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घातक होता डेंगू का डंक:कोरोना काल के 18 माह में लोगों की इम्युनिटी कमजोर, वायरस में भी बदलाव... इसलिए बढ़ रहे डेंगू के मरीज, आंकड़ा पहुंचा 490

उज्जैन12 दिन पहले
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मरीजों के प्लेटलेट 50 हजार से भी कम हो रहे, दूसरे वैरियंट से मरीजों को ज्यादा खतरा। - Dainik Bhaskar
मरीजों के प्लेटलेट 50 हजार से भी कम हो रहे, दूसरे वैरियंट से मरीजों को ज्यादा खतरा।

जिले में कोरोना काल के 18 माह में लोगों की इम्युनिटी कमजोर हुई है, जिसका असर डेंगू की बीमारी में मरीजों पर हो रहा है। वायरस में भी बदलाव हुआ है, मरीजों में शुरुआत में सामान्य लक्षण दिखते हैं और फिर गंभीर स्थिति बनने लगती है। मरीजों के प्लेटलेट्स भी तेजी से घट रहे हैं। यही वजह है कि उज्जैन में डेंगू के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं।

मरीजों में फ्लू जैसे लक्षण उभर रहे हैं। यहां दूसरे वैरिएंट के ज्यादा मरीज पाए जा रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है इस बार डेंगू अलग रूप में नजर आ रहा है। मरीजों में डेंगू के लक्षणों में भी लगातार परिवर्तन देखा जा रहा है। मरीजों में शुरुआती लक्षण सामान्य दिखाई देते हैं और फिर अचानक बेहद गंभीर स्थिति बनने लगती है।

चरक अस्पताल बिल्डिंग में संचालित सेंट्रल लैब में बुधवार को 32 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है, इसके साथ ही मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 490 हो गया है। मरीजों की केस स्टडी में चिकित्सकों ने इस बार कई मरीजों में दूसरा वैरिएंट पाया है। कुछ मरीजों में 50 हजार से कम प्लेटलेट्स हो रहे हैं। नए वैरिएंट के बारे में आईसीएमआर की जैनेटिक स्टडी में पता चल सकता है लेकिन लक्षण और मरीजों की स्थिति से दूसरे वैरिएंट का ज्यादा खतरा बना हुआ है।

ये हैं डेंगू के चार वैरिएंट

विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू के चार वैरिएंट हैं, जिनमें डेंगू-1, डेंगू-2, डेंगू-3 व डेंगू-4 वैरिएंट होते हैं। इनमें से दूसरा वैरिएंट ज्यादा खतरनाक है।

यह चार बदलाव देखे जा रहे

1 इस बार अलग लक्षणों के साथ बीमार कर रहा डेंगू। 2 वायरस में बदलाव के कारण पहचान करना मुश्किल। 3 सामान्य लक्षणों से हो रही बीमारी की शुरुआत। 4 सामान्य 103 व 104 डिग्री के बुखार से अलग है।

6 साल में पहली बार डेंगू का ऐसा प्रकोप

जिले में 6 साल में पहली बार डेंगू के मरीज 500 के करीब पहुंच गए। माधवनगर अस्पताल में डेंगू और वायरल फीवर के 95 मरीज भर्ती हैं और जिला अस्पताल के सभी 750 बेड भर गए हैं। सरकारी आंकड़े के अनुसार 2016 से 2020 तक पांच साल में वायरल के 800 मरीज पाए गए। इन सालों में डेंगू का सिर्फ एक ही मरीज मिला। इस वर्ष 490 मरीज मिल गए हैं।

विशेषज्ञ बोले- इस बार अलग रूप

कोरोना काल के 18 माह में लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम हुई है। इससे मरीजों में डेंगू का ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। बदलते मौसम में कभी गर्मी तो कभी ठंडक, ऐसे में लोगों में वायरल फीवर भी हो रहा है।
डॉ. पीएम कुमावत, वरिष्ठ चिकित्सक

इस बार डेंगू अलग रूप में नजर आ रहा है। मरीजों के लक्षणों में भी परिवर्तन देखा जा रहा है। शुरुआती लक्षण सामान्य दिखाई देते हैं और फिर अचानक बेहद गंभीर स्थिति बनने लगती है।
डॉ. एचपी सोनानिया, नोडल अधिकारी कोविड-19

वैरिएंट में हो रहे बदलाव के चलते जिन लोगों को एक बार डेंगू हो चुका है, उनके लिए दोबारा डेंगू ज्यादा खतरनाक है। नए वैरिएंट के बारे में आईसीएमआर की जैनेटिक स्टडी में पता चल सकता है लेकिन लक्षण और मरीजों की स्थिति से दूसरे वैरिएंट का ज्यादा खतरा बना हुआ है।
डॉ. रवि राठौर, शिशु रोग विशेषज्ञ

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