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  • In 2014 15, The Education Department Had Given The Facility To Build A Room In The School So That People Do Not Get Death Row, Use The Money Properly.

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भास्कर अभियान:शिक्षा विभाग ने 2014-15 में स्कूल में कक्ष बनाने की सुविधा दे दी थी ताकि लोग मृत्युभोज न कराएं, रुपए का सदुपयोग करें

उज्जैन10 महीने पहले
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  • भाजपा सांसद, मंत्री, विधायक मृत्युभोज को बंद करने के पक्षधर, कांग्रेस विधायक विस में उठाएंगे मुद्दा

पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री और वर्तमान उत्तर क्षेत्र विधायक पारस जैन ने बताया कि मृत्युभोज कराने की बजाए उक्त राशि का उपयोग सरकारी स्कूलों में भवन बनाने में हो सके, इसके लिए राज्य सरकार ने 2014 में आदेश जारी कर दिया था। आदेश के तहत आम लोगों को सरकारी स्कूल परिसर में स्वयं कक्ष बनाने की सुविधा दी गई थी। निर्माण कार्य वह स्वयं करा सकता है, सरकारी एजेंसी की भी जरूरत नहीं है।  जैन का कहना है कि जब में स्कूल शिक्षा मंत्री था तब सरकार की ओर से एक आदेश जारी कराया था। इसके तहत किसी भी व्यक्ति को सरकारी स्कूल परिसर में कक्ष बनाने की अनुमति दी गई थी। क्योंकि सरकारी प्रक्रिया से निर्माण कराना कठिन होता है, इसलिए निर्माण वह स्वयं करा सकता है। वह कम खर्च में अच्छा निर्माण करा सकता है। मृत्युभोज जैसी कुप्रथा सभी समाजों से समाप्त हो जाए, इस पक्ष में भाजपा के सांसद, मंत्री और विधायक भी है। उनका कहना है कि यह पहल समाज के स्तर पर होगी तो जल्दी असर होगा। सरकार के स्तर पर कानून बनाने पर भी मंथन किया जाएगा। कांग्रेस के विधायक मृत्युभोज पर रोक के लिए विधानसभा के अगले सत्र में मुद्दा उठाने की बात कह रहे हैं। 

कुप्रथा रोकने के लिए समाज पहल करें 
सांसद अनिल फिरोजिया कहते हैं कि मृत्युभोज सामाजिक मुद्दा है। इसमें सरकार क्या कर सकती है, इस पर विचार करेंगे। मैं स्वयं इसके विरोध में हूं। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव का कहना है कि इस सामाजिक कुप्रथा को रोकने के लिए समाज में जागरुकता के लिए हरदम प्रयास किए हैं। व्यक्तिगत रूप से हमेशा इसका विरोध किया है। 

1993 से चला रहे अभियान, अब कानून की बात करेंगे
नागदा के कांग्रेस विधायक दिलीप सिंह गुर्जर का कहना है 1993 से मैं मृत्युभोज के खिलाफ अभियान चला रहा हूं। जहां भी सामाजिक कार्यक्रम में जाता हूं वहां यही संदेश देता हूं कि इस प्रथा को बंद किया जाए। कई लोगों ने मृत्युभोज की बजाए सामाजिक कार्य में राशि खर्च करने का उदाहरण भी रखा है। विधानसभा में इस मुद्दे को उठाकर मांग की जाएगी। तराना के विधायक महेश परमार कहते हैं मृत्युभोज के लिए कर्ज लेना ग्रामीण क्षेत्र में विभीषिका की तरह फैला मकड़जाल है। आज भी लोग मजबूरी में कर्ज लेकर भी मृत्युभोज जैसे आयोजन करते हैं। सामाजिक स्तर पर प्रयास किए हैं। जहां तक कानून बनाने की बात है तो विधानसभा में मांग की जाएगी। बड़नगर विधायक मुरली मोरवाल कहते हैं समाज के स्तर पर और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी हमेशा मृत्युभोज बंद करने के लिए प्रेरित किया है। 

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