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  • Even After Big Expenses, The Journey Is Stopped; Trains Do Not Stop At These Two New Stations And Tickets Are Not Available.

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बिना ट्रेन वाले दो स्टेशन:बड़े खर्चे के बाद भी रुका हुआ है सफर; इन दो नए स्टेशनों पर ट्रेन नहीं रुकती और न टिकट मिलते

उज्जैनएक महीने पहले
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चिंतामण गणेश: 24 कोच की मालगाड़ी व ट्रेन खड़ी होगी - Dainik Bhaskar
चिंतामण गणेश: 24 कोच की मालगाड़ी व ट्रेन खड़ी होगी
  • विक्रमनगर स्टेशन और चिंतामण स्टेशन पर नई बिल्डिंग तो बनाई, ट्रेन नहीं चला रहे

उज्जैन-इंदौर रेल मार्ग पर विक्रमनगर स्टेशन और उज्जैन-फतेहाबाद रेल मार्ग पर चिंतामण स्टेशन अब नए स्वरूप में आ गए हैं। शहर के सबसे नजदीक इन दोनों स्टेशन का कायाकल्प हो गया है। इससे सिंहस्थ 2028 में आने वाले यात्रियों को सुविधाएं मिलेंगी।

सिंहस्थ 2016 में रेलवे ने चार फ्लैग स्टेशन बनाए थे। इसके बावजूद अधिकांश यात्री मुख्य स्टेशन पर ही आए। उन्होंने यहीं से वापसी भी की। ऐसे में रेलवे ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। दोनों स्टेशन के काम अंतिम दौर में हैं। भास्कर ने दो स्टेशन पर लॉकडाउन के पहले और बाद के हालात जाने। इससे पता चलता है कि नए स्टेशन तो बना दिए, लेकिन यहां ट्रेन नहीं चलाई जाने से उनका उपयोग नहीं हो रहा है।

बोर्ड को भेजा है प्रस्ताव
उज्जैन से इंदौर के लिए दोनों रूट पर लोकल ट्रेन चलाने के लिए रेलवे बोर्ड को प्रस्ताव भेजा है। उम्मीद है कि इसे जल्द ही स्वीकृति मिलेगी। उसके बाद विक्रमनगर स्टेशन पर पहले की तरह ट्रेन रुकेंगी। उज्जैन-फतेहाबाद गेज परिवर्तन का काम पूरा हो गया है। कमिश्नर रेलवे सेफ्टी के निरीक्षण और टीप के बाद चिंतामन स्टेशन से भी ट्रेन गुजरेंगी।
-विनीत गुप्ता, डीआरएम

चिंतामण गणेश: 24 कोच की मालगाड़ी व ट्रेन खड़ी होगी
ऐसी थी तैयारी-
उज्जैन-फतेहाबाद के बीच 22.90 किमी में ब्राॅड गेज का काम पूरा हो गया है। इसी रूट के पहला स्टेशन चिंतामण गणेश है। चिंतामण रेलवे स्टेशन पर दाे मंजिला भवन और 600 मीटर लंबा प्लेटफॉर्म बनाया है। फरवरी 2014 से उज्जैन-फतेहाबाद के बीच रेल यातायात बंद है। यहां 24 कोच की मालगाड़ी व ट्रेन आसानी से खड़ी हो सकेगी। एक प्लेटफॉर्म बनकर तैयार है। स्टेशन की दीवारों पर पूर्वाेत्तर के कलाकारों ने रंग-बिरंगे चित्र बनाए हैं। उन्होंने हेलिकॉप्टर से लेकर मेट्रो और फूल-पत्तियां बनाई हैं। इसके अलावा यहां इलेक्ट्रिफिकेशन भी किया है।

क्राउड कंट्रोल होगा- इस स्टेशन का नाम चिंतामण गणेश मंदिर के नाम पर रखा है। यहां आने वाले अधिकांश लोगों में श्रद्धालु होते हैं। उन्हें स्टेशन उतरते ही मंदिर जैसा आभास होगा। साथ ही सिंहस्थ-2028 में गुजरात, महाराष्ट्र से आने वाले यात्रियों के लिए फ्लैग स्टेशन मिल जाएगा।

बिन ट्रेन के स्टेशन- चिंतामण स्टेशन से 2014 में आखिरी ट्रेन गुजरी थी। तब स्टेशन का भवन पुराना था। यहां से उज्जैन-महू के साथ उज्जैन-अकोला और चित्तौड़गढ़ के लिए ट्रेन मिलती थी।

विक्रमनगर: बहुमंजिला स्टेशन तैयार, केवल एक ट्रेन रुक रही
ऐसी थी तैयारी-
उज्जैन-इंदौर रेल मार्ग पर मुख्य स्टेशन के बाद पहला स्टेशन विक्रमनगर है। सिंहस्थ 2016 में इसके सामने से इनर रिंग रोड बनाया था। तभी से इसे नया रूप देने की योजना बनाई थी। रेलवे अफसरों के अनुसार यहां स्टेशन का काम पूरा हो गया है। सबसे बड़ा काम स्टेशन बिल्डिंग बनाने का है। पहले यहां एक प्लेटफॉर्म था। अब दो बनाए हैं। इसके अलावा एफओबी भी बनकर तैयार है। स्टेशन पर टिकट बुकिंग के साथ यात्री और रेलवे अफसर विश्राम भी कर सकेंगे। रेलवे अफसरों के अनुसार यह उज्जैन-इंदौर दोहरीकरण का ही हिस्सा है। जिस पर 700 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

क्राउड कंट्रोल होगा- उज्जैन के अलावा विक्रमनगर से भी इंदौर रूट की ट्रेनों में यात्रा की जा सकेगी। हालांकि अब तक रेलवे ने यह तय नहीं किया है कि विक्रमनगर स्टेशन पर कितनी ट्रेन रुकेंगी। पूर्व में यहां पैसेंजर ट्रेन रुकती थी। ट्रेन की संख्या बढ़ने से मुख्य स्टेशन पर दबाव कम होगा।

बिन ट्रेन के स्टेशन- लॉकडाउन से पहले इंदौर-नागदा, इंदौर-बिलासपुर, इंदौर-उज्जैन, नागदा-इंदौर, बिलासपुर-इंदौर और उज्जैन-इंदौर ट्रेन गुजरती थी। अब इंदौर-बिलासपुर है, पर टिकट नहीं मिलता।

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