मुंबई की श्रुति ने 5559 पद्य से महाकाव्य रचा:संस्कृत भाषा में राधा के जन्म से परम धाम गमन तक का चरित्र वर्णन किया

उज्जैनएक महीने पहले

उज्जैन। माया नगरी मुंबई में पली-बढ़ी युवती को संस्कृत भाषा से इतना लगाव रहा कि 11 वर्ष की उम्र से राधा के जीवन पर महाकाव्य लिखना शुरू किया तो 19 वर्ष की उम्र में पूरा कर लिया। ग्रंथ में 5559 पद्य के माध्यम से मां राधा के जन्म से परम धाम गमन तक का निर्मल चरित्र वर्णित किया है।

मुंबई निवासी 26 वर्षीय श्रुति कानिटकर संस्कृत भाषा की जानकार है। देश भर में संस्कृत भाषा में कविता पाठ करती है। इतना ही नहीं श्रुति ने राधा तत्व पर संस्कृत में 5559 पद्य के माध्यम से महाकाव्य की रचना कर दी। श्रुति ने बताया कक्षा आठवीं में पढ़ाई के दौरान ही संस्कृत भाषा के संपर्क में आई थी। तभी से संस्कृत भाषा को लेकर लगाव शुरू हुआ। 11 वर्ष की आयु में काव्य लेखन शुरू किया। 19 वर्ष की आयु तक 8 वर्ष में मां राधा पर महाकाव्य लिख दिया। इसके बाद संस्कृत में B. A. और M. A. के बाद आईआईटी मुंबई से संस्कृत व्याकरण में अपना शोध कार्य शुरू कर दिया । इसी क्रम में वह विक्रम विश्वविद्यालय की संस्कृत अध्ययन शाला तक प्राचीन ग्रंथों का अवलोकन करने पहुंची है। उनका कहना है कि मां राधा को ही अपना गुरु मानती है।

भगवान महाकाल को अर्पित किया महाकाव्य

शोध कार्य के लिए उज्जैन पहुंची श्रुति ने सबसे पहले भगवान महाकाल के दर्शन कर बाबा महाकाल को अपनी रचनाओं के ग्रंथ श्रीमती रचितम की प्रति अर्पित की।भगवान महाकाल के दर्शन कर ग्रंथ को बाबा महाकाल को समर्पित किया।