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  • If There Is No FIR Against MLA's Son Karan Morwal In 2 Days, Then I Will Commit Suicide Outside CM House.

रेप पीड़िता ने दी सुसाइड की धमकी:बोली- 2 दिन में MLA के बेटे करण मोरवाल पर धोखाधड़ी की FIR नहीं हुई तो सीएम हाउस के बाहर सुसाइड करूंगी

उज्जैन4 महीने पहले
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रेप के आरोप में जमानत पर छूटे बड़नगर से कांग्रेस के विधायक के बेटे करण मोरवाल की मुश्किलें फिर बढ़ सकती हैं। रेप पीड़िता ने शुक्रवार को आरोप लगाया है कि करण मोरवाल को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमानत मिली है। करण पर धारा 420 के तहत केस दर्ज होना चाहिए। इसके रेप पीड़िता ने पुलिस को आवेदन दिया है। उसने कहा है कि यदि दो दिन में करण पर एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो वह सीएम हाउस के सामने जाकर सुसाइड कर लेगी।

जिले के बड़नगर तहसील से कांग्रेस विधायक मुरली मोरवाल के बेटे करण मोरवाल को रेप के मामले मे जमानत मिल चुकी है। अब पीड़िता का दावा है कि करण को जमानत बड़नगर के सिविल अस्पताल में दर्ज फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर मिली है। करीब 2 माह पहले सिविल अस्पताल के एक डॉक्टर व कर्मचारियों को फर्जी डॉक्यूमेंट मामले में कलेक्टर आशीष सिंह निलंबित कर चुके हैं।

रेप पीड़िता का कहना है कि जमानत के बाद से लगातार आवेदन दे रही हूं कि अस्पताल के रजिस्टर में फर्जी एंट्री हुई है। करण मोरवाल पर धारा 420 के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। उसे क्यों बचाया जा रहा है। हालांकि मामले में मंत्री डॉ. मोहन यादव, सांसद अनिल फिरोजिया, आईजी संतोष कुमार व कमिश्नर ने पीड़िता को आश्वासन दिया है, निष्पक्ष जांच की जाएगी।

कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि मामला करीब दो माह पुराना है। अस्पताल से नकली दस्तावेज बनाने की आशंका थी। मामले की जांच चल रही है। जल्द ही और बातें सामने आएंगी।

कांग्रेस विधायक का बेटा करण मोरवाल।
कांग्रेस विधायक का बेटा करण मोरवाल।

ये है मामला

विधायक के बेटे पर कांग्रेस कार्यालय में कामकाज संभालने वाली 23 साल की लड़की ने 2 अप्रैल 2021 को दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। युवती का आरोप है कि 14 फरवरी 2021 को करण उसे होटल में ले गया था। वहां उसने कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर युवती को पिलाया। इसके बाद वह उसे फ्लैट पर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया।

गिरफ्तार होने के बाद करण मोरवाल ने बताया था कि वह 13 से 15 फरवरी तक बड़नगर के सिविल अस्पताल में भर्ती था। इसी आधार पर उसे जमानत मिल गई थी। प्रशासन ने मामले में जांच की थी। प्रारंभिक जांच में सीसीटीवी व अन्य दस्तावेज खंगाले गए। इन दस्तावेजों के फर्जी होने की आशंका में कलेक्टर ने बड़नगर के डॉक्टर व कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था। मामले में 18 जनवरी को कोर्ट में सुनवाई होना है।

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