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वैक्सीनेशन नहीं, मेरे अपने फर्स्ट:नियम तोड़ो, पीट दो या डॉक्टर को धमका दो... आप नेता हो, पूरी छूट है

उज्जैनएक महीने पहले
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हमारे हक का टीका सांसद अनिल फिरोजिया के घर जाकर उनके परिवार और चहेतों को लगा आई अस्पताल की टीम। प्रशासन के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है। अस्पताल के बेड बेचने का आरोप हो, डॉक्टर को धमकी का या वैक्सीनेशन कर रहे कर्मचारी को पीटने का... आप नेता हो तो सब चलेगा। यहां कोई कुछ नहीं कहेगा।

न अफसर कार्रवाई को तैयार हैं और न सरकार कोई कॉल ले रही। बेशक मंत्री-सांसद और अन्य नेता दिन-रात मदद में लगे हैं, लेकिन इन हरकतों पर आपकी चुप्पी ने जनता का भरोसा तोड़ा है।

डॉक्टर को अस्पताल में धमकी
सरकारी अस्पताल में भाजपा के एक कथित नेता ने कोविड ड्यूटी में लगीं डॉ. सोनाली अग्रवाल को धमकी दी। यही नहीं, उसने डॉ. अग्रवाल को थप्पड़ मारने तक की बात कही। डॉ. अग्रवाल ने उसका नाम जगदीश मालवीय बताया। उन्होंने इसकी शिकायत एसपी और कलेक्टर से भी की थी। घटना की जानकारी देते हुए पुलिस थाने में आवेदन भी दिया। मामला अब तक जांच में है।
...लेकिन हुआ क्या? अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। क्योंकि मामला नेता से जुड़ा है।

बेड के सौदे का आरोप
माधवनगर अस्पताल में मंत्री के प्रतिनिधि अभय विश्वकर्मा पर डॉ. संजीव कुमरावत ने गंभीर आरोप लगाए। हालांकि यह आरोप उन्होंने नागदा ट्रांसफर किए जाने के बाद लगाए। उन्होंने कहा कि अभय ने अस्पताल को हाइजैक कर रखा है। खाली बेड पर कब्जा कर मरीजों को बेच रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में साफ दिख रहा था कि अभय की मनमानी की शिकायत डॉ. कुमरावत पहले ही अफसरों को कर चुके थे।

...लेकिन हुआ क्या? डॉ. कुमरावत नागदा जा चुके हैं, अभय से कोई सवाल तक नहीं।

टीके के लिए चांटा
नर्सिंग कॉलेज में टीकारण के दौरान मारपीट का मामला भी सामने आया। इस बार आरोप लगे भाजपा नेता राजेश बोराना पर। बताया गया कि उन्होंने 18 प्लस के अपने लोगों की बुकिंग नहीं करने पर शिक्षक कर्मचारी को पीट दिया। इस मामले की जानकारी लगने पर शिक्षकों ने विरोध भी किया। हालांकि विरोध बढ़ता देख मामले में एफआईआर दर्ज करना पड़ी, लेकिन बाद में समझौते की बातें आईं।

...लेकिन हुआ क्या? विरोध-प्रदर्शन के बाद एफआईआर दर्ज, हालांकि गिरफ्तारी नहीं।

...और अब घर पर वैक्सीनेशन
मेडिकल टीम सांसद के घर पहुंची, उनके परिवारजन, स्टाफ मेंबर और कार्यकर्ताओं तक को घर पर ही टीका लगा। जबकि शहरवासी स्लॉट खाली होने का इंतजार ही कर रहे हैं। मामला उछला तो सांसद ने कहा कि मैंने कोई पाप नहीं किया। टीकाकरण अधिकारी को तो कुछ पता ही नहीं था। कांग्रेस ने मुद्दा उठाया, सोशल मीडिया पर विरोध हुआ, लेकिन शनिवार तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

...लेकिन हुआ क्या? टीके का कोई हिसाब नहीं, न किसी से सवाल, न कोई जवाब।

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री तक भेजी शिकायत
इधर राऊ के कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने पीएम को पत्र लिख सांसद फिरोजिया के साथ उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव के प्रतिनिधि द्वारा बेड बेचने की भी शिकायत की है। पटवारी ने कहा है सांसद के निवास पर टीकाकरण कर टीकाकरण केंद्र बना दिया। यह महामारी अधिनियम में लॉकडाउन का उल्लंघन है। सीआरपीसी की धारा 144 का भी उल्लंघन है।

इसके तहत आम लोगों पर 188 में कार्रवाई की जा रही है। इसमें भी कार्रवाई होना चाहिए। ऐसे जनप्रतिनिधि के खिलाफ कार्रवाई के लिए लोकसभा अध्यक्ष को अनुशंसा करना चाहिए। तराना क्षेत्र के कांग्रेस विधायक महेश परमार ने भी पीएम को पत्र लिख सांसद फिरोजिया, सीएमएचओ व टीकाकरण अधिकारी के खिलाफ 188 में केस दर्ज करने की मांग की है।

पत्र में कहा है कि सांसद ने धारा 144 का उल्लंघन किया है। परमार ने कहा है कि प्रदेश में टीकाकरण अत्यंत सुस्त चल रहा है। 18 से 44 साल वाले 100 लोगों को ही टीके ही लगाए जा रहे हैं। टीकाकरण के लिए लोग भटक रहे हैं। सांसद के घर टीकाकरण की उच्च स्तरीय जांच समिति से जांच कराएं।

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