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शादी विवाह पर रोक:उज्जैन जिले में 5 मई के बाद के विवाह कानूनी मान्य नहीं, पंजीयन नहीं होगा

उज्जैनएक महीने पहले
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  • गांवों में कोरोना के लिए छुपकर हुई शादी और नुक्ते भी कारण, बड़ा एक्शन-

कोरोना नियंत्रण के लिए प्रशासन हर सख्त कदम उठा रहा है। अब जो कदम प्रशासन ने उठाया है उससे कई लोगों के शादी-ब्याह भी सवालों के घेरे में आ गए हैं। दरअसल कलेक्टर आशीष सिंह ने आदेश जारी किए हैं कि पांच मई के बाद किए गए विवाहों के पंजीयन नहीं होंगे। यदि गलती से पंजीयन जारी हो भी गए तो ऐसे पंजीयनों को निरस्त किया जाएगा। इधर एक अनुमान के हिसाब से पांच मई के बाद जिले में 200 से अधिक शादियां हुई होंगी। प्रशासन के इस आदेश का दूसरे शब्दों में मतलब निकाला जाए तो पांच मई के बाद जिन्होंने भी चोरी-छिपे शादी की है, वह कानूनी रूपी से मान्य नहीं होंगी। इस संबंध में कलेक्टर सिंह ने जारी आदेश में स्पष्ट किया है कि प्रशासन द्वारा पांच मई से धारा 144 के तहत विवाह पर रोक लगा दी गई थी।

साथ ही पूर्व में दी गई विवाह की सभी अनुमतियों को भी निरस्त कर दिया गया था। बावजूद संज्ञान में आया कि कतिपय व्यक्तियों द्वारा चुपचाप विवाह आयोजित किए गए हैं। ऐसे सभी विवाह के पंजीयन नही करने के लिए नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया गया है। आदेश में साफ कर दिया गया है कि 5 मई के बाद के विवाह यदि गलती से पंजीकृत हो गए हैं तो उन्हें तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।

200 से ज्यादा शादियों का अनुमान,अब ये दिक्कत आएगी

  • शादी-ब्याह का प्रमाण पत्र कई बार नौकरियों में भी मांगा जाने लगा है।
  • वीजा बनवाने सहित कई कानूनी मामलों में भी प्रमाण पत्र व पंजीयन की होती है।
  • खासकर संपत्ति, वारिस व तलाक से जुड़े मामलों में शादी के पंजीयन व प्रमाण पत्र की जरूरत होती है।
  • कुछेक स्कूलों में भी पैरेंट्स का विवाह प्रमाण पत्र मांगा जाता है।
  • योजनाओं का लाभ लेने व कुछेक पेंशन के लिए दस्तावेज काम आता है।

...और ये सबक अच्छा है : 120 लोग संक्रमित हुए पर घबराएं नहीं, शादियां और मृत्युभोज रोके, गांव के रास्ते भी बंद किए

शहर से 15 किलोमीटर दूर ताजपुर। केंद्र में होने से इसके आसपास के 7 गांव के लोग यहां रोजमर्रा की खरीदी के लिए आते हैं। इलाज भी यहीं करवाते हैं। एक महीने पहले अचानक हालात बदल गए। लोग संक्रमित होने लगे। स्पष्ट वजह पता नहीं चल रही थी। बार-बार खोजने पर पता चला कि गांव के लोग या तो शहर जाते हैं या आसपास के ग्रामीण यहां आते हैं।

ऐसे में तय हुआ कि अब लोग शादियों में नहीं जाएंगे। मृत्युभोज से भी दूरी बनाई। रहवासियों का कहना है कि उस वक्त तक करीब 30 लोग संक्रमित हो गए थे। फिर एक सख्त निर्णय लिया कि गांव के रास्ते ही बंद कर दिए जाएं। शादियां बंद थी तो टेंट वाले से कनात मंगवाई और मुख्य रास्तों पर लगवा दी। सरपंच सीमा कुंवर के अनुसार इस काम में पूरे गांव के युवाओं के साथ अन्य लोगों ने भी सहयोग किया। उज्जैन जिले में...लोगों को समझाइश दी कि वे मास्क पहनें। जब तक बहुत जरूरी न हो घर से बाहर न निकलें। उन्होंने भी वैसे ही किया। एक महीने बाद आखिर हालत नियंत्रण में हैं। खांसी, सर्दी, बुखार वाले लोग होम क्वारेंटाइन हैं। वे उसी तरह नियमों का पालन कर रहे हैं जैसे शहरों में हो रहा है।

उज्जैनिया : चेन तोड़ने बाहरी लोगों पर लगाई पाबंदी

ग्राम पंचायत उज्जैनिया में गलियां सूनी थी। बाहर एक मकान पर कपड़े का बैनर लटक रहा था। उस पर लिखा था गांव में संपूर्ण लॉकडाउन है। बाहरी व्यक्ति का आना सख्त मना है। पूछने पर पता लगा कि 20 दिन पहले गांव में 25 लोग कोरोना पॉजिटिव आ गए थे। तब पता लगा कि वे बाहरी लोगों के संपर्क में आए थे।

कोरोना की चेन तोड़ने के लिए पहला काम यह कि बाहरी रास्ते ही बंद कर दिए। इसका परिणाम भी सामने आने लगा है। अब कोई नए केस नहीं आ रहे हैं। जो थे, वे भी पहले की तुलना में स्वस्थ हो रहे हैं।

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