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महाकाल मंदिर:भगवान महाकालेश्वर को लग रहा मंदिर में बने सादे भोजन का भोग; केवल पुजारी और कर्मचारियों की ही आवाजाही

उज्जैन11 दिन पहले
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  • कोरोना संक्रमण के लॉकडाउन में दर्शनार्थियों का मंदिर में प्रवेश प्रतिबंधित

लॉकडाउन में बाजार बंद होने से भगवान महाकाल को भक्तों द्वारा लाई जाने वाली मिठाइयों का भोग नहीं लग पा रहा। लॉकडाउन में मंदिर में बनने वाले सादे भोजन, चावल और दूध का ही भोग लगाया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के पहले दौर के अनलॉक के समय से ही प्रशासन ने मंदिर में प्रवेश के लिए ऑनलाइन प्री-परमिशन से प्रवेश की शुरुआत कर दी थी। इससे दर्शनार्थियों की संख्या सीमित करने में प्रशासन को सफलता मिली। लॉकडाउन का दूसरा दौर शुरू होने पर जब संक्रमण बढ़ाने लगा को एहतियाती कदम उठाए गए और पर्व त्योहार पर श्रद्धालुओं को परमिशन की संख्या कम कर दी।

लेकिन लॉकडाउन के आदेश के साथ ही प्रवेश पूरी तरह रोक दिया गया है। इससे श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा। केवल पुजारी, पुरोहित और कर्मचारियों को ही मंदिर में जाने की अनुमति है। पुजारियों, पुरोहितों द्वारा मंदिर की परंपराओं का पूर्ण रूप से निर्वाह किया जा रहा है। इसमें तड़के 4 बजे होने वाली भस्मआरती से लेकर रात 10.30 बजे होने वाली शयन आरती तक की सभी परंपराएं पूर्ण की जाती है। रात 11 बजे शयन के साथ गर्भगृह के पट बंद होते हैं।

यह है भगवान के भोजन की परंपरा

  • भगवान को परंपरानुसार लगने वाले भोग मंदिर प्रबंध समिति द्वारा ही लगाए जाते हैं। इसमें सुबह 7 बजे चावल, सुबह 10.30 बजे भोजन थाली और शाम 7 बजे दूध का भोग लगाया जाता है।
  • भोग मंदिर समिति द्वारा तय कर्मचारी बनाते हैं। भोग के लिए नैवैद्य कक्ष नियत है। यहां शुद्धता के साथ भोजन बनता है। भोजन सामग्री का खर्च मंदिर समिति करती है।
  • भोजन थाली में सामान्य घरेलू भोजन रहता है। इसमें रोटी, मौसमी सब्जी, दाल-चावल, कढ़ी, लड्डू आदि शामिल है। जिस तरह घर में रोज भोजन बनता है, उसी तरह मंदिर में भी बनता है।

श्रद्धालु कभी भी लगा सकते हैं भोग
सामान्य दिनों में श्रद्धालु पूजन सामग्री और भोग प्रसाद लेकर आते हैं। पुजारी प्रतीकात्मक रूप से उनके भोग को भगवान को अर्पित कर लौटा देते हैं। मंदिर समिति के सदस्य पं. आशीष पुजारी का कहना है कि भगवान को परंपरा अनुसार भोग केवल मंदिर समिति ही लगाती है। श्रद्धालुओं द्वारा लाए जाने वाला भोग प्रसाद प्रतीकात्मक रूप से भगवान को अर्पित किया जाता है। यह प्रसाद श्रद्धालुओं को वापस दिया जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार मिठाई, फल आदि भोग में लेकर आते हैं। श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद होने के कारण भगवान को परंपरा अनुसार मंदिर में बनाया गया भोग अर्पित किया जा रहा है।

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