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पढ़ाई का तरीका बदला:1200 वर्ग फीट की छत को बनाया बायो वर्कशॉप, पौधों के बीच विद्यार्थियों को लैपटॉप से करवा रहे परीक्षा की तैयारी

उज्जैन20 दिन पहलेलेखक: राजेश पांचाल
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बॉटनी के विभागाध्यक्ष डॉ व्यास अपनी छत पर लेपटॉप से संबंधित पौधे की जानकारी अपने विद्यार्थियों से शेयर करते हैं। - Dainik Bhaskar
बॉटनी के विभागाध्यक्ष डॉ व्यास अपनी छत पर लेपटॉप से संबंधित पौधे की जानकारी अपने विद्यार्थियों से शेयर करते हैं।
  • बॉटनी के शिक्षक डॉ. व्यास ने ऑनलाइन क्लासेस के लिए घर की छत पर किए प्रयोग

लॉकडाउन में कॉलेज बंद थे। परीक्षाएं नजदीक हैं। थ्योरी ऑनलाइन पढ़ाई जा सकती है लेकिन प्रैक्टिकल कैसे करवाएं। ऐसे में कालिदास कन्या कॉलेज के बॉटनी के विभाग अध्यक्ष डॉ. हरीश व्यास ने अपने घर की 1200 वर्ग फीट छत काे ही प्रयोगशाला बना दिया।

कोर्स से जुड़े पौधे लगाए। कोरोना के दूसरे दौर में उन्हें यह ज्यादा कारगर लग रहा है। उन्हीं के सामने बैठकर लैपटॉप से परीक्षा की तैयारी करवा रहे हैं। ऋषिनगर एक्सटेंशन निवासी डॉ. व्यास कहते हैं शिरपुर, महाराष्ट्र में बॉटनी पर लेक्चर दे रहा था। उस दौरान एक छात्र ने पूछा, सर आप लेक्चर तो देते हैं क्या खुद ने प्रयोग किए हैं।

घर आकर इस पर विचार किया। छत पर एक अलग तरह का बॉटनिकल गार्डन बनाने की शुरुआत कर दी। एक साल तक यहां-वहां से जरूरी पौधे एकत्र किए। इसके बाद लॉकडाउन लगा। आधा से ज्यादा वक्त छत पर गुजरने लगा।

वहीं बैठकर बॉटनी की ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की। अनलॉक के बाद इस गार्डन के लिए ऐसे पौधे तलाशे जो बॉटनी के प्रैक्टिकल में उपयोगी हो सकें। कोरोना का दूसरा दौर शुरू हुआ तो इन्हीं पौधों से प्रैक्टिकल कर परीक्षा की तैयारी करवा रहे हैं।

75 से ज्यादा वैरायटियों के पौधे लगाए, जैविक खाद का उपयोग
विषय से जुड़े एंजियोस्पर्म, जिम्नोस्पर्म के साथ डॉ. व्यास की छत पर 75 से ज्यादा किस्म के पौधे लगे हैं। इनका पोषण वे जैविक खाद से करते हैं। इसे वे खुद तैयार रहे हैं। रोग प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, पुदीना, तुलसी, धनिया भी उगा रहे हैं।

4 किलोवॉट का सोलर पैनल, उपयोग से ज्यादा बिजली उत्पादन
छत के गार्डन में डॉ. व्यास ने 4 किलो वॉट का सोलर पैनल भी लगाया है। उनका दावा है कि इससे प्रति माह 400 यूनिट बिजली बन रही है जबकि उनके घर का उपभोग 250 यूनिट हो रहा है। शेष बिजली को ऑन ग्रिड सिस्टम के तहत बिजली कंपनी को दे रहे हैं।

वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से बढ़ाया भूजल स्तर, बोरवेल चल रहा
बारिश के पानी को सहेजने के साथ उनका उपयोग करने के लिए उन्होंने वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगवाया है। डॉ. व्यास का कहना है कि इससे गर्मी में भी बोरवेल में पानी रहता है। इसके अलावा उसकी क्वालिटी में भी कोई बदलाव नहीं आया है।

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