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उज्जैन की विवादित गणेश जिनिंग मिल अब शासन की:कोर्ट ने 130 करोड़ की 3 हैक्टेयर जमीन के मामले में शासन के पक्ष में सुनाया अहम फैसला

उज्जैन4 दिन पहले
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गणेश जिनिंग फैक्ट्री परिसर। - Dainik Bhaskar
गणेश जिनिंग फैक्ट्री परिसर।

शहर के बीचोंबीच मौजूद बेशकीमती जमीन अब शासन की हो गई है। 3 हैक्टेयर जमीन पहले सिंधिया रियासत की थी, इस जमीन पर फैक्ट्री लगाने के लिए आवंटित की गई थी। लेकिन कुछ लोगों ने इसे अपनी ही निजी संपत्ति बताते हुए हक जताया था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। और जमीन सरकार को अपने अधिकार में लेने के आदेश जारी किए।

इस संबंध में अष्टम जिला न्यायाधीश संतोष प्रसाद शुक्ल की कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। 3 हैक्टेयर जमीन की कीमत 130 करोड़ रुपए बताई जा रही है। दरअसल बता दें कि कलेक्टर आशीष सिंह के निर्देश पर उज्जैन की ताकायमी कारखाना भूमियों के सम्बन्ध में अपर कलेक्टर अवि प्रसाद द्वारा शासकीय जमीनों का आधिपत्य लिया जा रहा है।

इस जमीन को लेकर हरियाणा निवासी योगेश कुमार गुप्ता ने अपना अधिकार जताते हुए दावा पेश किया था। लेकिन तहसीलदार की ओर से इसमें कोई कार्रवाई करने से मना कर दिया गया। तब योगेश ने जिला कोर्ट व हाईकोर्ट में केस दायर कर अपना अधिकार मांगा। मप्र हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने प्रशासन व कोर्ट की एक कमेटी का गठन कर 4 माह में प्रशासन व योगेश के पक्षों व दस्तावेजों की जांच करने के निर्देश दिए थे।

शासकीय अधिवक्ता प्रमोद चौबे ने बताया कि इस जमीन को लेकर आबकारी विभाग के बयान और दस्तावेज सबसे महत्वपूर्ण साबित हुए। चौबे ने कहा सहायक जिला आबकारी अधिकारी राम हंस पचौरी ने जमीन के पक्ष में संबंधित दस्तावेज पेश किये। पचौरी ने कोर्ट को बताया कि इस जमीन को योगेश के द्वारा कस्टम विभाग की फैक्ट्री होना बताया गया था।

लेकिन हमने कोर्ट को यह बताया कि आजादी के पहले कस्टम व आबकारी विभाग एक ही होता था, लेकिन अब कस्टम विभाग केंद्र के अधीन चला गया है। तब से कस्टम विभाग की सभी संपत्तियां आबकारी विभाग की हैं। इस संबंध में महत्वपूर्ण दस्तावेज कोर्ट के समक्ष पेश किए गए थे। तहसीलदार पूर्णिमा सिंघी ने भी इसी संबंध में महत्वपूर्ण दस्तावेज कोर्ट के समक्ष पेश किए। इनसे सहमत होकर कोर्ट ने इस जमीन को शासकीय मानते हुए शासन के पक्ष में आदेश जारी किया।

क्या है ताकायमी जमीन -
आजादी के पहले रियासत काल में उद्योग लगाने के लिए जमीन आवंटित की जाती थी। उद्योग स्थापित करने के लिए दी जाने वाली जमीन में उल्लेख होता था कि जब तक फैक्ट्री संचालित होगी तब तक उस जमीन का उपयोग संबंधित व्यक्ति द्वारा किया जा सकेगा। इसके बाद वह जमीन वापस लौटा दी जाती थी। यह जमीन लीज पर आवंटित की जाती है। उज्जैन में गणेश जिनिंग फैक्ट्री का विवाद भी ताकायमी की जमीन का ही है।

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