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पढ़ते समय घड़ी नहीं देखी:NEET में उज्जैन के टॉपर अमोघ सक्सेना से जानिये कैसे हासिल किया मुकाम, अब आर्मी में डॉक्टर बनने की इच्छा

उज्जैन7 महीने पहले
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अमोघ सक्सेना - Dainik Bhaskar
अमोघ सक्सेना

नेशनल इंट्रेंस कम एलिजिबिलिटी टेस्ट (NEET) की परीक्षा में अमोघ सक्सेना ने शहर में टॉप किया है। अमोघ ने भास्कर को बताया कि 10वीं क्लास में पढ़ते समय ही उन्होंने 11वीं और 12वीं का बायलॉजी विषय पढ़ लिया था। आर्मी में डॉक्टर बनने का सपना कक्षा 9 से ही देखना शुरू कर दिया था।

पिता नीरज कुमार सक्सेना और मां अनु सक्सेना के साथ अमोघ।
पिता नीरज कुमार सक्सेना और मां अनु सक्सेना के साथ अमोघ।

इसके बाद 10वीं में आते ही NEET की कोचिंग लेना शुरू कर दी थी। लगातार दो साल की तैयारी के बाद अमोघ ने सिटी में टॉप किया। उज्जैन के महानंदा नगर में रहने वाले अमोघ की ऑल इंडिया रैंक 850 बनी है। वह अब आर्मी में डॉक्टर बनना चाहते हैं। अमोघ ने बताया सफलता का श्रेय मां अनु सक्सेना को देते हैं। कहते हैं, जब मैं पढ़ने बैठता तो मेरी सारी जरुरतें वे ही पूरी करती थीं। मुझे मेरे पिता नीरज कुमार सक्सेना जो इंडियन बैंक में मैनेजर हैं, लगातार प्रोत्साहित करते रहे। घर में सबकुछ होने के बाद भी मैंने टीवी नहीं देखी। मोबाइल गेम क्या होते हैं नहीं जानता, फ्री फायर के बारे में केवल सुना है।

मैंने 10वीं से ही पढ़ाई पर फोकस रखा था। पढ़ते समय कभी भी घड़ी सामने नहीं रखता था और पूरे इंट्रेस्ट से पढ़ाई करता था, इस वजह से भी मेरा दिमाग दूसरी बातों में नहीं जाता था। खाली समय या थक जाने पर हिस्टोरिकल चैनल ही देखता था। ऐतिहासिक चीजों के बारे में जानने में मेरी ज्यादा रूचि है। अमोघ ने कहा मैंने NEET की तैयारी के साथ 10वीं, 11वीं और 12वीं की पढ़ाई पर भी फोकस किया। इसी वजह से 10वीं में 86%, 11वीं में 88% और 12वीं में 91 प्रतिशत अंकों के साथ पास हुआ।

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