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कोरोना में परेशानी:बिजलीकर्मी संक्रमित हो रहे, फिर भी बिजली कंपनी के हॉस्पिटल को कोविड केयर सेंटर नहीं बना रहे

उज्जैनएक महीने पहले
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  • कोरोना काल में 24 घंटे बिजली सप्लाई देने के बावजूद फ्रंट लाइन हेल्थ वर्कर्स नहीं माना

बिजली कर्मचारी लगातार संक्रमित हो रहे हैं, कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों की मौत भी हो रही है, बावजूद इसके बिजली कंपनी के हॉस्पिटल को कोविड केयर सेंटर नहीं बनाया जा रहा है। कोरोना काल में 24 घंटे बिजली सप्लाई दिए जाने के बाद भी उन्हें फ्रंट लाइन हेल्थ वर्कर्स नहीं माना है। ऐसे में वे मुख्यमंत्री कोरोना योद्धा कल्याण योजना से भी वंचित हो रहे हैं।

कंपनी में संक्रमित कर्मचारियों की मौत का आंकड़ा 200 के पार पहुंच गया है। इसमें सबसे ज्यादा 108 कर्मचारी पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के हैं, जिनमें उनके परिवार के लोग भी शामिल हैं। इसके बावजूद बिजली कंपनी खुद के अस्पताल शुरू नहीं कर रही है। कंपनी कर्मचारियों के ग्रुप में इस तरह का मैसेज चल रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में कार्यरत कर्मचारी लगातार कोरोना की चपेट में आ रहे हैं। वर्तमान में हर रोज 8 से 10 कर्मचारी व उनके परिवार के सदस्यों की मौत हो रही है।

कंपनी में अब तक 108 कर्मचारियों एवं उनके परिजनों की कोरोना से मौत हो चुकी है, जिनमें 81 कर्मचारी और बाकी के 27 परिवार के सदस्य हैं। सबसे ज्यादा मौतें इंदौर में 26, उज्जैन में 15, रतलाम में 7, देवास में 12, मंदसौर में 8, खंडवा में 5, धार में 5, खरगोन में 7, आगर, झाबुआ में 4-4, बड़वानी में 3, शाजापुर में 4, नीमच और बुरहानपुर में 3-3 मौत हो चुकी है। इसके अलावा मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में 42, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण में 47, ट्रांसमिशन और जेनरेशन कंपनी सहित 200 से ज्यादा बिजली कर्मचारियों व उनके परिवार के सदस्यों की मौत हो चुकी है।

इसकी वजह ऑक्सीजन और आवश्यक दवाइयों का नहीं मिलना बताया जा रहा है। यूनियन के पदाधिकारियों ने ऊर्जा मंत्री और कंपनी प्रशासन को कंपनी के हॉस्पिटल शुरू करने के लिए पत्र भी लिखे हैं। 24 घंटे बिजली सप्लाई बनाए रखने वाले कर्मचारियों को फ्रंट लाइन वर्कर्स भी नहीं माना गया है, जिसके कारण मुख्यमंत्री कोरोना योद्धा कल्याण योजना के अंतर्गत उन्हें पात्र घोषित नहीं किया जा सका है। जिसको लेकर बिजली संगठनों में आक्रोश है।

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