हैरानी भरा फैसला:एडीएम सूर्यवंशी को बीना में बन रहे एक हजार बेड के काेविड सेंटर का जिम्मा सौंपा

उज्जैन6 महीने पहले
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  • जिले में संक्रमण नियंत्रण के कामों पर पड़ेगा असर

उज्जैन जिले में कोरोना संक्रमण नियंत्रण के लिए अच्छे, मेहनती व ज्यादा अधिकारियों की जरूरत महसूस की जा रही है। इस बीच शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी व एडीएम नरेंद्र सूर्यवंशी को बीना में बनाए जा रहे एक हजार बेड के कोविड केयर सेंटर की जिम्मेदारी सौंप दी है।

सूर्यवंशी शुक्रवार सुबह बीना के लिए रवाना हो जाएंगे। निश्चित रूप से सूर्यवंशी के प्रशासनिक कार्यकाल के लिए यह अच्छा अवसर है कि शासन ने उन पर इन संवेदनशील स्थितियों में इतने बढ़े प्रोजेक्ट के लिए भरोसा जताया लेकिन दूसरी तरफ उज्जैन जिले के चिंताजनक हालातों को सामने रखकर देखें तो सूर्यवंशी की यहां भी ज्यादा जरूरत बनी हुई थी। हैरानी की बात यह है कि जिला क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की बैठक में छोटे-छोटे मुद्दे पर बोलने वाले जनप्रतिनिधियों में से किसी ने भी इस संबंध में सीधे शासन स्तर पर बात करना उचित नहीं समझा।

ताकि सूर्यवंशी को उज्जैन जिले में रोका जा सके। गौरतलब है कि आदेश में सूर्यवंशी को बीना में बन रहे उक्त कोविड केयर सेंटर के निर्माण से जुड़ी रोज की प्रशासकीय कार्य व गतिविधियों की ऑन साइट मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सूर्यवंशी का मानना है कि बीना में 15 दिन से लेकर एक महीने तक का काम है। यह जिम्मेदारी उन्हें स्व कार्य के साथ अतिरिक्त दी गई है।

जिले पर यह पड़ेगा असर

  • एडीएम सूर्यवंशी अपने अनुभवों व कार्यशैली के आधार पर कलेक्टर के प्रमुख कार्य को एक टास्क की तरह निपटाते आ रहे थे। इनमें कानून व्यवस्था व कोरोना नियंत्रण की व्यवस्थाओं से जुड़े हुए काम थे। अब एडीएम की यह जिम्मेदारी अब अपर कलेक्टर जितेंद्र सिंह चौहान को दी जा सकती है।
  • अपर कलेक्टर चौहान कोरोना के प्रशासनिक नोडल अधिकारी हैं। लिहाजा उनके पास कोरोना नियंत्रण की गतिविधियों से जुड़े सभी कार्य हैं। साथ ही उपार्जन के भी वे नोडल हैं। ऐसे में एडीएम की जिम्मेदारी भी आ जाने से उन पर दबाव बढ़ेगा। इसका असर व्यवस्थाओं पर पड़ेगा।
  • एडीएम सूर्यवंशी की छापेमार कार्रवाई से कालाबाजारी व गड़बड़ी करने वाले दहशत में थे लेकिन उनके मन में भी डर नहीं रहेगा।
  • सूर्यवंशी के बीना जाने से जिला पंचायत सीईओ अंकित अस्थाना, अपर कलेक्टर अवि प्रसाद और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल पर भी अप्रत्यक्ष रूप से दबाव पड़ेगा।
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