नि:शक्तों की सेवा में समर्पित:अंधेरी जिंदगी में रोशनी की काेशिश, नि:शक्त बच्चों को जीने का सलीका सीखा रही डॉ. नैना

उज्जैन9 महीने पहले
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  • लॉकडाउन में भी नहीं थमा, नागदा में हैं स्नेह संस्था की निदेशक

जीवन के 13 साल नि:शक्तों की सेवा में समर्पित कर चुकी हैं डॉ.नैना किश्चियन मचार। मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट व काउंसलिंग में एमएससी है। कई बड़े हाॅस्पिटल के बेहतर जॉब ऑफर दरकिनार कर नागदा जैसे छोटे शहर में वो 150 मानसिक, शारीरिक विकारों से जूझ रहे बहुदिव्यांगों की सेवा में जुटी हैं।

नागदा में संस्था स्नेह की निदेशक वर्ष 2009 से यहां कार्यरत है। डॉ. नैना का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों में आत्मनिर्भरता व सामाजिक संस्कारों का गुण विकसित करना है। संस्था स्नेह में 150 ऐसे बच्चे और बड़े है। डॉ.नैना उन्हें समाज की मुख्यधारा के साथ जीने का हूनर सीखा रही है। संस्थापक पंकज मारू के अनुसार डॉ.नैना की मेहनत और समर्पण का परिणाम है कि देश स्तर पर स्नेह की ख्याति है। संस्था राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित हो चुकी है।

डॉ. नैना बताती हैं कि संस्था स्नेह में मंद बुद्धि , ऑटिज्म, सेरेब्रल पॉल्सी, एपेलिप्सी, एडीएचडी, डिले डेवलपमेंट व विभिन्न लकवा व आर्थोपेडिक बीमारियों से ग्रस्त 150 दिव्यांग है। इनमें अधिकांश बच्चे हैं। एपेलिप्सी व सेरेग्रल पॉल्सी रोग से पीड़ित को पड़ने वाले दोरों के दौरान संभालना मुश्किल होता है। इनका एक ही उपचार है। धैर्य व प्रेम के साथ इनके साथ समय बिताया जाएं। इन्हें ये महसुस कराया जाएं कि वो भी औरों की तरह सामान्य है।

इन्हें दया नहीं, भरोसे की जरुरत है। संस्था से उपचार के बाद ट्रेनिंग लेकर 13 नि:शक्त अब ऐसे बच्चों की सेवा कर आजीविका भी कमा रहे है। डॉ. नैना ऐसे बच्चों की काउंसलिग कर उन्हें अहसास कराती है वे किसी से कमतर नहीं है। जिसका परिणाम है कि संस्था में विभिन्न उत्पाद बनाने में बहुदिव्यांग सहयोग करते है। इन उत्पादों की बिक्री से होने वाली कमाई इन्हीं की बेहतरी में खर्च की जाती है।

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