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अब डेंगू से लड़ाई की तैयारी:डेंगू से बचाने आगे आई सरकार, पर बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे पैरेंट्स

उज्जैन5 दिन पहले
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डेंगू के रथ को जिस समझाइश के साथ रवाना कर रहे थे, उसी का उल्लंघन मंत्री-अफसरों के सामने हो रहा था। बृहस्पति भवन के ठीक बाहर थोड़ी बारिश में पानी भर जाता है। हरी झंडी दिखाने के पहले इसे साफ भी नहीं किया गया। इस मामले में निगमायुक्त अंशुल गुप्ता कुछ भी बोलने से बचते नजर आए। चित्र में मंत्री मोहन यादव, कलेक्टर आशीषसिंह, निगमायुक्त अंशुल गुप्ता, सीएमएचओ डॉ. संजय शर्मा भी नजर आ रहे हैं। - Dainik Bhaskar
डेंगू के रथ को जिस समझाइश के साथ रवाना कर रहे थे, उसी का उल्लंघन मंत्री-अफसरों के सामने हो रहा था। बृहस्पति भवन के ठीक बाहर थोड़ी बारिश में पानी भर जाता है। हरी झंडी दिखाने के पहले इसे साफ भी नहीं किया गया। इस मामले में निगमायुक्त अंशुल गुप्ता कुछ भी बोलने से बचते नजर आए। चित्र में मंत्री मोहन यादव, कलेक्टर आशीषसिंह, निगमायुक्त अंशुल गुप्ता, सीएमएचओ डॉ. संजय शर्मा भी नजर आ रहे हैं।

बुधवार को बृहस्पति भवन से डेंगू पर प्रहार कार्यक्रम के तहत प्रचार वाहनों को रवाना किया गया। इन्हें उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव, विधायक पारस जैन, कलेक्टर आशीष सिंह, भाजपा ग्रामीण जिला अध्यक्ष बहादुर सिंह बोर मुंडला ने हरी झंडी दिखाई।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय शर्मा ने बताया बारिश के बाद नियमित साफ सफाई न होने से मच्छर पनपने लगते हैं। इस कारण अगस्त से अक्टूबर तक डेंगू, मलेरिया, वायरल जैसी बीमारियों का प्रकोप ज्यादा रहता है। अभी उज्जैन में करीब डेंगू के करीब 60 केस आए हैं। इनमें से अधिकांश ठीक हो चुके हैं। डेंगू पर जागरुकता के लिए 15 सितंबर से कई कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ अंकिता धाकरे, निगमायुक्त अंशुल गुप्ता, सीएमएचओ डॉ. संजय शर्मा व जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एसके अखंड मौजूद थे।

स्कूल भेजने को लेकर संशय में पैरेंट‌्स -
मलेरिया व वायरल बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है। वायरल एक से दूसरे बच्चों में आसानी से फैलता है। ऐसे में 20 सितंबर से शुरू हो रहे 1 से 5वीं तक के बच्चों के स्कूल को लेकर पैरेंट्स चिंता में हैं। हालांकि अधिकांश पैरेंट्स का मानना है कि वे अभी अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। जिले के सबसे बड़े सरकारी चरक अस्पताल में क्षमता से ज्यादा बच्चों का उपचार किया जा रहा है। यही हाल निजी अस्पतालों के भी हैं।

कम पड़ने लगा ब्लड -
कोविड वैक्सीनेशन के चलते ब्लड डोनर की संख्या में कमी आ रही है। इसके चलते डेंगू पीड़ितों को अपने स्तर पर ही ब्लड यूनिट का इंतजाम करना पड़ रहा है। शहर में जिला अस्पताल, आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज, पुष्पा मिशन हॉस्पिटल से ही ब्लड यूनिट उपलब्ध हो पाता है। यहां भी अभी जिस ग्रुप के ब्लड की जरुरत होती है वह उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसे में मरीज के परिजनों को ही ब्लड यूनिट का इंतजाम करना होता है।

दरअसल डेंगू के दौरान मरीज के प्लेटलेट काउंट होकर 20 से 25 हजार तक आ रहे हैं। इसलिए उन्हें प्लेटलेट की आवश्यकता होती है। इन ब्लड बैंक में पहले की तुलना में पचास फीसदी भी ब्लड यूनिट उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. केसी परमार ने कहा कोरोना वैक्सीन लगने के 3 माह तक ब्लड नहीं देने की गाइडलाइन है। इस दौरान कोरोना की एंटीबॉडी बनती है। इसके चलते कई लोग चाहते हुए भी ब्लड डोनेट नहीं कर पा रहे हैं।

ये लक्षण हैं तो समझें डेंगू-मलेरिया हो सकता है -
ठंड देकर बुखार आना, पसीना देकर बुखार उतरना, कंपकपी आना, जी मिचलाना, सिर दर्द, उल्टी होना, पसीना आकर बुखार उतरना बुखार उतरने के बाद थकावट व कमजोरी होना भी मलेरिया व डेंगू के लक्षण है। बुखार आने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। मलेरिया की पृष्टि होने का पूरा उपचार लें। खाली पेट दवा कदापि न लें। डेंगू व मलेरिया की जांच सरकार द्वारा अधिकृत पैथोलॉजी लैब में ही कराएं।

यहां की सफाई तुरंत करें -
छत पर रखी पानी की खुली टंकियां। टूटे बर्तन, मटके, कुल्हड, गमलों का पानी, बेकार फेकें हुए टायरों में इकट्‌ठा हुआ पानी, बिना ढंके बर्तनों में जमा पानी, कूलर में लंबे समय से रखा पानी, किचन गार्डन का रूका पानी, फूलदान, सजावट के लिए बने फाउंटेन आदि के पानी यदि लंबे समय से भरा है तो उसे तुरंत साफ करें। घर के आस-पास के गढ्डों को भर दें।

क्या करें -
- सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें।
- पानी से भरे रहने वाले स्थानों पर टीमोफॉस, मिट्टी का तेल या जला हुआ इंजन ऑइल डालें।
- घर एवं आर-पास अनुपयोगी सामग्री में पानी जमा न होने दें।
- सप्ताह में एक बार अपने टीन, डिब्बा, बाल्टी इत्यादि का पानी खाली कर दें। दोबारा उपयोग होने पर उन्हें अच्छी तरह सुखायें।

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