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संकट से उबारने के लिए रिजोलुशन प्राेफेशनल नियुक्त:उज्जैन-नागदा-जावरा मार्ग से रोज 4 लाख से ज्यादा का टोल वसूलने वाली कंपनी दिवालिया

उज्जैन16 दिन पहले
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  • एनसीएलटी ने आरपी नियुक्त किया, नई कंपनी संभालेगी, बैंक की किस्त पहली प्राथमिकता

95 किमी लंबे उज्जैन-नागदा-जावरा मार्ग पर वाहन चालकों से रोजाना औसतन चार लाख रुपए से अधिक टोल वसूलने वाली नागपुर की टापवर्थ टोलवेज प्रालि दिवालिया व शासन की नजर में डिफाल्टर हो चुकी हैं। ऐसे में यह मामला एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) कोर्ट में पहुंचा। लिहाजा इस कोर्ट ने टोल कंपनी के सारे अधिकारी छीनते हुए इसे पुन: सही स्थिति में लाने व संकट से उबारने के लिए आरपी (रिजोलुशन प्राेफेशनल) नियुक्त किया है। फिलहाल दावे किए जा रहे हैं कि पहले से स्थिति में अब सुधार है। माना ये भी जा रहा है कि जल्द ही टोल कंपनी बदलेगी।

शासन से इस टू-लेन के लिए बीओटी का 20 वर्ष तक का ठेका वर्ष 2012 में नागपुर की टापवर्थ टोलवेज प्रालि कंपनी से हुआ था। अनुबंध के तहत इस कंपनी को वर्ष 2031-32 तक टोल वसूलते हुए मार्ग का संधारण-रखरखाव करते रहना था लेकिन कंपनी ऐसा नहीं कर पाई। हुआ यह कि टोल कंपनी ने जिस बैंक से कर्ज लेकर मार्ग का निर्माण किया उसकी किस्त और एमपीआरडीसी की प्रीमियम दोनों वक्त पर अदा नहीं जा सकी। मार्ग का रखरखाव भी ठीक से नहीं हो पा रहा था। इन परिस्थितियों के बीच बैंक एनसीएलटी कोर्ट जा पहुंची।

दरअसल सबसे पहले किसी कंपनी के दिवालिया होने पर मामला यहां इस एनसीएलटी कोर्ट के पास पहुंचता है। यहां इस मामले को गंभीरता से सुना जाकर टोल कंपनी के अधिकार छीन लिए गए और इसे इस स्थिति व संकट के दौर से उबारने के लिए कोर्ट ने अनुज वाजपेयी को आरपी नियुक्त किया। इन्हें टोल कंपनी के अधिकार व जिम्मेदार सौंपी गई। लिहाजा वाजपेयी द्वारा व्यवस्थाओं को दुरुस्त करते हुए अब बैंक की बकाया किस्त व एमपीआरडीसी की बकाया प्रीमियम अदा करना शुरू की गई हैं। यहीं नहीं बड़ावदा से जावरा की तरफ करीब साढ़े आठ किमी का रिन्युअल भी करवा दिया गया है।
आगे क्या: नई कंपनी के हाथों में सौंपेंगे टोल की जिम्मेदारी
अब टोल कंपनी बदल जाएगी। जल्द ही यहां की बीओटी की बची हुई जिम्मेदारी के लिए नई कंपनी तलाश की जा रही है। संकट से उबारने के बाद उसे इस मार्ग को सौंप दिया जाएगा ताकि संबंधित व नई कंपनी बैंक का बचा हुआ पैसा और एमपीआरडीसी की प्रीमियम अदा कर सके। मार्ग का संधारण भी करते रहे। ताकि वाहन चालकों को परेशानी ना हो।
लाखों की टोल वसूली फिर क्यों दिवालिया हो गई कंपनी
इस मार्ग पर भूतड़ा व चकरावदा में टोल नाके हैं। जहां से टोल एजेंसी के कर्मचारी वाहन चालकों से टोल वसूलते रहे हैं। कंपनी के ही कर्मचारी बताते हैं कि औसतन करीब चार लाख से अधिक टोल की वसूली रोज होती रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि फिर कंपनी दिवालिया क्यों हो गई? इसका जवाब किसी के पास नहीं हैं लेकिन यह बात सामने आई है कि कंपनी यहां से वसूले जाने वाले टोल का पैसा कहीं और लगा रही थी। सांसद अनिल फिरोजिया ने हाल ही में दिल्ली में बैठक में केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी से इस मार्ग को फोरलेन करने की मांग की है।

यह बात सही है टोल कंपनी दिवालिया हो गई हैं। एनसीएलटी कोर्ट ने इस स्थिति से उबारने के लिए आरपी नियुक्त कर जिम्मेदारी सौंपी है। अब स्थिति में सुधार है। जल्द टोल नई कंपनी संभालेगी।-राैनक पाटनी, वरिष्ठ प्रबंधक टोल, टापवर्थ टोलवेज प्रालि
उज्जैन-नागदा-जावरा मार्ग की टोल कंपनी दिवालिया व डिफाल्टर हो गई हैं। उसे उबारने के प्रयास हो रहे हैं। एनसीएलटी ने इसे इस स्थिति से निकालने के लिए जिम्मेदारी सौंप दी है।-एसके मनवानी, संभागीय प्रबंधक एमपीआरडीसी

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