73 की उम्र में साइकिल से भारत नापने का जज्बा:1500 किलोमीटर की साइकिल यात्रा कर उज्जैन पहुंचे पद्मश्री डॉ. किरण सेठ

उज्जैन2 महीने पहले

हौसले बुलंद हों और दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो बढ़ती हुई उम्र भी रास्ते की रुकावट नहीं बन सकती। ऐसी ही मिसाल पेश की हैं 73 वर्षीय पद्मश्री से सम्मानित डॉ. किरण सेठ ने। राजघाट दिल्ली से साइकिल यात्रा शुरू कर करीब 1500 किलोमीटर का सफर तय कर मंगलवार को वे उज्जैन पहुंचे। यहां से वे अब वापस दिल्ली तक का सफर शुरू करेंगे।

स्पीक मैके के संस्थापक पद्मश्री डॉ. किरण सेठ ने भारत की गौरवशाली विरासत को युवा पीढ़ी में पहुंचाने व देशवासियों में साइकिल के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से 11 मार्च 2022 को राजघाट नई दिल्ली पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए साइकिल यात्रा का आरंभ किया। इसके बाद अलवर, जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, अहमदाबाद, बड़ौदा, दाहोद, गोधरा, पेटलावद, बदनावर, बड़नगर होते हुए 1500 किलो मीटर की यात्रा कर मंगलवार 3 मई को उज्जैन पहुंचेंगे।

डॉ. सेठ उज्जैन में 3 दिनों तक विभिन्न शिक्षण संस्थानों में छात्र, छात्राओं से रुबरू होंगे। डाॅ. सेठ ने बताया कि करीब 50 दिनों की यात्रा के दौरान प्रतिदिन 40 से 45 किलोमीटर का सफर साइकिल से तय किया। स्पीक मैके के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य पंकज ने बताया कि साइकिल यात्रा का मुख्य उद्देश्य युवाओं में सादगी एवं अनुशासन का संदेश देना एवं पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए साइकिलिंग का महत्व बताना है। डॉ. सेठ के अनुसार जिंदगी जीने के लिए भौतिक सुख-सुविधाओं की आवश्यकता नहीं है। सादगी में ही जीवन के गूढ़ रहस्य छिपे हैं।

यात्रा का उद्देश्य

यात्रा का उद्देश्य स्वास्थय, पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत IIT दिल्ली में प्रोफेसर डाॅ. सेठ ने अपनी साइकिल यात्रा को लेकर कहा कि इस यात्रा के पीछे युवाओं में स्वास्थय को लेकर जागरुकता आए, पर्यावरण का सुधार और स्पीक मैके के कल्चर से हर बच्चों को जोड़ना है। उन्होंने कहा कि मुझे जब साइकिल चलाते हुए नई पीढ़ी देखती है, तो सोचते है कि इस उम्र में कैसे इतनी साइकिल चला लेते हैं। युवाओं को जागरुक करना है, उन्हें जोड़ना है, तो पहले स्वंय ही पहल करना होगी।

आधुनिक साइकिल की जरूरत नहीं

साधारण साइकिल से पूरी होती यात्रा डाॅ. सेठ का मानना है कि यात्रा के लिए आधुनिक साइकिल की जरुरत नहीं है। साधारण साइकिल से अभी तक की यात्रा पूरी की है। इसके पहले दिसंबर में पांडेचेरी से चैन्नई तक साइकिल यात्रा कर चुके है। साइकिल यात्रा स्वंयसेवी आंदोलन है। इसके माध्यम से हम नए बच्चों को संस्कृति से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।