उज्जैन स्टेशन पहुंची श्रमिक स्पेशल ट्रेन से भास्कर लाइव / मुंबई से चढ़े, वड़ोदरा तक कुछ खाने को नहीं मिला, 80 यात्रियों के कोच में सिर्फ 25 बोतल पानी

Ascended from Mumbai, nothing was found till Vadodara, only 25 bottles of water in coach of 80 passengers
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Ascended from Mumbai, nothing was found till Vadodara, only 25 bottles of water in coach of 80 passengers

  • ट्रेन हर स्टेशन पर रुकी, गेट से नीचे नहीं उतरने दिया
  • बीच के स्टेशनों पर भोजन-पानी का रास्ता देखते रहे यात्री

दैनिक भास्कर

May 25, 2020, 05:00 AM IST

उज्जैन. लॉकडाउन में फंसे श्रमिक घर पहुंच सकें इसके लिए रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई। इनकी घोषणा होने मात्र से उन लाेगों के चेहरे खिल उठे जो लंबे समय से घर जाना तो चाहते हैं लेकिन उन्हें कोई साधन नहीं मिल रहा है। जो मिले वे इतने महंगे थे कि उसके लिए उनके पास रुपए नहीं थे। आखिर घर तो जाना ही था।

लंबे इंतजार के बाद रेलवे ने चुनिंदा स्टेशनों के लिए ट्रेन चलाने की शुरुआत कर दी। इनमें सफर करने वाले यात्री के अनुभव कैसे रहे, जानें उनकी कहानी उन्हीं की जुबानी। इन्हें लाने वाली ट्रेन में से एक थी 09521 बोरीवली से गोरखपुर तक इसे गार्ड एसके यादव लेकर आए। वे भी पूरी यात्रा के दौरान मास्क पहने रहे। खास उन स्टेशनों पर कहां उन्हें उतरना था। कोराेना संक्रमण के बीच रेलवे ने 1 मई अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर देश भर के शहरों में लॉकडाउन के दौरान फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके गृहनगर वापसी की पहल की। इस क्रम में पश्चिम रेलवे ने 2 मई से अब तक विभिन्न शहरों के लिए 500 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई। जिनसे 7 लाख प्रवासी मजदूर अपने गृहनगर पहुंच गए।   
हर स्टेशन पर खिड़की से झांकते पर उतरने की अनुमति नहीं थी
मुंबई में छह साल से कारपेंटर का काम रहे थे। एक तरह वही घर बन गया था। लॉकडाउन लगा तो शुरुआत में ज्यादा चिंता नहीं थी। सोचा था 21 दिन जैसे-तैसे निकल जाएंगे और फिर से काम शुरू कर देंगे लेकिन लॉकडाउन 2.0, फिर 3.0 और अब 4.0 लगा तो घर या गोरखपुर जाने का मन बनाया। मन क्या बनाया जाना मजबूरी हो गई। गाेरखपुर कोई पहली बार नहीं जा रहे थे लेकिन जितनी परेशानी इस बार आई वह जीवनभर याद रहेगी। बसें पहले से बंद थी। इसी बीच ट्रेन की घोषणा हो गई। स्टेशन पहुंचे तो इतनी भीड़ थी जैसे मुंबई लोकल में होती है।

जैसे-तैसे जगह मिली। खाना नहीं लाए थे। बीच में वड़ोदरा तक हर स्टेशन पर झांककर देखते कोई भोजन के पैकेट लेकर आ जाए लेकिन कोई नहीं आया। वड़ोदरा में पाव मिले। कोच में 80 लोग सवार थे। प्यास भी लग रही थी मगर स्टेशन पर उतरने की अनुमति नहीं थी। वड़ोदरा में पानी की बोतल आई लेकिन केवल 35। अब सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल आया लेकिन प्यास के आगे हम बेबस थे।
(जैसा अभिषेक सिंह ने बताया, वे मुंबई से गोरखपुर जा रहे थे)    
सबसे ज्यादा 349 ट्रेन उप्र के लिए, मप्र 26 और 11 झारखंड के लिए चली
रेलवे अफसरों के कहना है कि इन विशेष ट्रेनों में प्रवासी मज़दूरों के लिए सबसे अधिक 349 ट्रेन उत्तर प्रदेश के लिए चलाई। 56 बिहार, 39 उड़ीसा, 26 मध्यप्रदेश और 11 झारखंड के लिए चलाई। 6- 6 ट्रेन छत्तीसगढ़, राजस्थान, 4 ट्रेन उत्तराखंड और एक-एक ट्रेन मणिपुर के लिए चली।               

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