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भविष्य में कॅरियर!:छात्राएं ज्योतिषी, हस्तरेखा विशेषज्ञ बन कॅरियर बनाना चाहती हैं, इसलिए संस्कृत के साथ ज्योतिर्विज्ञान में प्रवेश में छात्रों से आगे

उज्जैन5 दिन पहलेलेखक: राजेश पांचाल
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छात्राएं ज्योतिषी बनकर कॅरियर बनाना चाहती हैं। - Dainik Bhaskar
छात्राएं ज्योतिषी बनकर कॅरियर बनाना चाहती हैं।
  • विक्रम विवि के संस्कृत, ज्योतिर्विज्ञान व वेद अध्ययनशाला में 120 सीटों के लिए 76 ने करवाया पंजीयन

छात्राएं ज्योतिषी बनकर कॅरियर बनाना चाहती हैं। वे कर्मकांड में निष्णात होना चाहती हैं। नई शिक्षा नीति ने भी उनके आत्मनिर्भर बनने का रास्ता खोल दिया है। यही कारण है कि संस्कृत के साथ ज्योतिर्विज्ञान कोर्स में प्रवेश के लिए छात्राओं ने ज्यादा संख्या में पंजीयन करवाया है।

इन्होंने फीस भी जमा करवा दी है। विक्रम विश्वविद्यालय की संस्कृत, ज्योतिर्विज्ञान और वेद अध्ययनशाला में प्रवेश प्रक्रिया जारी है। विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश्वर शास्त्री मुसलगांवकर ने बताया तीन कोर्स (संस्कृत-40, ज्योतिर्विज्ञान-40, वैदिक अध्यन-40) में 120 सीट हैं। संस्कृत और ज्योतिर्विज्ञान में 76 पंजीयन हुए हैं। जिनमें से 42 विद्यार्थियों ने फीस भी जमा करवा दी है। खास यह है कि इनमें 22 छात्राएं हैं जबकि छात्रों की संख्या 20 है। उनका कहना है कि पूछताछ के लिए रोज बड़ी संख्या में जो फोन आ रहे हैं, उनमें भी छात्राओं की संख्या ज्यादा रहती है। वे कोर्स के साथ भविष्य में उसकी उपयोगिता के बारे में जानना चाहती हैं। वे कर्मकांड, ज्योतिष, वास्तुशास्त्र में कॅरियर बनाना चाहती हैं। अध्ययनशाला में प्रवेश की आखिरी तारीख 14 सितंबर है। हालांकि इसे आगे बढ़ाए जाने की उम्मीद भी है।

विषय, जो केवल यहां पढ़ाए जाते हैं

  • ज्योतिर्विज्ञान : चिकित्सा ज्योतिष, नाड़ी ज्योतिष, जैमिनि ज्योतिष
  • संस्कृत : विज्ञान से जोड़कर दर्शन, वेदों के अध्ययन के पाठ्यक्रम
  • वैदिक अध्ययन : परंपरागत पद्धति के साथ अर्थों के अनुसंधानपरक पाठ्यक्रम।
  • 5 शिक्षक, 5 धर्मगुरु जाे अध्ययनशाला ने दिए : विवि की इस अध्ययनशाला ने 5 शिक्षक, जो शासकीय महाविद्यालय में पदस्थ हैं और 5 धर्मगुरु, जो भारतीय सेना में पदस्थ हैं।

छात्राओं का इन विषयों में इसलिए बढ़ रहा रुझान

  • 1 रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम : विवि की संस्कृत, ज्योतिर्विज्ञान एवं वेद अध्ययनशाला रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों के लिए देश में पहचानी जाती है।
  • 2 बराबरी का भाव : छात्राओं का आकर्षण बढ़ने का कारण समाज में पुरुषों के बराबर परंपरागत विषयों में दबदबा कायम करना।
  • 3 सेना में एंट्री : सेना में धर्मगुरुओं की आवश्यकता है, इससे इन विषयों में छात्रों के रुझान में बढ़ोतरी हुई है।
  • 4 सिविल सेवा में सर्वाधिक अंक : देश की सबसे कठिन परीक्षा में संस्कृत और ज्योतिष, वेद सर्वाधिक अंक प्रदान करने वाले विषय हैं।
  • 5 अध्यापन के अवसर : राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कक्षा 5वीं से 11वीं तक संस्कृत की अनिवार्यता है। इसे पढ़ाने के लिए शिक्षकों की जरूरत होगी।
  • (जैसा संस्कृत, ज्योतिर्विज्ञान एवं वेद अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश्वर शास्त्री ने बताया)
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