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यह तितलियां हमारी मेहमान:परदेस से आई रंगबिरंगी मेहमान: पहली बार दिखी यूरोप से आई हम्मिंगबर्ड हॉक मोथ

उज्जैन9 महीने पहले
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  • लॉकडाउन में बदले वातावरण ने तितलियों को बनाया उज्जैन का प्रवासी, केरल की भी आ रही नजर

कोरोना काल के बीच शहर की फिजा को रंगबिरंगी मेहमानों ने भी खुबसूरत बना दिया है। लॉकडाउन के कारण बदले वातावरण के असर से कई प्रवासी तितलियां वर्षों बाद शहर में दिखाई दे रही हैं। नार्थ अमेरिका, यूरोप और केरल जैसे दूरस्थ इलाकों से भी इन रंगबिरंगी प्रवासी तितलियों ने शहर में डेरा डाला है। जिन्हें शहर में ही एक नहीं बल्कि कई स्थानों पर वर्षों बाद देखा गया है। पर्यावरणविद् और बर्ड वॉचर अनुराग छजलानी द्वारा पिछले कई वर्षों से तितलियों को लेकर अध्ययन किया जा रहा है। छजलानी ने बताया इस बार कई नई तितलियां शहर के बगीचों और पेड़-पौधों के आसपास दिखाई दे रही हैं। महाश्वेता नगर में छजलानी और विक्रम विश्वविद्यालय परिसर में पर्यावरण प्रबंधन अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष डॉ. डीएम कुमावत ने ऐसी दुर्लभ तितलियों को अपने कैमरों में कैद किया है। महाश्वेता नगर में हम्मिंगबर्ड हॉक मोथ (किट) को देखा गया है। इसे उज्जैन में पहली बार ही रिपोर्ट किया गया है। मुख्य तौर पर यह जापान, नार्थ अमेरिका, यूरोप में दिखाई देती है। डॉ. कुमावत ने विक्रम विश्वविद्यालय के बॉटनिकल गार्डन में डबल ब्रेंडेड क्रो की तस्वीरें ली हैं। डॉ. कुमावत ने बताया यह तितली आमतौर पर दक्षिणी तटीय इलाकों के आसपास देखी जाती है। लॉकडाउन के कारण शांत वातावरण मिलने से संभवत: तितलियों की कई प्रजातियां यहां तक पहुंची हैं। डॉ. कुमावत ने कहा कि पक्षियों की तरह तितलियां भी प्रवासी होती हैं और अप्रैल से दिसंबर के बीच यह आमतौर पर अंडे देने के लिए ऐसे स्थानों को चुनती है, जहां नमी और कम प्रकाश वाला वातावरण हो। बारिश के सीजन में भारत में ऐसी ही स्थितियां मिलती हैं। जिससे अगस्त से सितंबर के बीच शहर और आसपास के इलाकों में इनकी बहुतायात हो जाती है। इसके बाद यह फिर से जंगलों की ओर उड़ जाती हैं।

पांच साल पहले कमल तालाब में दिखती थी तितलियों की कई प्रजातियां

बर्ड वॉचर छजलानी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में तितलियों और मधुमक्खियों की संख्या सभी जगह कम हुई है। इसलिए इनके संरक्षण की आवश्यकता है। कालिदास अकादमी के कमल तालाब में पांच वर्ष पहले तक तितलियों की कई प्रजातियां दिखाई देती थी लेकिन अब इनकी संख्या बेहद कम हो चुकी है। उज्जैन व आसपास के क्षेत्रों में दिखाई देने वाली तितलियों में कॉमन ग्रास येल्लो, प्लेन क्यूपिड, ब्लू पेंसि, येलो पेंसि, लेमन पेंसि, कॉमन लेपर्ड, कॉमन एमिग्रेंट, लाइम बटरफ्लाई, ब्लू जे, प्लेन टाइगर, स्ट्रीप टाइगर, कॉमन इंडियन क्रो, ग्रेट ऐगफ्लाई आदि शामिल हैं।

तितलियों के बारे में जानें यह भी रोचक जानकारियां

  • एक छोटा सा किट होने के बावजूद भी तितली 17 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकती हैं।
  • तितली को ठंडे खून का प्राणी माना जाता है। तितली में सुनने की क्षमता नहीं होती लेकिन यह वाइब्रेशन को महसूस कर सकती है।
  • तितलियां 100 किलोमीटर तक बिना अपना रास्ता भटके सटीक तरीके से अपने लक्ष्य तक पहुंच सकती हैं।
  • तितलियां किसी भी चीज का स्वाद उस पर खड़ी होकर लेती हैं, क्योंकि इनके स्वाद चखने वाले सेंसर पैरों में पाए जाते हैं।
  • दुनियाभर में तितलियों की 28 हजार प्रजातियां हैं।
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