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मेडिकल विश्वविद्यालय की लेतलाली:मेडिकल विवि ने अटकाया 3800 नर्सेस का भविष्य, नौकरी के लिए सिलेक्ट लेकिन तीन महीने बाद भी रिजल्ट नहीं

उज्जैन2 महीने पहले
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इस साल जून में नर्सिंग के चौथे और आखिरी साल की परीक्षा देने वाली छात्राओं का भविष्य अंधेरे में है। जून में परीक्षा के बाद जुलाई में रिजल्ट आ जाना था, लेकिन जबलपुर स्थित मेडिकल विवि द्वारा रिजल्ट घोषित नहीं किए जाने से ये छात्राएं बेरोजगार बैठी हैं। हालांकि मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर के कुलसचिव का कहना है कि उन्हें इस बारे में हमारे पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। उन्होंने कुलपति से इस संबंध में जानकारी मांगी है।

मप्र में नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) में पूरे प्रदेश के लिए इस साल 3800 नर्सेस का चयन हो चुका है। लेकिन आखिरी साल का रिजल्ट नहीं मिलने से वे नौकरी जॉइन नहीं कर पा रही हैं। छात्रा रोशनी मेहता ने बताया कि रिजल्ट नहीं मिलने से न तो एनएचएम द्वारा ली गई सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) के पद पर नियुक्ति नहीं मिल रही है। इतना ही नहीं जिन नर्सेस का सिलेक्शन इस परीक्षा में नहीं हुआ था उन्हें भी किसी अस्पताल में नौकरी नहीं मिल रही है। इसके चलते ये सभी 3 माह से बेरोजगार बैठे हैं।

जून में परीक्षा, 45 दिन में रिजल्ट आना था

नर्सेस की चौथे और आखिरी साल की परीक्षा जून में पूरी हो चुकी थी। नियमानुसार जबलपुर मेडिकल कॉलेज को जुलाई में ही रिजल्ट दे देना था, लेकिन तीन माह बीत जाने के बाद भी रिजल्ट नहीं आया। रोशनी ने बताया कि हमारा रिजल्ट आते ही पोस्टिंग दे दी जाएगी।

वेक्सीनेशन में अहम भूमिका है सीएचओ की

कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर यानी सीएचओ की वैक्सीनेशन में सबसे अहम भूमिका है। ग्रामीण इलाकों में 6 हजार की आबादी पर एक सबसेंटर बनाकर उसका प्रभारी सीएचओ काे दिया जाता है। एएनएम, जेएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की रिपोर्टिंग इन्हीं सीएचओ को रहती है। रोशनी ने कहा यदि प्रदेश में 3800 सीएचओ की नियुक्ती हो गई होती तो मध्यप्रदेश ग्रामीण इलाकों में वैक्सीनेशन में और बेहतर प्रदर्शन कर सकता था।

हमारे पास कोई रिकॉर्ड नहीं, कहां से जारी करें रिजल्ट
हमारे पास नर्सेस की परीक्षाओं का कोई रिकॉर्ड नहीं है। हम कैसे रिजल्ट जारी कर सकते हैं। मेडिकल विवि के कुलपति को पत्र लिखकर इस संबंध में जानकारी मांगी है। वहां से जो भी जवाब आएगा उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पीके बुधौलिया, कुलसचिव, मप्र, आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर।