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  • In Five Years, There Was No Research And No Posts Were Filled, The Placement Cell Is Also Backward, If Assessed At Present, Our University May Not Even Get A grade.

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यहां कुछ भी नैक जैसा नहीं:पांच साल में न शोध हुए और न पद भरे, प्लेसमेंट सेल भी पिछड़ी, अभी मूल्यांकन हो तो हमारी यूनिवर्सिटी को तो ए-ग्रेड भी न मिले

उज्जैन11 दिन पहले
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विवि का वाग्देवी भवन का रखरखाव नहीं होने से प्लास्टर निकलकर सरिए दिखने लगे हैं। - Dainik Bhaskar
विवि का वाग्देवी भवन का रखरखाव नहीं होने से प्लास्टर निकलकर सरिए दिखने लगे हैं।
  • इससे पहले नवंबर 2015 में हुआ था मूल्यांकन, अब कागजी कार्रवाई व बैठक का दौर जारी

विक्रम विश्वविद्यालय का नैक मूल्यांकन नवंबर या दिसंबर 2020 तक हो जाना था। कोरोना के कारण ऐसा नहीं हो सका। अब कोरोना के दूसरे दौर में भी इसे लेकर संशय की स्थिति बन रही है। 16 नवंबर 2015 को नैक मूल्यांकन से विश्वविद्यालय को पांच साल के लिए ए-ग्रेड मिली थी। इसके बाद नैक मूल्यांकन होना था। विश्वविद्यालय को भले ही समय मिल गया हो लेकिन उसकी स्थिति में अब भी सुधार नहीं आया है। हालात यह हैं कि नैक की टीम अप्रैल या मई में भी मूल्यांकन करे तो विश्वविद्यालय को ए-ग्रेड बचाने की चुनौती होगी। पांच साल में विश्वविद्यालय के विभागों में शोध कार्य ही नहीं हुए हैं। स्थायी प्राध्यापकों के पद भी खाली हैं।

कुलपति का कहना है कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से मूल्यांकन कराने के लिए विक्रम विश्वविद्यालय में तैयारियां जारी हैं। नैक को पत्र भेज दिया है। सभी सात मापदंडों पर खरा उतरने के लिए समितियों की बैठक भी हो चुकी है। पांच साल में राजभवन को प्रस्तुत कार्य योजना अनुरूप विश्वविद्यालय ने न प्रोफेसरों के खाली पद भरे हैं न शोध के लिए कोई योजना बनाई हालांकि गाइड की संख्या में बढ़ोतरी की है। वाई-फाई बेस्ड परिसर, सीसीटीवी कैमरे, सोलर प्लांट, स्मार्ट क्लास रूम और डिजिटल लाइब्रेरी के प्रस्ताव भी कागजों से धरातल पर नहीं उतर पाए हैं। परीक्षा परिणाम सुधारने और प्लेसमेंट सुविधा देने में भी विश्वविद्यालय पिछड़ा है। जिम्मेदारों का कहना है कि प्लेसमेंट सेल का मजबूत बनाने का काम किया जा रहा है। इसके लिए सभी विभागों से डेटा मंगवाया है।

लेक्चरर, उपाचार्य, आचार्य के पद खाली, अतिथियों के भरोसे
विक्रम विवि में लेक्चरर के 67, उपाचार्य के 30 और आचार्य के 2 पद खाली हैं। 13 वर्ष से नई नियुक्ति नहीं हो पाई है। दो साल में पूर्व कुलपति प्रो. बालकृष्ण शर्मा सहित कई प्रोफेसर सेवानिवृत्त हो जाएंगे। ऐसे में नए स्थायी प्रोफेसरों की नियुक्ति न होने से अकादमिक गुणवत्ता प्रभावित होने के आसार हैं। विश्वविद्यालय कुछ वर्षों से अतिथि विद्वानों से अध्यापन करवा रहा है। विश्वविद्यालय का स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग विभाग तो पूरी तरह अतिथि विद्वानों के भरोसे संचालित हो रहा है। कई प्रोफेसर और रीडर के पास दो-दो विभागों के अध्यक्ष का दायित्व है।

इसलिए होता है मूल्यांकन
एनएएसी की स्थापना संस्थानों को स्पष्ट-स्थिर मानदंडों के आधार पर अंतर्निरीक्षण और संस्थान की सहभागिता की प्रक्रिया के माध्यम से उसे अपने कामकाज के मूल्यांकन में सेवाएं प्रदान करने के लिए हुआ है।
मूल्यांकन के लिए 7 मापदंड

  • पाठ्यक्रम के पहलू
  • अध्ययन-अध्यापन व मूल्यांकन
  • शोध, नवोन्मेष तथा विस्तार
  • मूलभूत सुविधाएं और अध्ययन के संसाधन
  • छात्र सहयोग व विकास
  • संचालन, नेतृत्व व प्रबंधन
  • संस्थानिक मूल्य और सर्वश्रेष्ठ परंपराएं

स्थायी प्राध्यापकों की नियुक्ति करेंगे, परिसर वाई-फाई बेस्ड
^हमारा प्रयास है कि विक्रम विश्वविद्यालय को ए+नहीं, ए++ ग्रेड मिले। रोजगार और स्वरोजगार परक नए सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स शुरू करेंगे। पूरे परिसर को वाई-फाई बेस्ड, सोलर लाइट से रोशन करने की योजना है। रिसर्च सेंटर, स्मार्ट क्लास रूम बढ़ाने की दिशा में भी काम करवा रहे हैं। खाली पदों पर स्थायी प्राध्यापकों की नियुक्ति और रिसर्च गाइड की संख्या बढ़ाने के लिए विभागीय प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
-प्रो. अखिलेश पांडेय, कुलपति विक्रम विश्वविद्यालय

विवि का दायरा- परीक्षा परिणाम सुधारने और प्लेसमेंट सुविधा देने में भी विक्रम विश्वविद्यालय पिछड़ा है। विक्रम विश्वविद्यालय का दायरा 188 कॉलेज और 29 अध्ययनशालाओं तक फैला है। इसके बावजूद विद्यार्थियों को रोजगार मिल रहा है न उनकी स्वरोजगार की राह आसान हो रही है। ऐसे में उन्हें खुद ही काम की तलाश करना पड़ रही है।

मंत्री का दावा -उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. मोहन यादव ने पिछले दिनों भोपाल में घोषणा की थी कि उज्जैन सहित सात संभागों के 18666 विद्यार्थियों को रोजगार मिलेगा। उन्हें ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा। 6 घंटे फील्ड विजिट करवाएंगे। 4 घंटे का ऑनलाइन टेस्ट भी लिया जाएगा। उनका कहना था कि भोपाल-नर्मदापुरम, ग्वालियर-चंबल, इंदौर, सागर, रीवा, जबलपुर के साथ उज्जैन के 18666 विद्यार्थी पहली बार एक साथ ऑनलाइन प्रशिक्षण लेंगे। इसके बावजूद हालात में सुधार नहीं आया।

कुलपति का वादा- विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार पांड्ेय ने एक कार्यक्रम में कहा था कंप्यूटर विज्ञान संस्थान में 10 विभिन्न प्रकोष्ठ की स्थापना की है। इनमें आंत्रप्रेन्योरशिप सेल, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल, आईपीआर सेल, रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल, आईटी सेल, इंडस्ट्री व इंस्टीट्यूट लिंकेज, एलुमनी सेल, ऑनलाइन सेल सेल आदि शामिल हैं। इससे स्वरोजगार में मदद मिलेगी।

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