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अन्नदाता को फायदा:किसानों को सोयाबीन में 40, चने में 75 और गेहूं में 25 रुपए प्रति क्विंटल तक का फायदा

उज्जैन7 दिन पहले
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  • 50 पैसा मंडी शुल्क वरदान, बशर्ते किसान अपनी उपज मंडी में बेचें

50 पैसे प्रति सैकड़ा मंडी शुल्क कृषि मंडियों के लिए वरदान हो सकता है, बशर्ते किसान अपनी उपज मंडी में बेचें। इसके लिए मंडियों में भी बदलाव करना होगा। मॉडल एक्ट के बाद प्रदेश की 260 मंडियों का अस्तित्व खतरे में आ गया है।

अब मंडियों में धन खर्च की जरूरत नहीं और संभागीय आंचलिक कार्यालय की अनिवार्यता नहीं रह जाएगी। एक्ट में मंडी प्रांगण की जरूरत नहीं, खरीदार अपनी निजी मंडी स्थापित कर उपज खरीद सकेगा। मंडी समितियों के कर्मचारियों का मंडी बोर्ड में संविलियन होने पर अब वेतन मंडी बोर्ड से ही मिलेगा।

500 करोड़ रुपए वेतन भत्ते-पेंशन पर एक साल में खर्च होते हैं। 50 पैसे में 400 करोड़ रुपए की आय संभावित बताई जाती है। आय बढ़ाने के लिए किसानों को अधिक संख्या में मंडी में लाना पड़ेगा। 50 पैसे शुल्क से यूआरडी (बगैर बिल का व्यापार) रुक जाएगा।

5 साल में 300-351 लाख टन कृषि उपज की आवक मंडियों में होती है, जबकि सभी प्रकार की कृषि उपज की आवक 850 लाख टन की होती है। पहले मंडी के बाहर उपज बिकती थी तो जांच होती थी। बगैर मंडी शुल्क मिलने पर पांच गुना पेनल्टी वसूली जाती थी।

मॉडल एक्ट में अब प्रतिबंध नहीं हाेने से सर्वाधिक आवक मंडी में होगी तो यह आय दोगुना हो जाएगी। किसान मंडी में ही उपज बेचेंगे। व्यापारी मंडी में ही व्यापार करेंगे तो यह संभव है। मप्र में 1.70 रुपए मंडी शुल्क लगता था। इसे घटाकर 50 पैसे कर दिया है।

अनाज तिलहन व्यवसायी संघ के संचालक हजारीलाल मालवीय ने बताया मंडी शुल्क कम हाेने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और 1 रुपए 70 पैसे मंडी शुल्क जो व्यापारी खर्च में जोड़ता था, वह अब 50 पैसे जोड़ेगा। इससे किसानों को सोयाबीन में 40, चने में 75 और गेहूं में 25 रुपए प्रति क्विंटल का फायदा होगा।

उन्हेल क्षेत्र के किसान करणसिंह पटेल ने बताया कि किसान को जहां भाव ज्यादा मिलेंगे वहां उपज बेचेंगे। अभी माॅडल एक्ट लागू हुआ है। किसान फिलहाल तो मंडी में ही उपज बेच रहे हैं। यहां भुगतान की गारंटी है। कृषि विपणन विशेषज्ञ चंद्रशेखर वशिष्ठ ने चर्चा में बताया 50 पैसे प्रति सैंकड़ा मंडी शुल्क से आय बढ़ेगी, इससे मंडी में व्यापार बढ़ सकता है।

50 पैसे प्रति सैकड़ा में मंडी यह देती है सुविधा

  • मंडी में उपज बेचने पर भुगतान की गारंटी, हाथोंहाथ दो लाख रुपए तक नकद भुगतान।
  • सफाई, पानी, नमी मीटर, टाॅयलेट, शेड, पांच रुपए में भोजन कृषि उपज बेचने वाले किसानों के लिए तय है।
  • नीलामी में एक से अधिक व्यापारियों द्वारा बोली लगाकर किसान को प्रतिस्पर्धी भाव भी मिलते हैं। किसान को नीलामी के भाव नहीं जमे तो वह उपज कैंसिल करवा सकते हैं।
  • मॉडल एक्ट की बाहरी मंडियों में प्रांगण का अभाव, शुद्ध पानी, कैंटिन का अभाव, उपज का नकद भुगतान नहीं, आरटीजीएस से भुगतान होगा। प्राइवेट मंडियों में अभी तक इस प्रकार की व्यवस्था का अभाव देखा है।

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