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  • For The First Time In Three Years, Beti Topper, Shriya City Topper, Bringing 98.8%, 97.56% Children From 16 Schools Pass

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12वीं सीबीएसई : 5 साल में पहली बार:तीन साल में पहली बार बेटी अव्वल, 98.8% लाने वाली श्रीया शहर की टॉपर, 16 स्कूलों के 97.56% बच्चे पास

उज्जैन10 महीने पहले
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सीबीएसई द्वारा सोमवार को घोषित किए गए 12वीं के रिजल्ट में तीन साल में पहली बार किसी छात्रा को शहर में सबसे अधिक अंक मिले। 98.8% अंक पाने वाली साइंस की छात्रा श्रीया मोघे शहर में टॉप पर रही। लगातार दूसरे वर्ष गणित-विज्ञान के विद्यार्थी कॉमर्स के विद्यार्थियों को पीछे छोड़ते हुए शहर में अव्वल रहे। चार साल में पहली बार किसी विद्यार्थी ने 98 प्रतिशत या इससे अधिक अंक हासिल करते हुए शहर में पहला स्थान पाया। कॉमर्स में 98.2 प्रतिशत के साथ धीरज जैन, ह्यूमिनिटी (आर्ट) में 97 प्रतिशत के साथ सुहानी जैन आैर  बायोलॉजी में 94.4 प्रतिशत के साथ अनुकृति भटनागर अपने-अपने संकायों में शहर में टॉप रहे। शहर के 16 प्रमुख स्कूलों के विद्यार्थियों का आैसत रिजल्ट 97.56 प्रतिशत रहा। पांच साल में पहली बार आैसत रिजल्ट का आंकड़ा 97 प्रतिशत के पार हुआ है। लॉकडाउन की वजह से विद्यार्थियों की बिजनेस स्टडी आैर इंफॉर्मेशन प्रेक्टिसेस विषय की परीक्षा नहीं हो सकी। इन विषयों में प्री-बोर्ड आैर इंटरनल एग्जाम में मिले अंकों के आधार पर एवरेज मार्किंग हुई। पिछले साल की तुलना में रिजल्ट 0.75 प्रतिशत अधिक रहा। सीबीएसई  स्कूल के प्राचार्य आरयू खान ने बताया कॉमर्स विषय के विद्यार्थियों को बिजनेस स्टडी व इंफॉर्मेशन प्रेक्टिसेस जैसे दो विषय में एवरेज मार्किंग का फायदा मिला। वहीं पीसीएम के विद्यार्थियों को आईपी में एवरेज मार्किंग का लाभ मिला, जिससे रिजल्ट में सुधार आया।

कठिन टॉपिक का हर सप्ताह रिवीजन कर बनी टॉपर
वि द्यापति नगर में रहने वाली सेंटमेरी स्कूल की छात्रा श्रीया मोघे को शहर में सबसे अधिक 98.8 प्रतिशत अंक मिले। मैथ्स-साइंस विषय की छात्रा श्रीया को गणित, आईपी आैर फिजिक्स विषय में 100 में से 100 अंक मिले। वहीं इंग्लिश में 95 आैर केमेस्ट्री में 99 अंक मिले। कुल 500 में से 494 अंक हासिल करने वाली श्रीया ने बताया कि स्कूल व कोचिंग के अलावा नियमित 3 से 4 घंटे की पढ़ाई वह रोज करती थी। जो टॉपिक कठिन लगते थे आैर याद नहीं होते थे, उनका हर सप्ताह रिवीजन करती थी। श्रीया ने कक्षा 10वीं में भी 98 प्रतिशत अंकों के साथ शहर में टॉप किया था। वह आईआईटी से पढ़ाई कर सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहती है। उनके पिता समीर व मां प्रशिता, दोनों शिक्षक हैं।

