संभाग की सबसे बड़ी कृषि मंडी का हाल:30 टन के कांटों का प्रस्ताव मंजूर नहीं अब भी छोटे कांटे से ही तौल रहे उपज

उज्जैनएक महीने पहले
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  • दो बड़े कांटे लेकिन उनमें व्यापारियों का माल ही तुल रहा

संभाग की सबसे बड़ी कृषि मंडी में तौल को लेकर किसान के मन में अब भी संशय की स्थिति बनी हुई है। किसान जो उपज लेकर आते हैं उनका वजन अमूमन 30 टन से ज्यादा नहीं होता। उनके वाहन बड़े तौल कांटे पर तुलवाने पर वजन में असमानता आती है। यही कारण है कि उनकी उपज छोटे तौल कांटों पर तौली जा रही है।

ऐसा नहीं है कि मंडी में बड़े तौल कांटे नहीं हैं। मंडी कार्यालय के सामने और फुटकर नीलामी शेड के सामने दो तौल कांटे हैं लेकिन उनकी क्षमता 70 और 100 टन है। जिम्मेदारों का कहना है कि 30 टन के तौल कांटे स्थापित करने के लिए मंडी बोर्ड में प्रस्ताव भेजा है। वहां से स्वीकृति मिलते ही काम शुरू कर देंगे। रिमोट से तौल कांटे को संचालित करने का मामला सामने आने के बाद किसानों में आक्रोश है।

छाेटे तौल कांटों पर उपज तौलने में गड़बड़ी का मामला खुद किसान ने पकड़ा। भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष दशरथ पंड्या का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है जब किसान तौल के मामले में खुद काे ठगाए महसूस कर रहे हैं। इसके पहले भी व्यापारियाें, तौल कार्य सहायकों के खिलाफ मामले दर्ज भी हुए लेकिन कुछ ही दिनों में सब सामान्य हो जाता है।

उन्हीं व्यापारियों को लाइसेंस भी जारी कर दिया जाता है और वे फिर से उसी राह पर चलने लगते हैं। जो काम किसानों ने किया वह मंडी समिति के जिम्मेदारों को करना चाहिए। किसान केशरसिंह पटेल ने बताया तौल कांटों की नियमित जांच हो तो इस प्रकार के प्रकरण ही सामने न आए।

रबी और खरीफ में मंडी में औसत 20 से 22 हजार बोरी अनाज लेकर किसान आते हैं। उन्हें नीलामी के बाद तौल की जल्दबाजी होती है। इसी का फायदा कतिपय व्यापारी और तौल कार्य सहायक उठा रहे हैं। मंडी समिति के कर्मचारियों ने तीन महीने पहले तौल कांटों की औपचारिक जांच की थी। उसके बाद सीजन पीक पर आया लेकिन किसी ने कोई जांच नहीं की।

30 टन के तौल कांटे की स्वीकृति का इंतजार

किसानों की उपज जल्दी और आसानी से तौलने के लिए 30 टन के तौल कांटे का प्रस्ताव मंडी बोर्ड मुख्यालय भेजा है। वहां से स्वीकृति मिलते ही उनका लाभ किसानों को मिलने लगेगा।
प्रवीण वर्मा, उपसंचालक मंडी बोर्ड

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