• Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Ujjain
  • Ignore; The River Is Widening, Trees Have Come In The Middle Of The River, Increasing Erosion In The Rain Threatens The Eco Park

शिप्रा के आंचल पर बुलडोजर, काट दिए किनारे:अनदेखी; नदी का पाट हो रहा चौड़ा, पेड़ नदी के बीच आ गए, बारिश में कटाव बढ़ने से ईको पार्क को खतरा

उज्जैन9 दिन पहलेलेखक: ओमप्रकाश सोणोवणे
  • कॉपी लिंक
त्रिवेणी ब्रिज के नीचे से ईको पार्क की तरफ नदी का पाट खुदाई करने वालों ने पूरा काट दिया है। इससे पाट चौड़ा हो गया। - Dainik Bhaskar
त्रिवेणी ब्रिज के नीचे से ईको पार्क की तरफ नदी का पाट खुदाई करने वालों ने पूरा काट दिया है। इससे पाट चौड़ा हो गया।
  • विशेषज्ञ बोले- यह धृष्टता नदी पर्यावरण को भारी नुकसान देगी

इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी पर शिप्रा की सुरम्यता को मिट्टी माफिया की नजर लग गई है। यहां ईको-पार्क साइड और वीआईपी घाट साइड पर शिप्रा के आंचल में माफिया के बुलडोजर चल रहे हैं। मिट्टी की खुदाई करने से दोनों किनारों पर नदी का पाट चौड़ा हो गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह धृष्टता नदी पर्यावरण के लिए गहरा खतरा है। अगली बारिश में ही यहां कटाव होने से न केवल ईको पार्क को खतरा हो गया है अपितु इसे नहीं रोका गया तो त्रिवेणी संगम और आसपास के लिए भी खतरा उत्पन्न हो जाएगा।

धर्म नगरी के प्राचीन तीर्थों में नवग्रह शनि मंदिर और त्रिवेणी संगम का भी विशेष स्थान है। नित्यप्रति ग्रह दोष निवारण, शनि व नवग्रह पूजन व दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का आगमन होता है। इसके अलावा यहां शनिश्चरी अमावस्या के स्नान पर्व पर मालवांचल, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात से श्रद्धालुओं आते हैं। सिंहस्थ में भी यहां श्रद्धालु स्नान करते हैं।

यहां का सुरम्य वातावरण पर्यटकों को भी आकर्षित करता है। इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किए जाने का भी प्रस्ताव है। बावजूद इस तीर्थ के किनारों पर मिट्टी की खुदाई की जा रही है। भास्कर ने मौके पर पहुंच कर शिप्रा के किनारों पर पोकलेन और जेसीबी, डंपरों से की जा रही भयावह खुदाई देखी और अफसरों को अवगत कराया। गौरतलब है कि इसके पहले शिप्रा और खान का दौरा करने आए जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त प्रमुख सचिव एसएन मिश्रा ने मिट्टी की खुदाई को देख कर अधिकारियों को ताकीद की थी कि किनारे पर मिट्टी की खुदाई तुरंत रोकें।

दो तरफ हो रही खुदाई से पाट फैल रहा

1 त्रिवेणी के मुख्य घाट के सामने नदी के पार का किनारा 20 फीट तक खोद दिया है। यहां से मिट्टी हटने के कारण नदी फैल गई है। जितनी दूर तक मिट्टी काटी गई है, उसके आगे खेत व कच्ची सड़क है। यहां बारिश में कटाव से सड़क धंस सकती है। यदि कटाव को नहीं रोका तो यहां का पाट और चौड़ा हो सकता है।

2 ईको पार्क साइड में नए ब्रिज के नीचे से ईको पार्क की तरफ खुदाई की जा रही है। 10 से 15 फीट गहराई में मिट्टी खोदी गई है। खुदाई करने वालों ने पिलर्स और पेड़ों के आसपास भी मिट्टी खोद दी। इससे पेड़ लटक गए हैं। पिलर के आसपास खुदाई करने से ब्रिज को भी नुकसान होने की आशंका उत्पन्न हो गई है।

खुदाई कौन कर रहा, किसी को नहीं पता

त्रिवेणी पर मिट्टी की खुदाई कौन कर रहा, यह किसी को नहीं पता। मौके पर केवल डंपर व मशीन चलाने वाले मिले, जो कोई जानकारी देने को तैयार नहीं थे। कलेक्टर आशीष सिंह को भास्कर ने जानकारी दी। उन्होंने कहा- कौन खुदाई कर रहा है, इसकी जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी।

नदी किनारे पर मिट्टी की खुदाई नहीं की जा सकती। यहां जल संसाधन विभाग द्वारा मिट्टी का डेम बनाया जा रहा है। जल संसाधन के ईई कमल कुवाल का कहना है कि विभाग द्वारा मिट्टी की खुदाई नहीं की जा रही। कौन मिट्टी खोद रहा है, यह उन्हें नहीं पता। डेम के लिए अन्य स्थान से मिट्टी लाई है।

नदी चौड़ी होगी तो बाढ़ का पानी फैलेगा

पर्यावरण विशेषज्ञ शुभा जैन का कहना है कि नदी के किनारों पर कभी खुदाई नहीं की जाती। इससे नटी का कटाव बढ़ता है। नदी का पाट चौड़ा होगा तो बाढ़ का पानी फैलेगा। आसपास के क्षेत्र के लिए खतरा उत्पन्न होगा। इससे नदी का पर्यावरण भी बिगड़ेगा। जल जीवों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

पर्यावरण सामाजिक कार्यकर्ता राजीव पाहवा के अनुसार कटाव रोकने के लिए शिप्रा किनारे 2019 से लगातार पौधारोपण किया जा रहा है। त्रिवेणी से लेकर कालियादेह महल तक पौधारोपण किया गया है। त्रिवेणी पर मिट्टी की खुदाई से किनारे के पेड़ों को भी नुकसान हो रहा है। इसकी रोकथाम जरूरी है।

खबरें और भी हैं...