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चिकित्सा के साथ मानव धर्म:पति की मौत, पत्नी और दो साल के बच्चे की मदद के माध्यम बने डॉक्टर

उज्जैनएक महीने पहले
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  • कलेक्टर सिंह ने तत्काल एसडीएम को मदद के लिए कहा, शहडोल तक पहुंचाया

चिकित्सा धर्म के साथ में मानव धर्म की दो मिसाल उज्जैन के डॉक्टर्स ने पेश की है। उन्होंने पीड़ित परिवार की मदद की। कलेक्टर आशीष सिंह ने भी तत्काल पीड़ित परिवार की मदद में टीम को लगा दिया। इंदौर से शहडोल के लिए नर्मदा एक्सप्रेस से जा रहे इकबाल पिता एजाज उम्र 34 साल निवासी शहडोल की ट्रेन में अचानक तबीयत खराब हो गई। उन्हें गुरुवार शाम को उज्जैन स्टेशन पर उतारकर जिला चिकित्सालय ले जाया गया। यहां डीवीडी वार्ड में उन्हें भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। रात 9 बजे मरीज की मौत हो गई। उनके साथ में पत्नी शिरीन व 2 साल का बच्चा था, जिनका उज्जैन में कोई रिश्तेदार नहीं था। पत्नी की भी तबीयत खराब थी।

जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. महेश मरमट ने महिला और बच्चे की मदद के लिए रात में ही भास्कर को इसकी सूचना दी। भास्कर ने इस बारे में कलेक्टर आशीष सिंह को अवगत कराया। साथ ही महिला का मोबाइल नंबर भी भेजा। इस पर कलेक्टर सिंह ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल एसडीएम को महिला से बात कर मदद करने के लिए कहा।

एसडीएम ने महिला से संपर्क कर उनकी परेशानी जानी और कहा कि कलेक्टर साहब ने आपकी मदद के लिए कहा है। इस पर महिला ने कहा कि आप लोगों ने हमें ऐसे समय पर मदद का भरोसा दिलाया जब हालात खराब हैं, आप लोगों का शुक्रिया। हम लोगों ने वाहन किराए पर ले लिया और अब हम लोग शहडोल के लिए निकल रहे हैं। एसडीएम ने महिला से कहा, रास्ते में कोई भी तकलीफ हो तो आप मेरे मोबाइल नंबर संपर्क कर लेना।

इधर गर्भवती पॉजिटिव महिला को भर्ती करवाया, डॉ. रौनक की वजह से घर में रौनक आई, बेटी का नाम रौनक ही रखेंगे

रोकस के पूर्व सदस्य राजेश बोराना ने आरआर टीम के नोडल अधिकारी डॉ. रौनक एलची को मैसेज किया कि बड़नगर की गर्भवती महिला पिंकी यादव डिलीवरी के लिए आई है, जो पॉजिटिव है। परिवार के लोग हॉस्पिटल में भर्ती करवाने के लिए परेशान हो रहे हैं। परिवार की मदद कीजिए। डॉ. रौनक ने महिला को आरडी गार्डी अस्पताल में शिफ्ट करवाया।

जहां महिला को भर्ती कर लिया। महिला ने यहां पर बालिका को जन्म दिया। मां व बेटी दोनों अब स्वस्थ हैं। परिवार के लोगों ने डॉ. रौनक से कहा कि आप धरती पर भगवान का रूप हो। ऐसे विपरीत समय में आपने हमारी मदद की। उन्होंने अपनी बालिका का नाम भी रौनक ही रखने का निर्णय लिया, क्योंकि डॉ. रौनक की वजह से ही उनके घर में रौनक आई है।

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