सुंदरता में दाग:सीवरेज की खुदाई में रामघाट के कीमती पत्थर निकाले जा रहे

उज्जैन6 महीने पहले
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  • घाट की प्राचीनता के लिए स्मार्ट सिटी बना रही प्लान, इधर लापरवाही से पुरातत्व नष्ट हो रहा

सिंहस्थ की परंपरा से जुड़ा शिप्रा के रामघाट की प्राचीनता को नष्ट करने में अब सीवरेज पाइप लाइन का काम भी कारण बन गया है। रामघाट पर पाइप लाइन डालने के लिए की जा रही खुदाई में घाट के कीमती काले पत्थरों को निकाल कर ठेकेदार कहीं ओर डंप कर कर रहे हैं। पाइप लाइन डालने के बाद ठेकेदार मिट्टी का भराव कर उन पर लाल कच्चे पत्थर लगाकर रिपेयर कर देगा।

इसी घाट पर सिंहस्थ में रामानंदी साधु-सतों के अखाड़े शाही स्नान करते हैं। घाट पर काले पत्थर लगे थे। बाद में सौंदर्यीकरण के तहत काले पत्थरों पर कच्चे लाल पत्थर लगा दिए थे। ये लाल पत्थर टूटते-फूटते रहते हैं, जिससे आए दिन घाट पर आने वाले श्रद्धालु लहूलुहान होते हैं। पहले हुई गलतियों के कारण निगम के सिर पर यह अलग से बोझ बन गया है।

लाल पत्थर लगाने के बाद हरसिद्धि पाल नाले से डाली गई सीवरेज लाइन के समय भी इसी तरह घाट पर से काले पत्थर निकाले गए थे। उस समय भी काले पत्थरों को निकाल कर इधर-उधर कर दिया गया था। जहां पूर्व में पाइप लाइन डाली गई थी, वहां भी घाट कमजोर हो चुका है। अब निगम यहां सीवरेज पाइप लाइन डालने का काम कर रहा है। इसके लिए घाट का बड़ा हिस्सा खोदा जा रहा है।

निगम और स्मार्ट सिटी में तालमेल नहीं : इधर स्मार्ट सिटी कंपनी उज्जैन की प्राचीनता निखारने के लिए करोड़ों की योजनाएं बना रही हैं। इनमें रामघाट का पुरातन वैभव लौटाने व सौंदर्यीकरण के काम शामिल हैं। नगर निगम और स्मार्ट सिटी के बीच तालमेल नहीं होने का नतीजा है कि एक तरफ निगम के सीवरेज प्लान में रामघाट के वैभव को नष्ट किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्मार्ट सिटी उसे बचाने की योजना बना रही है।

पुरातत्व विद् की निगरानी में हो खुदाई और मरम्मत
रामघाट पौराणिक तीर्थ स्थल है। किसी भी पुरातत्व स्थल पर खुदाई और निर्माण में पुरातत्व विशेषज्ञ की सलाह ली जाना चाहिए। उज्जैन में केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित वैश्य टेकरी जैसे स्थान भी है। गढ़कालिका क्षेत्र में भी उत्खनन हो चुका है। शहर में हजारों साल पुराने पुरातत्व स्थल हैं। जिनका संरक्षण करना प्रशासन का दायित्व है। ऐसे में रामघाट पर चल रही खुदाई में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। रामघाट से निकली पुरातत्व सामग्री का उपयोग घाट के निर्माण में होना चाहिए।

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