कृष्ण पक्ष के सोमवारों को भी सवारी:19 साल बाद 2023 में श्रावण का अधिकमास, बाबा महाकाल की 10 सवारी निकाली जाएंगी

उज्जैन3 महीने पहले
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  • मराठा परंपरा का भी पालन करने से भाद्रपद के कृष्ण पक्ष के सोमवारों को भी सवारी

सन 2023 में श्रावण का अधिकमास होगा। श्रावण और भाद्रपद के ढाई महीने में भगवान महाकालेश्वर की 10 सवारियां निकाली जाएंगी। 19 साल बाद श्रावण का अधिकमास आएगा। इसमें 10 सोमवार होंगे।
श्रावण का अधिकमास शिव भक्तों के लिए बड़ा अवसर होता है। श्रद्धालुओं को शिव की कृपा पाने और भक्ति के लिए अधिक समय मिलता है। पं. आनंद शंकर व्यास के अनुसार 1985 में श्रावण का अधिकमास आया था। उस समय भी 10 सवारियां निकाली गई थीं। इसके बाद 2004 में श्रावण का अधिकमास होने से सर्वाधिक 11 सवारियां निकाली गई थीं। 19 साल बाद 2023 में अधिकमास आएगा, तब 10 सवारियां निकलेंगी।
इसलिए डेढ़ महीने का श्रावण, 1967 में कलेक्टर ने किया था बदलाव
आजादी के पहले मराठा साम्राज्य होने से दक्षिण भारतीय परंपरा अनुसार श्रावण शुक्ल व भाद्र कृष्ण पक्ष के सोमवारों को (एक महीने) महाकालेश्वर की सवारी निकाली जाती रही थी। आजादी के बाद भी वही क्रम चलता रहा। 1967 में तत्कालीन कलेक्टर एनएम बुच से चर्चा की। उन्हें बताया कि मराठा परंपरा के अनुसार मालवा का आधा श्रावण बीत जाने के बाद सवारी का क्रम शुरु होता है।

मराठा शासन खत्म हो चुका है। इसलिए अब श्रावण की शुरुआत से ही सवारी निकाली जाना चाहिए। तब उन्होंने अन्य विद्वानों से भी बातचीत कर मालवा के श्रावण की शुरुआत से सवारी का क्रम शुरू कराया। इसमें भाद्रपद की सवारियों को कम नहीं किया गया। यानी डेढ़ महीने का श्रावण मनाया जाने लगा।

सोमवार बढ़ने से सवारियां भी बढ़ीं
बदलाव के 18 साल बाद 1985 में जब श्रावण अधिकमास के रूप में आया तब श्रावण 2 माह और भाद्रपद आधा माह मिला कर ढाई माह का श्रावण मनाया गया। ऐसे में 10 सोमवार को महाकालेश्वर की 10 सवारी भी निकाली गई। पहली सवारी 8 जुलाई और प्रमुख सवारी 9 अगस्त को निकाली गई थी। तब सवारी में भगवान के स्वरूप कम पड़ गए थे। ऐसे में अन्य मंदिरों से शिव के स्वरूप लाए गए थे। अब 2023 में श्रावण का अधिकमास आएगा। ढाई महीने के श्रावण में 10 सोमवार होंगे, जब सवारियां भी निकाली जाएंगी।

सवारी में स्वरूप कम करने से भावनाएं आहत
पं. व्यास के अनुसार महाकालेश्वर भगवान के सवारियों के लिए विभिन्न स्वरूप बनवाए गए हैं। जिनके दर्शन सामान्यत: सवारी के दौरान ही होते हैं। कोरोना संक्रमण के चलते सवारी का आकार छोटा करने के लिए सवारी में निकाले जाने वाले भगवान के स्वरूपों पर भी रोक लगा दी है। केवल पालकी में चंद्रमौलेश्वर और हाथी पर मनमहेश स्वरूप ही निकाले जा रहे हैं।

इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। चारधाम मंदिर में हुई संतों और समाजसेवियों की की बैठक में इस पर असंतोष जताते हुए परंपरा अनुसार सवारी में क्रम अनुसार सभी स्वरूप निकालने की मांग प्रशासन से की गई थी। प्रशासन को इस मामले में विचार करना चाहिए ताकि मंदिर की परंपराएं कायम रह सकें।

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