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विवाह मुहूर्त:अप्रैल-मई में शादियों के लिए चिंतामण गणेश को न्योता देने वालों की कतार

उज्जैन14 दिन पहले
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गणेशजी को विवाह अिर्पत की जा रही विवाह पत्रिकाएं। - Dainik Bhaskar
गणेशजी को विवाह अिर्पत की जा रही विवाह पत्रिकाएं।
  • अप्रैल और मई सबसे बड़ा सीजन, गणपति को मना कर ले जा रहे अभिभावक, शादी के बाद वर-वधू आएंगे आशीर्वाद लेने

कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए जूझ रहे प्रशासन के लिए अप्रैल-मई-जून का वैवाहिक सीजन सबसे बड़ी चुनौती होगा। इन महीनों में कितनी शादियां होने वाली हैं, इसका अनुमान चिंतामण गणेश मंदिर में पत्रिका अर्पित करने वालों की कतार से लगाया जा सकता है। इन दिनों यहां रोज दूल्हा-दुल्हन के अभिभावक आकर निर्विघ्न शादी के लिए गणपति को मना कर ले जा रहे हैं। शादी के बाद दूल्हा-दुल्हन आशीर्वाद लेने आएंगे। अप्रैल-मई शादियों का सबसे बड़ा सीजन होता है। इसी में अक्षय तृतीया का अबूझ मुहूर्त भी आता है जब सामूहिक विवाह और उन जोड़ों के विवाह कराए जाते हैं, जिनके नाम से मुहूर्त नहीं निकलते हैं।

2020 के नवंबर-दिसंबर के वैवाहिक सीजन में कई शादियां हुई थीं, क्योंकि इसके पहले के अप्रैल-मई का सीजन लॉकडाउन में बीत गया था। सभी शादियां निरस्त हो गई थी। अब नवंबर-दिसंबर में जो शादियां रह गईं वे भी अप्रैल-मई में होंगी। इसलिए इस सीजन में विवाह समारोहों का दबाव ज्यादा रहेगा। कोरोना संक्रमण से राहत मिलने और वैक्सीन आ जाने से लोगों ने अप्रैल-मई में शादियां निकाल लीं। इसके लिए मैरिज गार्डन, बैंड, घोड़ी, कैटरर आदि सब बुक कर लिए। कोरोना का दूसरा दौर शुरू हो जाने से प्रशासन ने भले विवाह समारोहों के लिए गाइड लाइन तय कर दी है लेकिन लोग अब पीछे नहीं हटना चाहते। इसलिए प्रतिबंधों के बीच भी शादियां होंगी।

मंदिर परिसर में 3 महीने में 116 शादी
चिंतामण गणेश मंदिर में बिना मुहूर्त के शादियां होती हैं। अप्रैल के सात दिन में 10 शादियां परिसर में हो चुकी है। प्रबंधक अभिषेक शर्मा के अनुसार जनवरी और फरवरी में कुल 80 शादियां हुईं थी। तीन महीने में 116 जोड़ों का विवाह मंदिर परिसर में हो चुका है।

मांगलिक कार्य में गणेशजी को आमंत्रण देना लोक परंपरा
पुजारी गणेश गुरु के अनुसार चिंतामण गणेश मंदिर में मालवांचल के लोगों की आस्था है। नागरिक मांगलिक कार्यक्रम के पहले चिंतामण गणेश को आमंत्रण देने आते हैं। यहीं से अपने मांगलिक कार्यक्रम की शुरुआत करते हैं। मंदिर से उन्हें भगवान का आशीर्वाद स्वरूप श्रीफल और अन्य सामग्री दी जाती है, जिसे घर में विवाह समारोह पूरा होने तक रखा जाता है। संपन्न हो जाने पर वे पुन: मंदिर आकर भगवान का पूजन करते हैं तथा दुल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद दिलाते हैं। इसलिए वैवाहिक सीजन में मंदिर में भीड़ बनी रहती है। पत्रिका लिखने वाले पं. सत्यनारायण शर्मा बताते हैं कि यहां पाती के लगन लिखे जाते हैं। यदि परिवार में एक से अधिक बच्चों की शादी करना हो तो एक के नाम का मुहूर्त लेकर बाकी के बच्चों की शादी भी तय कर लेते हैं। इसे पाती के लगन कहा जाता है। अप्रैल से जून तक बड़ी संख्या में शादियां निकाली गई हैं।

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