सीएम शिवराजसिंह का आना टला:कनार्टक के राज्यपाल थावरचंद गेहलोत करेंगे उज्जैन में साइंस सिटी का भूमिपूजन

उज्जैन2 महीने पहले
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राज्यपाल थावरचंद गेहलोत - Dainik Bhaskar
राज्यपाल थावरचंद गेहलोत

उज्जैन में साइंस सिटी की आधारशिला रखने कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गेहलोत आएंगे। गुरुवार को तारामंडल में होने वाले इस आयोजन में पहले मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान शामिल होने वाले थे। लेकिन दिल्ली दौरा होने के कारण वे इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकेंगे।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि साइंस सिटी के भूमिपूजन का कार्यक्रम पूर्ववत ही रहेगा। महानंदा नगर स्थित तारामंडल में होने वाला यह आयोजन दोपहर 3.30 बजे होगा। इसमें उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की दिल्ली में बैठकें और प्रधानमंत्री से मुलाकात के चलते उन्होंने यहां आना निरस्त किया है। इससे पहले कलेक्टर आशीषसिंह, एसपी सत्येंद्र कुमार शुक्ला सहित अन्य अधिकारियों ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर उचित तैयारियों के निर्देश दिए थे।

यह विशेषताएं हैं साइंस सिटी की -
भारत सरकार द्वारा उज्जैन में उप क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र की स्थापना हने जा रही है। जिसमें शिक्षा से जुड़े लोग लाभान्वित होंगे। दूसरी और जन समुदाय की विज्ञान में रूचि बढ़ेगी। विज्ञान के अनसुलझे रहस्यों के बारे में विद्यार्थी जान सकेंगे। विज्ञान केंद्र में आधुनिक उपकरण लगेंगे। इसे आगे चलकर काल गणना के बड़े केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। 15.2 करोड़ की लागत से बनने वाले उप क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र की आधारशिला कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गेहलोत रखेंगे।

- 21.75 एकड़ में फैले तारा मंडल की जमीन पर क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र आकार लेगा।

- इसे इनोवेशन हब बनाया जाएगा जिसकी स्थापना में 1.50 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यही विज्ञान केंद्र साइंस सिटी का रूप ले लेगा। - कई हाईटेक उपकरण व गैजेट्स लगेंगे।

- इनोवेशन हब में उपकरणों पर विद्यार्थी शोध कर सकेंगे।

- विद्यार्थियों को लैब में मृदा, जल एवं खादय पदार्थ के नमूनों का परीक्षण भी सिखाया जायगा।

- विज्ञान केंद्र में 14 करोड़ में थ्रीडी स्टूडियो भी बनेगा जिसमें विज्ञान की दृष्टि से सबसे उन्नत उपकरण लगाए जाएंगे।

- 15 करोड़ से अधिक की लागत से तारा मंडल वसंत विहार में बनने वाले विज्ञान केंद्र में राज्य शासन 8.65 करोड़ देगा। शेष राशि 6.55 करोड़ राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद् कोलकाता और संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार दिल्ली की ओर से दी जाएगी।

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