महाकाल मंदिर से पालकी में सवार होकर निकलेंगी माता उमा:दो साल बाद 27 सितंबर को परंपरागत मार्ग से निकलेगी सवारी

उज्जैन18 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

मालवा की लोक संस्कृति एवं परम्परानुसार श्री महाकालेश्वर मंदिर में 21 से 25 सितम्बर तक उमा सांझी महोत्सव मनाया जाएगा। 27 सितंबर को चंद्र दर्शन की दूज पर महाकाल के आंगन से पालकी में सवार होकर माता उमा दो साल बाद परंपरागत मार्ग से नगर भ्रमण पर निकलेगी। शिप्रा तट पर जवारे विसर्जन के बाद सवारी वापस महाकाल मंदिर पहुंचेगी।

श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति द्वारा उमा-सांझी महोत्सव के तहत 21 से 25 सितंबर तक पांच दिन वसंत पूजा, सभा मंडप के प्राचीन पत्थर पर संझा की रंगोली तथा भगवान महाकाल व उमा माता के विभिन्न विग्रहो को दर्शन के लिए रखा जाएगा। इस दौरान बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं के साथ ही रात्रि में सास्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी होगी। पांच दिवसीय कार्यक्रम के बाद 27 सितंबर को चन्द्र दर्शन की द्वितीया को उमा माता की सवारी महाकाल मंदिर से सांय 4 बजे निकलेगी। सवारी मंदिर से प्रारंभ होकर परंपरागत मार्ग महाकाल घाटी, तोपखाना, दौलतगंज चौराहा, कंठाल, सराफा, छत्रीचौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी चौराहा, बक्षीबाजार, कार्तिक चौक एवं मोढ़ की धर्मशाला, रामानुजकोट होते हुए क्षिप्रा नदी पर पहुंचेगी। यहां संझा व जवारे विसर्जन के पश्चात कहारवाडी, बक्षी बाजार, महाकाल मार्ग से होते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर वापस आएगी। इसके पहले दो वर्ष 2020 व 2021 में कोरोना संक्रमण होने से उमा माता की सवारी परंपरागत मार्ग से नही निकली थी। दो वर्ष हरसिद्धी मंदिर के पास होकर छोटे मार्ग से शिप्रा तट पहुंची थी। वापसी भी इसी मार्ग से हुई थी।

इसलिए मनाया जाता है उमा-सांझी महोत्सव

सृष्टि के सृजन-कर्ता भगवान शिव एवं उमा का पुरूष एवं प्रकृति का उत्सव श्री महाकालेश्वर मंदिर में उमा-सांझी महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। प्राचीन कथन अनुसार उमा (माता पार्वती के स्वरूप) ने भगवान शिव की प्राप्ति के लिए संध्या पूजन आदि किया था। उसी क्रम में कुंवारी कन्याएँ अपने घर की दीवारों पर गाय के शुद्ध गोबर से संजा मांडकर श्राद्ध पक्ष में 16 दिवसीय सन्ध्या मनाती है। उसी परम्परा से श्री महाकालेश्वर मंदिर में यह महोत्सव अश्विन कृष्ण पक्ष एकादशी से अश्विन शुक्ल द्वितीया तक मनाया जाता है।