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राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी:देवनागरी लिपि विश्व को भारत की अनुपम देन- प्रो. शर्मा

उज्जैन2 महीने पहले
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  • राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी : ‘विश्व लिपि देवनागरी : तब से अब तक’ विषय पर विद्वानों के विचार, पुस्तक का भी विमोचन

राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना की ओर से विश्व लिपि देवनागरी: तब से अब तक विषय पर राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का आयोजन किया गया। वेब संगोष्ठी में मुख्य अतिथि नागरी लिपि परिषद् नईदिल्ली के महामंत्री डॉ. हरिसिंह पाल एवं मुख्य वक्ता समालोचक व विक्रम विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा थे। अध्यक्षता साहित्यकार हरेराम वाजपेयी ने की। विशिष्ट अतिथि संस्था अध्यक्ष ब्रजकिशोर शर्मा (उज्जैन) और साहित्यकार सुवर्णा जाधव (मुंबई) थे। मुख्य अतिथि डॉ. पाल ने कहा भारतीय संविधान में देवनागरी लिपि को राजभाषा हिंदी की लिपि के रूप में स्वीकृति मिली हुई है। यह लिपि सदियों से भारत को एकजुट किए हुए है। शून्य का आविष्कार नागरी लिपि के इतिहास के साथ जुड़ा हुआ है। नागरी लिपि परिषद् ने रूसी, इतालवी, इंडोनेशियाई, फ्रेंच आदि भाषाओं को देवनागरी लिपि के माध्यम से सीखने के लिए महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का प्रकाशन किया है। मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. शर्मा ने अपने व्याख्यान में कहा कि सिंधु घाटी की लिपि से लेकर ब्राह्मी लिपि और देवनागरी लिपि विश्व सभ्यता को भारत की महत्वपूर्ण देन है। वर्तमान में दुनिया में तीन हजार से अधिक भाषाएं बोली जाती हैं, जबकि लिपियां चार सौ हैं। देवनागरी लिपि इस देश की अनेक भाषा और बोलियों की स्वाभाविक लिपि बनी हुई है। आचार्य विनोबा भावे ने देवनागरी लिपि की इस शक्ति को पहचाना था और उन्होंने इसे जोड़ लिपि के रूप में देश की एकता और अखंडता को मजबूती देने का माध्यम बनाया।

भाषा प्रकृति का महत्त्वपूर्ण वरदान है- शर्मा
संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि शर्मा ने कहा भाषा प्रकृति का महत्त्वपूर्ण वरदान है। विभिन्न ध्वनियों को व्यक्त करने के लिए मनुष्य को लिपि चिह्नों की आवश्यकता हुई। देवनागरी लिपि दुनिया की विभिन्न लिपियों से अधिक समृद्ध है। विशिष्ट अतिथि जाधव ने कहा वर्तमान में देवनागरी लिपि के प्रसार के लिए व्यापक प्रयासों की जरूरत है। अध्यक्षता कर रहे साहित्यकार वाजपेयी ने कहा हमें देवनागरी लिपि के प्रयोग को लेकर गौरव का भाव होना चाहिए। इस मौके पर संस्था के महासचिव डॉ. प्रभु चौधरी की पुस्तक देवनागरी लिपि : तब से अब तक का विमोचन भी किया गया। चौधरी को राष्ट्रीय हिंदी परिवार, इंदौर द्वारा अभिनन्दन पत्र अर्पित कर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी की सूत्रधार राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी शर्मा थीं। आभार साहित्यकार कृष्णा श्रीवास्तव (मुंबई) ने माना। संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से कई साहित्यकार, हिंदी विशेषज्ञों, शोधार्थियों ने सहभागिता की।

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