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रक्षाबंधन:कोरोना असर: विदेशों से बड़ा गणेश के लिए नहीं आई राखी

उज्जैन14 दिन पहले
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  • सबसे पहले महाकाल को बंधेगी राखी, भस्मआरती पुजारी परिवार की महिलाएं आएंगी बांधने

महाकाल मंदिर के समीप स्थित बड़ा गणेश मंदिर में इस रक्षाबंधन पर विदेशी बहनों की राखियां नहीं पहुंच सकी। उनकी ओर से पुजारी परिवार खरीद कर राखी बांधेगा। रक्षाबंधन पर सबसे पहले महाकाल को तड़के भस्मआरती में राखी बांधी जाएगी। इसके लिए भस्मआरती पुजारी परिवार की महिलाएं आएंगी। बड़ा गणेश को रक्षाबंधन पर अमेरीका, यूरोप और अन्य देशों से राखियां आती हैं। वहां रहने वाली महिलाएं डाक से राखी भेजती हैं। पुजारी पं. आनंद शंकर व्यास के अनुसार कैलिफोर्निया से उषा अग्रवाल, वीना राजपाल, लंदन से पुष्पेंद्र कौर की राखी आती है। इसके अलावा अन्य स्थानों से भी भारतवंशी महिलाएं राखी भेजती हैं। उषा अग्रवाल ने पं. व्यास को फोन कर बताया कि लॉकडाउन के कारण बाजार बंद हैं। इस कारण राखी की खरीदी भी नहीं हो सकी है। उन्होंने पं. व्यास को कहा है कि वे उज्जैन से ही राखी खरीद कर भगवान गणेश को बांध दें। पं. व्यास ने बताया विदेशों में भी कोरोना के चलते बाजार बंद हैं और लॉकडाउन में लोग घरों से नहीं निकल पा रहे हैं। हालांकि देश के दिल्ली, मुंबई, जयपुर, सहारनपुर, भोपाल, इंदौर सहित अनेक शहरों से राखियां आई हैं। पं. व्यास के अनुसार अमेरिका और यूरोप के शहरों से कई बहनें कई सालों से राखी भेजती हैं।

20 साल से हाथ से बनी बड़ी राखी बांध रही
निजी कॉलेज में प्रोफेसर गिरिजेश सोनी बड़ा गणेश को 20 साल से हाथ से बनाई बड़ी राखी बांध रही हैं। इस बार भी उन्होंने 10 इंच व्यास की बड़ी राशि तैयार की है। राशि में गणेशजी की आकृति बनाई है। उन्होंने बताया राखी बनाने में 20 दिन लगे। गिरिजेश व्यास का कोई भाई नहीं है। इसलिए वे बड़ा गणेश को बड़ा भाई मान कर हर साल राखी बांधती हैं। इसे बनाने में पति राजेंद्र सोनी भी सहयोग करते हैं।

11 हजार लड्‌डू का भोग
महाकालेश्वर मंदिर में रक्षाबंधन पर भगवान महाकाल को राखियां चढ़ाई जाएंगी। सबसे पहले भगवान को तड़के 4 बजे भस्मआरती में पुजारी रक्षासूत्र बांधेंगे। पं. आशीष पुजारी के अनुसार भगवान को भस्मआरती में राखी बांधने के लिए भस्मआरती पुजारी श्रीकृष्ण पुजारी व महेश उस्ताद पुजारी परिवार की महिलाएं आएंगी। कोरोना के कारण इस बार भगवान को सवा लाख की जगह केवल 11000 लड्‌डुओं का ही महाभोग लगेगा। कोटितीर्थ पर मंदिर के ब्राह्मण श्रावणी का आयोजन करेंगे। महाकाल मंदिर में भी देश के विभिन्न हिस्सों से राखियां आई हैं।

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