97 प्रतिशत अंक लाकर बनी फैकल्टी टॉपर मु सद्दीपुरा में रहने वाली अक्षत इंटरनेशनल स्कूल की छात्रा सुहानी जैन ह्यूमिनिटी (आर्ट) संकाय में शहर की टॉपर रही। सुहानी को पॉलीटिकिल साइंस में 99, इंग्लिश में 95, साइकोलॉजी में 99, इकॉनोमिक्स में 95 आैर हिस्ट्री में 97 अंक मिले। कुल 500 में से 485 अंक मिले आैर आैसत रिजल्ट 97 प्रतिशत रहा। उनके पिता अजीत बिजनेसमैन हैं आैर मां डॉ. अपर्णा जैन शासकीय कॉलेज में प्रोफेसर हैं। सुहानी के बारे में खास बात यह है कि उनके सभी विषयों की परीक्षा हो चुकी थी। इसलिए किसी भी विषय में उन्हें एवरेज नहीं, बल्कि वास्तविक मार्किंग मिली। सुहानी ने बताया वह आगे जाकर आईएएस बनना चाहती है। यूपीएससी की तैयारी करने के लिए ही कला संकाय को चुना था आैर इसी संकाय में उन्हें शहर में सबसे अधिक अंक मिले।

अंगुलियों में बेंडेज बांध दी परीक्षा, कॉमर्स में सबसे ज्यादा अंक
सु भाष नगर में रहने वाले सेंटपॉल स्कूल के छात्र धीरज जैन कॉमर्स संकाय में शहर के टॉपर बने। धीरज को  इकॉनोमिक्स में 100, इंग्लिश में 95, बिजनेस स्टडी में 99, एकाउंटेंसी में 98 आैर आईपी में 99 अंक मिले। कुल 500 में से 491 अंक मिले आैर आैसत रिजल्ट 98.2 प्रतिशत रहा। शहर में भी उन्होंने टॉप सेकंड रैंक पाई। धीरज ने इस सफलता का श्रेय अपनी मां दीप्ति जैन को दिया, जो एलआईसी में सहायक के पद पर कार्यरत हैं। धीरज ने बताया परीक्षा के दिनों में उनकी अंगुलियों में गठान पड़ गई थी। जिसके कारण बेंडेज बांधकर उन्हें परीक्षा देना पड़ी थी। कॉक्सीहाइमिया बीमारी के कारण वह लगातार लकड़ी की कुर्सी पर भी नहीं बैठ पाता। इसलिए परीक्षा में भी विशेष अनुमति के बाद तकिये लगाकर बैठना पड़ा। धीरज आगे चार्टर्ड एकाउंटेंट बनना चाहते हैं।

नियमित अभ्यास से बायोलॉजी में मिले सबसे अधिक अंक
सं त नगर में रहने वाली सेंटमेरी स्कूल की छात्रा अनुकृति भटनागर ने बायोलॉजी में शहर में सबसे अधिक 500 में से 472 अंक हासिल किए। उन्हें तीन विषयों में 95 आैर एक-एक विषय में 94 व 93 अंक मिले। आैसत रिजल्ट 94.4 प्रतिशत रहा। आईपी विषय का उनका एक पेपर नहीं हो सका था, जिसमें उन्हें एवरेज मार्किंग मिली। हालांकि अनुकृति का कहना है कि अगर यह पेपर भी होता तो भी रिजल्ट पर कोई खास असर नहीं पड़ता। अब वह एमबीबीएस की पढ़ाई कर डॉक्टर बनना चाहती हैं। उनके पिता राहुल भटनागर एलआईसी उज्जैन ब्रांच में मैनेजर हैं आैर मां सोनिका प्ले स्कूल संचालिका हैं। अनुकृति ने बताया नियमित 7 से 8 घंटे वह पढ़ाई करती थी। 80 वर्षीय दादा रिटायर्ड बैंक अधिकारी महेंद्र किशोर उन्हें नियमित अभ्यास के लिए प्रेरित करते रहे।

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