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ट्रैक दोहरीकरण की धीमी रफ्तार:तीन साल में पूरा करना था 79.23 किमी का काम, दो साल में 18 किमी ही किया

उज्जैन11 दिन पहले
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  • उज्जैन से कड़छा के बीच काम पूरा, 61 किमी का काम बाकी

उज्जैन से कड़छा तक रेलवे के दो ट्रैक तैयार हाे गए हैं। पटरियां भी डाल दी हैं। विद्युतिकरण भी हो गया है। उज्जैन-इंदौर के बीच बैस वर्क भी पूरा हो चुका है। दिसंबर 2020 में कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी ने इस ट्रैक का जायजा लिया था। उन्होंने निर्माण कार्यों की जांच के लिए हथौड़े भी चलवाए। 18 किलोमीटर मोटर ट्रॉली से निरीक्षण किया। उसके बाद ट्रेन में बैठकर 120 किलोमीटर की गति से ट्रैक की मजबूती का परीक्षण किया। इसके बावजूद कड़छा से आगे काम की रफ्तार धीमी पड़ गई है। पहले से पिछड़ा प्रोजेक्ट और पिछड़ता दिखाई दे रहा है। इसके लिए दो साल का लक्ष्य लिया था।

इसमें से छह महीने बैस वर्क में गुजर गए। 10 नवंबर 2017 को रेलवे बोर्ड ने 79.23 किलोमीटर लंबे उज्जैन-देवास-इंदौर रेल रूट दोहरीकरण की स्वीकृति दी थी। ट्रैक दोहरीकरण के लिए ड्राइंग-डिजाइन यानी कागजी कार्रवाई के बाद अक्टूबर 2018 से जमीनी काम शुरू हो गया था। रेलवे यह काम दो चरणों में करेगा। पहले उज्जैन-देवास फिर देवास-इंदौर के बीच काम होगा। प्रोजेक्ट पर 760 करोड़ रुपए खर्च होंगे। काम की शुरुआत उज्जैन स्टेशन से हुई थी। इसमें से कड़छा तक 18 किलोमीटर का काम पूरा हाे गया है। अब 61 किलोमीटर का काम बाकी है।
30 मिनट पहले पहुंचेंगे इंदौर
बजट में मंजूर हुआ इंदौर-देवास-उज्जैन दोहरीकरण प्रोजेक्ट मार्च 2021 तक पूरा करने का दावा किया था। सिंगल लाइन होने से वर्तमान में इंदौर के लिए कोई भी ट्रेन डेढ़ से दो घंटे का समय लेती है। दोहरीकरण के बाद इंदौर का सफर 30 मिनट कम होगा। यह प्रोजेक्ट इसलिए भी खास है कि इसके पूरा होने से सबसे ज्यादा फायदा इंदौर-उज्जैन के यात्रियों को होगा। इसके पूरा होने से क्राॅसिंग के दौरान ट्रेन रास्ते में या छोटे स्टेशन पर रूकी नहीं रहेंगी। 79 किमी लंबी इंदौर-देवास-उज्जैन रेल लाइन पर रोजाना 40 ट्रेनों का दबाव होता है। इससे सुबह 8 से शाम 4.30 बजे तक इस लाइन पर भारी दबाव रहता है। इससे एक इंदौर-देवास-उज्जैन के बीच किसी एक्सप्रेस, सुपरफास्ट ट्रेन के रास्ते में होने पर दूसरी पैसेंजर, स्पेशल ट्रेन अन्य स्टेशनों पर रूकी रहती हंै। इससे ट्रेन 5 से 30 मिनट तक लेट होती हैं। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है

दोहरीकरण में देरी के कारण इन ट्रेनों पर पड़ता है असर
इंदौर-जोधपुर, अवंतिका, निजामुद्दीन, इंदौर-उज्जैन सहित 20 से ज्यादा ट्रेनों पर असर पड़ता है। ट्रेनें लेट होती हैं। दोहरीकरण पूरा होने से ट्रेनें लेट नहीं होंगी। इस रूट पर नई ट्रेन चलाने का रास्ता भी साफ होगा। रेलवे सलाहकार समिति सदस्य महेंद्र गादिया ने बताया इंदौर-देवास-उज्जैन दोहरीकरण प्रोजेक्ट शहर के साथ इंदौर के लिए भी अहम है।

पहले चरण में अर्थवर्क व नए पुल, पुलिया बनाएंगे
पहले चरण में अर्थवर्क और नए पुल-पुलिया बनाने का काम किया जाएगा। इसके बाद स्लीपर की व्यवस्था कर लाइन बिछाई जाएगी। दोहरीकरण के लिए बहुत ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं थी, इसलिए मंजूरी के बाद जरूरी निजी जमीनों का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। प्रोजेक्ट में देरी से देवास-इंदौर के बीच बिंजाना, बरलई, मांगलिया में क्रॉसिंग के कारण ट्रेनाें को रोकना पड़ रहा है। जो ट्रेनें सबसे ज्यादा लेट हो रही हैं, उनमें नर्मदा एक्सप्रेस, जबलपुर ओवर नाइट, भोपाल इंटरसिटी, जोधपुर-इंदौर, उदयपुर-इंदौर, मालवा एक्सप्रेस, निजामुद्दीन इंटरसिटी प्रमुख हैं। इंदौर-उज्जैन लाइन विद्युतीकृत हो चुकी है। अब बिछने वाली दोहरी लाइन भी विद्युतीकृत होगी, यानी दूसरी लाइन बिछाने के साथ विद्युतीकरण भी साथ-साथ किया जाएगा।

शुरुआती काम के लिए मिले 20 करोड़ रुपए
2017-18 के बजट में इंदौर-उज्जैन दोहरीकरण के लिए 20 करोड़ रुपए दिए गए, ताकि शुरुआती काम हो सकें। सबसे ज्यादा ट्रेनों का दबाव इंदौर-देवास सेक्शन में है। देवास से एक लाइन मक्सी और दूसरी उज्जैन की ओर निकल जाती है, इसलिए देवास-उज्जैन सेक्शन में अपेक्षाकृत ट्रेनों का कम दबाव है।

पश्चिम रेलवे ने पहले इंदौर-देवास सेक्शन के 39 किलोमीटर लंबे हिस्से में काम करने की योजना बनाई। दूसरे चरण में देवास-उज्जैन सेक्शन का काम किया जाएगा। इंदौर-उज्जैन के बीच सिंगल रेल लाइन होने के कारण कई ट्रेनों को जगह-जगह क्रॉसिंग के लिए घंटों खड़ा रहना पड़ता है, जिससे यात्री परेशान होते हैं और ट्रेन इंदौर के आसपास समय पर आने के बावजूद जहां-तहां अटकी रहती हैं।

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