्ध करवाएंगे।

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