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परेशानी:गेहूं उपार्जन में उलझा प्रशासन, क्योंकि 8 लाख मीट्रिक टन खरीदी अनुमान, भंडारण कर सकते 5 लाख टन

उज्जैनएक महीने पहले
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  • तीन लाख टन के लिए सायलो व कैब बनाने के लिए 40 एकड़ भूमि की तलाश

22 मार्च से जिले में शुरू होने जा रही गेहूं उपार्जन यानी सरकारी खरीदी प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। क्योंकि अनुमान आठ लाख मीट्रिक गेहूं की खरीदी का है लेकिन भंडारण की व्यवस्था केवल पांच लाख मीट्रिक टन की ही है।

ऐसे में प्रशासन भंडारण की वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने में उलझा हुआ है। पिछले वर्ष जिले में गेहूं का रकबा 4 लाख 8 हजार हेक्टेयर था। तब 8 लाख 35 हजार टन गेहूं की सरकारी खरीदी हुई थी। इस बार गेहूं के रकबे में एक फीसदी की वृद्धि हुई है। अधिकारियों का अनुमान है कि इस बार भी आठ लाख टन गेहूं खरीदी हाेगी। किसानों से गेहूं 1975 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से खरीदा जाएगा। इधर अधिकारियों के सामने चुनौती गेहूं के भंडारण को लेकर बनी हुई है। आठ लाख टन में से पांच लाख टन गेहूं का भंडारण तो जिले में है लेकिन बाकी के तीन लाख टन के रखाव का इंतजाम नहीं है।

भंडारण व्यवस्था के लिए यह हो रहे प्रयास
1. अधिकारी 40 एकड़ जमीन की तलाश रहे हैं। प्लानिंग 35 एकड़ पर सायलो बैग भंडारण केंद्र बनाने की है। 4 से 5 एकड़ भूमि में पक्के कैब बनाने की। अड़चन यह है कि जमीन एक स्थान पर और समतल चाहिए, जो मिल नहीं रही है।
2. तीन स्थायी व अस्थायी भंडारण केंद्र हैं जहां से एफसीआई गेहूं उठा लें तो चार लाख टन भंडारण की व्यवस्था हो सकती है लेकिन ऐसा होता मुश्किल नजर आ रहा है। क्याेंकि एफसीआई इस अनाज को कहां लेकर जाएगा।

आठ लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का अनुमान है। इसमें से पांच लाख टन गेहूं के भंडारण की व्यवस्था तो है लेकिन तीन लाख मीट्रिक टन की नहीं। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। समय रहते व्यवस्था कर ली जाएगी। - एमएम मारू, जिला आपूर्ति नियंत्रक

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