लापरवाही का आलम:शिप्रा विहार कॉलोनी में उद्यान की जमीन पर दफना दिए कोरोना संक्रमित मृतकों के शव

उज्जैन6 महीने पहले
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उद्यान की जमीन पर दफनाए गए शव। - Dainik Bhaskar
उद्यान की जमीन पर दफनाए गए शव।
  • यूडीए ने अज्ञात लोगों के खिलाफ थाने में एफआईआर के लिए आवेदन दिया

देवासरोड से लगी शिप्रा विहार कॉलोनी सेक्टर बी में गार्डन की जमीन पर कोरोना संक्रमित मृतकों के शव दफनाने को लेकर उज्जैन विकास प्राधिकरण ने नानाखेड़ा थाने में अज्ञात लोगों पर एफआईआर के लिए गुरुवार को आवेदन दिया है। इसमें कहा गया है कि कब्रिस्तान से लगी पार्क की जमीन पर अज्ञात लोगों द्वारा शव दफनाए जा रहे हैं। इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाए।

यूडीए ने शिप्रा विहार कॉलोनी विकसित की है। इसके सेक्टर बी में कब्रिस्तान से लगी पार्क की जमीन को लेकर यूडीए और वक्फ बोर्ड में न्यायालयीन विवाद चल रहा है। यूडीए को पता चला कि उक्त जमीन पर अज्ञात लोगों ने शव दफनाना शुरू कर दिए हैं। इस पर गुरुवार को यूडीए अधिकारियों मौके पर जाकर पंचनामा बनाया। पंचनामे में बताया गया कि जमीन पर अज्ञात व्यक्तियों ने कोरोना एवं कोरोना संदिग्ध मृतकों के शव प्राधिकरण के आधिपत्य की जमीन पर दफनाए जा रहे हैं। पंचनामे पर कार्यपालन यंत्री विनोद सिंघई, सहायक यंत्री संजय साध, उपयंत्री प्रवीण दुबे, यूडीए कर्मी विवेक बरुआ व शिप्रा विहार निवासी मांगीलाल पाटीदार ने हस्ताक्षर किए हैं। थाने में आवेदन के साथ यूडीए ने पंचनामा और मौका नक्शा भी प्रस्तुत किया है।

पंचनामे पर हस्ताक्षर से इंकार
यूडीए ने मौके का पंचनामा बनाया है। इस पंचनामे पर यूडीए के ईई सिंघई, एई साध, उपयंत्री दुबे के हस्ताक्षर दर्ज हैं। लेकिन इस मामले में जब भास्कर ने एई साध से मोबाइल पर बात की तो उन्होंने कहा कि मैं तो बीमार हूं। मैं न मौके पर गया और न मैंने कोई हस्ताक्षर किए हैं। मुझे तो इस मामले की जानकारी तक नहीं है। साध के इस बयान से यूडीए के पंचनामे पर भी सवाल खड़ा हो गया है।

अफसरों की लापरवाही उजागर
यूडीए के आधिपत्य की कही जा रही जमीन पर अनेक शव दफनाए जा चुके हैं। लेकिन यूडीए के अधिकारियों को इसकी खबर तक नहीं हुई। इस योजना के प्रभारी अधिकारियों की अनदेखी के चलते यह स्थिति बनी है। अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण जिस जमीन को यूडीए अपनी बता रहा है, वह अब कब्रिस्तान की शक्ल ले चुकी है। अधिकारियों ने मीडिया में मामला आने के बाद पंचनामा तैयार कर थाने में आवेदन देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। इतने शव दफनाने तक अधिकारी इस तरफ क्यों अनदेखी करते रहे, यह जांच का विषय होना चाहिए। संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया जाना चाहिए। लेकिन रात तक संबंधित अधिकारियों को नोटिस तक नहीं दिए गए।

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