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  • After Transplanting 40 Years Ago, 11 Trees Were Planted In The Courtyard Of Mahakaleshwar, All Giving More Oxygen

कांक्रीट से सहेजी जड़ें और बचा लिए सभी पेड़:40 साल पहले ट्रांसप्लांट कर महाकालेश्वर के आंगन में लगाए थे 11 पेड़, सभी ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले

उज्जैन9 दिन पहलेलेखक: ओमप्रकाश सोनोवणे
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हरियाली और पर्यावरण के साथ धार्मिक महत्व के लिए 40 साल पहले उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में ट्रांसप्लांट का पहला प्रयोग हुआ था। अब ये दूसरा मौका है, जब फिर से उन्हीं पेड़ों को बचाने के लिए अपने तरह का पहला प्रयोग किया है। ये पेड़ न सिर्फ ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले हैं, बल्कि इन पर सैकड़ों पक्षी रहते हैं, जिनकी चहचहाहट सुबह-शाम गूंजती है। इन पेड़ों का धार्मिक महत्व भी काफी ज्यादा है। पहली शुरुआत 1980 में हुई थी। तब महाकालेश्वर मंदिर के आगे के हिस्से का विस्तार सिंहस्थ के पहले किया गया था। मंदिर की पुरोहित समिति के अध्यक्ष पं. अशोक शर्मा बताते हैं 1965 में मंदिर का शहनाई द्वार बना था। इसके आगे के हिस्से में खुली जमीन थी।

सिंहस्थ में आने वाले यात्रियों को बैठने, सुस्ताने की सुविधा के लिए तत्कालीन संभागायुक्त संतोष कुमार शर्मा ने खाली पड़ी जमीन को व्यवस्थित कराया था। खाली जमीन पर छाया के लिए इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी शनि मंदिर से 11 बड़े पेड़ ट्रांसप्लांट कराए थे।

क्रेन के माध्यम से इन पेड़ों को लाकर यहां फिर से रोपा गया था। शहर का यह पहला ट्रांसप्लांट था। उस समय अखबारों में इसके बड़े फोटो छपे थे। सिंहस्थ प्रदर्शनी में भी इसके फोटोग्राफ्स लगाए गए थे। लोग इन्हें देखने आते थे।

मंदिर प्रबंध समिति के पूर्व सदस्य पं. महेश पुजारी बताते हैं कि मंदिर के उत्तरी हिस्से में पुस्तकें उद्यान था। सिंहस्थ लिए आगे के हिस्से का यात्रियों के लिए उपयोग करने के लिए उद्यान को हटाया गया था। उद्यान हटाने की एवज में दक्षिणी हिस्से में बड़े पेड़ लगाए गए थे।

ज्यादा ऑक्सीजन देने व धार्मिक महत्व के पेड़

मंदिर के बाहरी हिस्से में लगाए गए इन पेड़ों में ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले पेड़- पीपल, नीम, बड़ हैं तथा धार्मिक महत्व के पेड़ों में शमी, पारस पीपल शामिल हैं। महाकाल मंदिर समिति द्वारा फिर से मंदिर परिसर का विस्तार किया जा रहा है।

इसके लिए इस हिस्से में अंडरग्राउंड न्यू वेटिंग हॉल के लिए 20 फीट तक खुदाई की जा रही है। इस खुदाई के चलते इन पेड़ों पर संकट आ गया था। यह काम उज्जैन विकास प्राधिकरण कर रहा है। मंदिर प्रशासन ने इन पेड़ों को सुरक्षित रखना तय किया। इस पर यूडीए अधिकारियों ने इन पेड़ों के आसपास खुदाई की।

इस दौरान जड़ों को बचाया गया। फिर इनके आसपास कांक्रीट का सुरक्षा घेरा तैयार किया गया। इसके बाद बाकी खुदाई की गई। इसका नतीजा यह है कि सभी 11 पेड़ सुरक्षित हो गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन पेड़ों को सुरक्षित करने के लिए आसपास कांक्रीट का घेरा बनाने जैसी विधि भी पहली बार अपनाई गई है।

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