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मुख्यालय पत्र भेजा / गेहूं की बंपर आवक भंडारण के सभी विकल्प खत्म दूसरे जिले में मांगी जगह, बाहर भेजने का भी प्रस्ताव

All the options of inward storage of wheat is over, the demand for place in another district, also the proposal to send out
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All the options of inward storage of wheat is over, the demand for place in another district, also the proposal to send out

  • पिछले साल जिले में 1.34 लाख टन गेहूं खरीदी हुई थी, इस बार ढाई गुना से ज्यादा 2.96 लाख टन खरीदी हो गई

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

शाजापुर. समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी ने प्रशासन के सामने अब भंडारण की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। जिले के 79 केंद्रों पर खरीदे जा रहे गेहूं को रखने के लिए अब यहां बिलकुल जगह नहीं बची। गोदाम फुल हो जाने के बाद मक्सी में 35 हजार टन का ओपन कैप व शाजापुर-शुजालपुर मंडी खाली पड़े शेड भी गेहूं से भर गए। बावजूद लगातार हो रही आवक को देख अब अन्य जिले में जगह की तलाश शुरू करा दी।
जिले में 15 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी शुरू हुई और 26 मई तक चलना है। अभी 4 दिन शेष है, लेकिन पंजीकृत किसानों में से अब तक 12 हजार किसानों को अभी गेहूं बेचने के लिए नंबर ही नहीं आया। खास बात यह है कि जो किसान गेहूं बेचने से बचे हैं वे सभी बड़े किसान हैं। सभी 100 क्विंटल गेहूं से ज्यादा अनाज बेचने की पात्रता में शामिल है। इधर, जिलेभर के खरीदी केंद्रों पर लगी ट्रैक्टरों की कतार को देख अब गेहूं का भंडारण करने के लिए प्रशासन पसोपेश में पड़ गया। जिले में अब गेहूं रखने के लिए जगह ही नहीं बची। ऐसे में प्रशासन ने मुख्यालय भोपाल पत्र भेजकर शाजापुर में खरीदे जा रहे गेहूं को दूसरे जिले में रखवाने की मांग की है। इतना ही नहीं भंडारण की परेशानी से बचने के लिए रैक की भी डिमांड भेज दी है।
ये प्रयास भी काम नहीं आए
गोदाम फुल होने के बाद जिम्मेदारों ने मक्सी में 35 हजार टन क्षमता वाला ओपन कैप बनवाया, लेकिन एक सप्ताह के अंदर ही यह भी लगभग पूरा भर गया। इस पर अधिकारियों की नजर कृषि मंडियों में अनुपयोगी पड़े शेड पर पड़ी और उन्होंने यहां भी गेहूं रखवाना शुरू कर दिया। लेकिन शाजापुर मंडी में 3 हजार और शुजालपुर मंडी में 6 हजार टन गेहूं दो दिन में ही रखकर इन मंडियों को भी फुल कर दिया। जिले में कई फैक्टरियां बंद पड़ी हैं। इन फैक्टरियों में भी अब गेहूं रखने की कवायद शुरू हो चुकी है। शाजापुर के समीप पंडी सिद्धार्थ फैक्टरी से लेकर अन्य फैक्टरी के मालिकों से भी संपर्क करना शुरू कर दिया है। समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए जिले के 60 हजार किसानों ने पंजीयन कराया था। इनमें से शुक्रवार तक 48 हजार 506 किसानों ने गेहूं बेच दिया। शेष बचे करीब साढ़े 11 हजार किसानों को अभी गेहूं बेचना बाकी है।
ज्यादा गेहूं बेचने वाले किसानों पर नजर
खरीदी के दौरान इस बार सीलिंग एक्ट का उल्लंघन भी सामने आया है। इसके तहत कई किसानों के पास अब भी सिंचित जमीन का रकबा 15 एकड़ से अधिकतम 27 एकड़ से ज्यादा है। गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराने वाले ऐसे जिले के करीब 3 हजार किसान सामने आए हैं। जिनके पास ज्यादा जमीन है। प्रशासन ने भी ऐसे किसानों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है।
रकबा बढ़ने के कारण बनी ऐसी स्थिति
इस साल गेहूं का रकबा 1.76 लाख हेक्टेयर पहुंच गया था। अफसरों ने बढ़े रकबे को नजर अंदाज कर पिछले साल की खरीदी को देख 70 हजार टन ज्यादा आवक का अनुमान लगाया। इधर, देरी से शुरू हुई खरीदी में सोशल डिस्टेंस के कारण शुरुआत में गिने चुने व छोटे किसानों को बुलवाया। ऐसे में बड़े किसानों का नंबर अब आया है। इससे आवक रोज 10 हजार टन से ज्यादा हो रही है।
3.50 लाख टन से ज्यादा खरीदी का अनुमान 
हर दिन 10 हजार टन की आवक और बचे हुए किसानों का आंकड़ा देखते हुए अब 3.50 लाख टन से भी ज्यादा गेहूं की आवक की संभावना है। इसी को देखते हुए अब अधिकारियों ने अन्य जिलों में भंडारण कराने की मांग शुरू की है। 
अन्य जिलों में जगह मांगी है
जिले में गेहूं की बंपर आवक हुई है। जिले के सारे गोदाम फुल हो गए हैं। ओपन कैप व मंडियों में अनाज रखवाने के बाद भी अभी काफी खरीदी होने की संभावना है। 50 से 60 हजार टन गेहूं अन्य जिले में भंडारण कराने के लिए मांग पत्र भेजा गया है।
- एच.एस. सुमन, जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी शाजापुर 
भंडारण के लिए भी तलाश
गेहूं भंडारण के लिए अब अन्य विकल्प भी तलाशे जा रहे है। यदि रैक मिल जाएगी तो काफी हद तक समस्या कम हो जाएगी। वैसे इसके बाद भी अन्य जिलों में भंडारण कराने की जरूरत पड़ सकती है। 
- डॉ. वीरेंद्रसिंह रावत, कलेक्टर

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