कोरोना के दो वर्ष बाद शिप्रा तीर्थ परिक्रमा:गाँवों में आमंत्रण देने के लिए मोटर साइकिल से जाएंगे सदस्य

उज्जैन10 दिन पहले
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उज्जैन। कोरोना काल के दो वर्ष के बाद शिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा इस बार 8 जून को बाबा महाकाल के शिखर दर्शन के साथ शुरू होगी। 37 कि.मी. लंबी यात्रा के दौरान शिप्रा तट पर आने वाले देव स्थलों में दर्शन करने के बाद 9 जून को यात्रा का समापन होगा। समापन पर शिप्रा का अभिषेक व सोलह श्रृंगार कर तीन सौ फीट लंबी चुनरी औढाई जाएगी। यात्रा में दस हजार से अधिक श्रद्धालु उमड़ेंगे।

शनिवार को दशहरा मैदान स्थित आवास पर शिप्रा तीर्थ परिक्रमा आयोजन समिति की बैठक उच्च उच्च मंत्री डॉ.मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में उपस्थित करीब 60 से अधिक आयोजन समिति के सदस्यों ने विगत 17 वर्षों से चल रही शिप्रा तीर्थ परिक्रमा के संबंध में विचार-विमर्श किया। बैठक में तय हुआ कि दो दिवसीय यह यात्रा सुबह 8 जून को मां शिप्रा का पूजन अभिषेक कर प्रारंभ होगी। यात्रा का समापन 9 जून को होगा। मंत्री डाॅ. यादव ने कहा कि सभी क्षेत्रों में जल संरक्षण करने की दिशा में पहल की जाएगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में तालाब निर्माण करने और गहरी करण करने पर ध्यान दिया जाएगा। इससे पर्यावरण और जल संरक्षण की ओर जन जागरूकता भी आएगी। यात्रा पहले दिन 21 कि.मी., दूसरे दिन 14 कि.मी.की होगी । यात्रा में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों श्रद्धालु भाग लेकर शिप्रा के किनारे आने वाले देव स्थलों पर दर्शन करेंगे।

गांव-गांव में मोटर साइकिल से आमंत्रण देने जाएंगे

बैठक में बताया गया कि आयोजन से जुड़े सदस्य ग्रामीण क्षेत्रों में मोटर साइकिल से आंमत्रण देने जाएंगे। इस दौरान गांव में स्थित देव स्थलों की देख रेख करने के साथ मंदिर में जरूरी सुविधा को पूरा करेंगे। गांव में आमंत्रण देने वाले सदस्यों की अगवानी महिलाएं सिर पर कलश रखकर करेंगी।

यह होगा यात्रा का मार्ग

शिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा रामघाट से नृसिंह घाट, आनंदेश्वर मंदिर, जगदीश मंदिर, गऊघाट, जंतर-मंतर, वरूणेश्वर महादेव, त्रिवेणी शनि मंदिर पहुंचेगी। इसके बाद गोठडा, सिकंदरी, दाउदखेड़ी, चिंतामण, मंगरोला फंटा, लालपुल होते हुए भूखी माता मंदिर से दत्त अखाडा, रणजीत हनुमान, कालभैरव, अंगारेश्वर महादेव, कमेड, मंगलनाथ, सांदीपनि आश्रम, गढ़कालिका, भर्तृहरि गुफा, ऋणमुक्तेश्वर, वाल्मीकि धाम, उदासीन अखाडा पहुंचेगी। गंगा दशहरा के अवसर पर शिप्रा-गंगा पूजन कर शिप्रा मैय्या को सोलह शृंगार की सामग्री अर्पण कर चुनरी ओढ़ाई जाएगी। इस दौरान भजन संध्या का भी आयोजन भी होगा।