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  • Rs 10 Crore Will Be Invested In The Dona Patal Cluster With 70 Percent Women Workers, More Than 12 Thousand People Will Get Employment

उद्योग नगरी:70 फीसदी महिला श्रमिकों वाले दोना-पत्तल क्लस्टर में 10 करोड़ रुपए का निवेश होगा, 12 हजार से ज्यादा लोगों को मिलेगा रोजगार

उज्जैन12 दिन पहले
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दोना-पत्तल के कारखाने में काम करते श्रमिक। उज्जैन में अिधकांश कारखाने किराए के भवन में चलाए जा रहे है। - Dainik Bhaskar
दोना-पत्तल के कारखाने में काम करते श्रमिक। उज्जैन में अिधकांश कारखाने किराए के भवन में चलाए जा रहे है।
  • पंवासा में उपलब्ध 7 लाख में से 4 लाख वर्ग फीट जमीन दें, क्योंकि उद्योगों में काम करने वालों की बस्तियां आसपास

सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला दूसरा उद्योग दोना-पत्तल है। 15 मशीन के एक कारखाने में 20 लोगों को रोजगार मिलता है। दोना-पत्तल क्लस्टर में आने के लिए 25 से ज्यादा उद्योगपति तैयार हैं। इनसे करीब 10 करोड़ रुपए के निवेश के साथ 12 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा।

क्लस्टर के लिए पंवासा की जमीन देख चुके उद्योगपतियों का कहना है यहां 7 लाख वर्गफीट जमीन उपलब्ध है। इसमें से 4 लाख वर्ग फीट जमीन भी यदि क्लस्टर को आवंटित कर दी जाती है तो बड़ा क्लस्टर खड़ा हो सकता है।

शहर में फिलहाल 80 से ज्यादा दोना-पत्तल के छोटे-बड़े कारखाने चल रहे हैं। इनमें 10 हजार से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं। यह उद्योग अभी इधर-उधर बिखरे हुए हैं। अधिकांश किराए के भवन में चलाए जा रहे हैं। इसलिए उनका विस्तार भी नहीं हो पा रहा।

राज्य शासन द्वारा छोटे उद्योगों के लिए क्लस्टर स्कीम लाने से इस क्षेत्र में कार्यरत उद्योगपतियों में आशा जागी है। इस उद्योग को आगे बढ़ाने में तत्पर उद्योगपति इस दिशा में उद्योगपतियों को एकजुट कर रहे हैं।

उज्जैन बन रहा दोना-पत्तल कलस्टर का केंद्र

लघु उद्योग भारती से जुड़े सुनील पिठवे, आनंद दशोरा और साथी क्लस्टर की तैयारी में लगे हैं। उनका कहना है कि उज्जैन दोना-पत्तल उद्योग का भी बड़ा केंद्र बन रहा है। यहां निर्मित दोना-पत्तल देश भर में सप्लाई होते हैं। खासकर मप्र से लगे राज्यों राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ आदि में बहुतायत में डिमांड रहती है।

अब तक बिना किसी सरकारी सहायता के उद्योगपति अपने स्तर पर ही इस उद्योग को आगे बढ़ाते आए हैं। अब राज्य सरकार ने नई नीति लागू की है तो उद्योगपतियों में उत्साह आ गया है। राज्य शासन यदि जमीन और बैंकिंग सुविधा उपलब्ध करा दे तो नए उद्योगपति आगे आएंगे तथा हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। इसका फायदा ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को भी मिलेगा।

सुरक्षित क्षेत्र, शहर के बीच जरूरी

उद्योगपतियों का कहना है कि इस उद्योग में 70 फीसदी महिलाएं काम करती हैं। यह महिलाएं गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की हैं। वे घर संभालने के साथ काम करती हैं। इसलिए क्लस्टर के लिए शहर के भीतर ऐसे क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराना आवश्यक है जो इन श्रमिक बस्तियों के आसपास हो। ऐसा एक क्षेत्र पंवासा है। पंवासा के आसपास इन उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों का निवास है। इनमें पंवासा, पांड्याखेड़ी, मक्सीरोड की बस्तियां, आगररोड की बस्तियां आदि शामिल हैं।

क्लस्टर के लिए 25 उद्योगपति तैयार

पिठवे बताते हैं कि क्लस्टर के लिए 25 उद्योगपति तैयार हो गए हैं। छोटे-बड़े उद्योग को 2 हजार से लेकर 35 हजार वर्ग फीट जमीन की जरूरत है। पंवासा में 4 लाख वर्गफीट जमीन मिल जाए तो यह सभी उद्योग वहां आ सकते हैं।

इन नए उद्योगों के अलावा जो पहले से किराए के भवन में चल रहे हैं वे भी क्लस्टर में आने को तैयार हैं। क्लस्टर में उन्हें विस्तार की सुविधा भी मिल जाएगी। शुरुआत में यहां 10 से 12 करोड़ रुपए का निवेश हो सकता है। ऐसे भी उद्यमी आगे आए हैं जो बड़ी इकाई लगाने को भी तैयार हैं।

किसी तरह का प्रदूषण नहीं होता

उद्योगपति क्लस्टर के लिए प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं। प्रस्ताव के अनुसार यह उद्योग शहरी क्षेत्र में स्थापित करने में इसलिए भी गुरेज नहीं है, क्योंकि यह किसी तरह का प्रदूषण नहीं करता। इन उद्योगों से न ध्वनि प्रदूषण होता है, न ही वायु प्रदूषण।

महिला उद्यमी ज्यादा होने से उनकी सुरक्षा व आवागमन सुविधा को देखते शहर में जमीन की दरकार किया जा रही है। शहर के बाहरी हिस्से में यदि जमीन दी जाती है तो क्लस्टर स्थापित करने में मुश्किल होगी। इसके लिए प्रशासन उद्योगपतियों के साथ विमर्श कर सकता है।

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